‘इस बार लोकसभा चुनाव में वोट न डालना महंगा पड़ जाएगा’- फैक्ट चेक

चुनावों में मतदान के अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए चुनाव आयोग के साथ-साथ राजनीतिक पार्टियां भी मतदाताओं को प्रेरित करती रहती हैं। लेकिन इस बार एक ऐसी खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है..जिसमें वोटरों को डराया जा रहा है कि अगर वे इस बार वोट डालने नहीं गए तो चुनाव आयोग उनके बैंक अकाउंट से 350 रुपए काट लेगा..इस आर्टिकल के हेडलाइन में लिखा है- “वोट देने नहीं गए तो बैंक अकाउंट से कटेंगे 350 रुपए” यह खबर फेसबुक और वाट्सएप के जरिए सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई..खबर के वायरल होते ही वोटरों में हलचल सी मच गई..जिसके बाद हमने इस खबर की पड़ताल करने की सोची..और हमारी टीम ने इस खबर की पड़ताल की..

इस आर्टिकल की पहली लाइन में लिखा है कि ‘इस बार लोकसभा चुनाव में वोट न डालना महंगा पड़ जाएगा’..चुनाव आयोग के प्रवक्ता के हवाले से इस ख़बर में लिखा है कि ‘इस बार जो वोटर वोट नहीं डालेंगे, उनके बैंक अकाउंट से 350 रुपये काटे जाएंगे और जिन वोटर्स के बैंक अकाउंट में 350 रुपये नहीं होंगे, उनसे यह पैसा मोबाइल रिचार्ज के वक़्त काटा जाएगा’..इस खबर में ये भी लिखा है कि..इस आदेश के खिलाफ कोई कोर्ट भी नहीं जा पाएंगा..क्योंकि चुनाव आयोग ने पहले ही कोर्ट से इसकी मंजूरी ले ली है..

जब इस खबर की हमने पड़ताल की तो पाया की ये वायरल समाचार पूरी तरह से भ्रामक और गलत है..दरअसल, इस वायरल अखबार की कटिंग की पड़ताल करने पर हमने पाया की ये नवभारत टाइम्स की न्यूज है..जो होली के दिन प्रकाशित कि गई थी..इसे ‘बुरा ना मानो होली है’ के तहत छापा गया था। वास्तव में अखबार में छपी इस खबर को सिर्फ व्यंग्य के तौर पर लगाया गया था और इसका मकसद हास्य पैदा करना था। लेकिन, लोगों ने इसे सही समझ लिया और इसके कटिंग को वायरल कर दिया…नवभारत टाइम्स के अलावा मराठी अखबार लोकमत ने भी इस खबर को प्रकाशित की थी। इन दोनों ही न्यूज़पेपरों की वेबसाइट पर भी इस खबर को पब्लिश किया गया है..इन दोनों ही वेबसाइट ने इस खबर को पब्लिश करते हुए इसे मजाक बताते हुए डिस्क्लेमर में लिखा है, “इस खबर में कोई सच्चाई नहीं है। ये मजाक है और किसी को आहत करना इसका मकसद नहीं है।”

मतदाताओं की बेचैनी को दूर करते हुए हमने इस खबर की पड़ताल की और हमने अपने पड़ताल में इस खबर को गलत पाया है..दरअसल..अखबार की जिस कटिंग को सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है, वो असल में एक मजाक है और इस खबर का मकसद हास्य पैदा करना है। इस तरह का कोई भी आदेश या नोटिफिकेशन न ही चुनाव आयोग ने और न ही सरकार ने जारी किया है..तो ऐसी खबरों से सावधान रहे..