क्या मोदी और शाह की जोड़ी बदलेगी जम्मू-कश्मीर का सियासी नक्शा ?

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अमित शाह गृह मंत्रलाय सँभालते ही अपने एक्शन में मोड़ में आ गये है, दरअसल, कुछ दिनों पहले अमित शाह और pm मोदी ने जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मुलाकात की थी, और सूत्रों से मिली खबर अनुसार जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्य पाल मलिक ने इसी मुलाकात के दौरान उन्होंने अमित शाह को जम्मू-कश्मीर पर तीन पन्नों की एक रिपोर्ट भी सौंपी थी…और उन्ही सूत्रों का कहना है कि इस रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर के नए सिरे से परिसीमन की बात कही गई थी …कि, गृह मंत्रालय जम्मू-कश्मीर में नए सिरे से परिसीमन की योजना बना रही है…इसके लिए गृह मंत्रालय में एक परिसीमन कमीशन तक बनाया जा सकता है, वैसे सूत्रों के हवाले और मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार इस ख़बर से ही जम्मू कश्मीर में बीजेपी नेताओं का जोश हाई हो गया था।
लेकिन इसकी चर्चा मात्र से ही कि केंद्र सरकार विधानसभा सीटों का नए सिरे से परिसीमन कराने पर विचार कर रहा है, पूर्व जम्मू कश्मीर मुख्यमंत्री और (PDP) यानि पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती का पारा एकदम से चढ़ गया था और उन्होंने तुरंत विरोध के सुर उठाना भी शुरू कर दिया था,
महबूबा ने ट्वीट करते हुए कहा कि , ‘जम्मू एवं कश्मीर में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों का नक्शा फिर से खींचने की योजना के बारे में सुनकर परेशान हूं।’ महबूबा ने अपने ट्वीट में आगे लिखा, ‘जबरन सरहदबंदी साफ तौर पर सांप्रदायिक नजरिये से सूबे के एक और जज्बाती बंटवारे की कोशिश है।
यहाँ हम आपको बताना चाहते है कि आखिर कब हुआ था आखिरी परिसीमन
तो बात थी 1995 कि जब जम्मू कश्मीर में परिसीमन हुआ था…वैसे तो जम्मू कश्मीर के संविधान के मुताबिक राज्य में हर 10 साल के बाद परिसीमन होना था..और ऐसे में राज्य में सीटों का परिसीमन 2005 में ही होना चाहिए था. क्यों कि 95 से 2005 तक दस साल पूरे हो गये थे ,लेकिन तत्कालीन सीएम फारुक अब्दुल्ला ने 2002 में इस पर 2026 तक के लिए रोक लगा दी थी..और देश के और राज्यों में 2002 की जनगणना के आधार पर परिसीमन हो चुका है…मगर जम्मू-कश्मीर इससे अछूता है…
अब आगे गृह मंत्रलाय का इस पर क्या फैसला रहा है उससे पहले हम आपको जम्मू कश्मीर की सीटों का गणित क्या है वो बताना चाहते है.
जम्मू-कश्मीर में कुल 111 विधानसभा सीटें आती है . जिनमें से 87 सीटों पर ही चुनाव होते हैं… और इसकी वजह ये है कि जम्मू-कश्मीर के संविधान के सेक्शन 47 के मुताबिक इन 24 सीटों को पाक विधान के सेक्शन 47 के मुताबिक 24 सीटें खाली रखी जाती हैं…और इन खली सीटों 24 को पाक अधिकृत कश्मीर यानि pok के लिए खाली छोड़ दिया जाता है ,पर यहाँ अगर हम आपको गृह मंत्रलाय की की ओर से आये आये फैसले के बारें में बताये तो अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर में नए सिरे से परिसीमन होने की सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है ,और बताया जा रहा है कि गृह मंत्रालय में फिलहाल ऐसी कोई कवायद नहीं चल रही…गृह मंत्री अमित शाह की बैठक तो जरूर हुए थी पर उसमें परिसीमन को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई.और अगर ये खबर सच होती तो ये खाली 24 सीटें भी जम्मू क्षेत्र के खाते में जोड़ दी जाती , जिससे भाजपा को ही फायदा होता..
क्यों की अगर हम सीटों की बात करे तो J&K के किस इलाके में कितनी सीट
कश्मीर- 46
जम्मू- 37
लद्दाख- 4

और 2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी यहां कुल 37 में से 25 सीटें जीत थी और अगर इस नाते हम देखें तो बीजेपी का इसको बड़ा फ़ायदा होता, और ऐसा होने पर जम्मू-कश्मीर का राजनीतिक नक्शा बदल जाता.वैसे दूसरी तरह हम देखें तो मिशन कश्मीरमोदी और शाह की सबसे बड़ी चुनौतीयों में से एक है,पर इन दोनों की जोड़ी ने आतंकियों से निपटने के लिए और कश्मीर सुधार के लिए अपने प्लान्स फिक्स कर रखे है। और इतना ही नहीं आपको याद होगा कि पुलवामा में crpf कि बस पर हुए आत्मघाती हमले के बाद से ही अलगाववादी के सुरक्षा भी मोदी सरकार ने हटा दी थी और एक सन्देश ये भी दिया गया था कि हिदुस्तान का खाना और पाकिस्तान का गाना अब नहीं चलेगा, और अब दूसरी पारी में भी जम्मू-कश्मीर का मुद्दा मोदी सरकार के लिए सबसे अहम मना जा रहा है और इसके लिए काम भी शुरू हो गया है.