निष्पक्षता के नाम पर हर बार एकतरफा बाते क्यों करती है ज़ैनब मैडम ?

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अक्सर हमे सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे ट्वीट देखने को मिलते रहते है. ये हमे खासकर तब दिखते हैं जब हिंदू त्यौहार आने लगते है, तब अचानक से हमारे देश कि लिबरल गैंग सक्रिय हो जाती है और pollution का रोना रोने लगती है, अचानक से ही इन्हें वातावरण की चिंता सताने लगती है. हम ये नही कह रहे कि pollution पर चिंता नही करनी चाहिए. लेकिन कुछ लोग है जो खुद के समुदाय को न देख कर दुसरे समुदायों पर उंगली उठाने लगते है. और उन्ही लोगों में से एक है जैनब सिकंदर जो बिना देखे कुछ भी अपने ट्विटर हैंडल पर टंगा देती है. बचपन में बढे बूढ़े कहा भी करते थे कि जब तुम किसी के ऊपर एक उंगली उठाते हो तो 3 उंगली खुद तुम्हारे ऊपर भी उठ जाती है. मतलब कि पहले अपने बारे में 3 बार सोचो फिर जाकर किसी पर उंगली उठाओ. ऐसा ही कुछ किया है जैनब मोहतरमा ने.

दरअसल उन्हें ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि किसी पर्यावरण मुद्दे पर केवल अपनी राय व्यक्त करने के लिए जिहादी आतंकवादी कहे जाने के जोखिम पर, क्या मैं केवल उन लोगों से पूछ सकती हूं जो प्राकृतिक water bodies में गणपति विसर्जन करते हैं. आप Eco friendly या biodegradable मूर्तियों का इस्तेमाल क्यों नही करते. उन्होंने हिन्दुओं को तो ज्ञान दे दिया लेकिन कुछ दिनों पहले मोहर्रम था तब तो आपने पर्यावरणीय मुद्दे पर अपनी राय नही दी. आपने अपने लोगों से इको-फ्रेंडली ताज़िया का उपयोग करने के लिए क्यों नही कहा? या फिर यूँ कहे कि आप इसके लिए भी फतवा प्राप्त कर सकते हैं? आप अन्य समुदाय को विकसित करना चाहते हैं लेकिन खुद के समुदाय को नहीं. आप अन्य समुदाय को Eco friendly त्यौहार मनाने की हिदायत देते है, लेकिन जब आपका समुदाय पर्यावरण को नुक्सान पहुंचाता है तो आप ही लोग चुप्पी साध लेते है. वाह! हमें ज़ैनब जैसे और निस्वार्थ सामाजिक कार्यकर्ताओं की आवश्यकता है. Eco friendly त्यौहार बनाना बिलकुल सही है. लोगों को इसको लेकर जागरूक भी करना चाहिए. पर्यावरण की देखभाल करना हर किसी की जिम्मेदारी है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं की हमें केवल दूसरों की गलतियों पर ध्यान देना चाहिए और खुद की गलतियों को नज़रंदाज़ कर देना चाहिए.

मोहतरमा हमारा समाज समय के साथ बदलना जनता है इसीलिए तो लोग क्ले और इको-फ्रेंडली मूर्तियों की ओर बढ़ रहे है और कुछ ने छोटे आकार के गणेश की मूर्ति का उपयोग करना भी शुरू कर दिया है ताकि वो किसी भी Artificial pool में विसर्जन कर सकें. लेकिन आप ज़रा ये बताएं कि तज़िया का क्या? वो पर्यावरण के अनुकूल क्यों नहीं हो सकता ?? जैनब मोहतरमा दुसरो पर कीचड़ उछालने से पहले अपने आप को भी देख लीजिये. यूँ एकतरफा बाते करके लोगों को भडकाइये मत.