आखिर कुछ लोग क्यों करते हैं गांधी जी की इतनी आलोचना ?

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विश्व में शांति और अहिंसा के सबसे प्रसिद्ध प्रतीक, सत्याग्रह का ज्ञान देने वाले बापू! मोहनदास करमचंद गांधी! इस नाम को कौन नहीं जानता? 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती पूरे देश में धूम धाम से मनाई जाती है। बचपन से ही आपने गांधी जी के बारे में कई किस्से सुने होंगे, प्रशंसाएं सुनी होंगी। विश्व की कई दिग्गज हस्तियाँ जैसे अल्बर्ट आइन्सटाइन, स्टीव जॉब्स, दलाई लामा, मार्टिन लूथर किंग आदि गांधी जी के फैन रहे हैं। गांधी उनके लिए एक इन्सपिरेशन रहे। लेकिन हर सिक्के के 2 पहलू होते हैं। एक तरफ गांधी को चाहने वालों की भीड़ है तो वहीं दूसरी तरफ इतिहास में आलोचक भी रहे, जिन्होंने खुल के गांधी जी की आलोचना की। आज हम आपको कुछ आलोचकों के द्वारा दिए गए तर्कों के बारे में बताने जा रहे हैं।

भारतीय इतिहासकर रुद्रांग्शु मुखर्जी ने गांधी की आलोचना करते हुए अपनी किताब ‘द ग्रेट स्पीचेस ऑफ मॉडर्न इंडिया’ में कहा कि गांधी ने ‘हिंदुस्तानी’ को राष्ट्रिय भाषा बनाने की कोशिश की थी। गांधी के अनुसार हिंदुस्तानी हिन्दी और उर्दू का मधुर संगम था। मुसलमान नहीं चाहते थे कि देश में हिन्दी प्रमुख भाषा बने। महात्मा गांधी का मुस्लिम प्रेम साफ दिखाई देता है। इस तरह जो गांधी कभी प्रो हिन्दू थे, वो प्रो हिंदुस्तानी हो गए।
एक बार गांधी जी ने मांग की कि दिल्ली में एक मस्जिद में शरण लेने आए हिन्दू रेफ़ुजियों को शांति से मस्जिद खाली कर देनी चाहिए, वरना गांधी आमरण अनशन करेंगे। और वह सच में अनशन के लिए बैठ भी गए। वहीं दूसरी ओर जब पाकिस्तान में हिंदुओं को बेरहमी से मारा जा रहा था, हिन्दू महिलाओं का शोषण किया जा रहा था, तब गांधी जी ने हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ कोई अनशन नहीं किया।

आप को जान कर हैरानी होग बी.आर. अंबेडकर ने बीबीसी रेडियो पर अपने 31 दिसम्बर 1955 वाले इंटरव्यू में भी खुल कर गांधी जी की आलोचना की। उन्होने साफ साफ कहा कि गांधी कास्ट सिस्टम के समर्थक थे। वह 2 तरह के पेपर बनाया करते थे, एक गुजराती में और दूसरा अंग्रेजी में। अंग्रेजी पत्रों में उन्होने कास्ट सिस्टम, छुआछूत आदि का विरोध किया और वहीं दूसरी तरफ उन्होने गुजरती पत्रों में पुरानी कुरीतियों का समर्थन किया।

वहीं स्वतन्त्रता आंदोलन के क्रांतिकारी नेता, विनायक दामोदर सावरकर ने भी अपने लेख ‘गांधी गोंडल’ में गांधी के विचारों कि आलोचना की। उन्होने लिखा कि गांधी के अनुसार अगर कोई आपकी बहन के साथ दुष्कर्म करे तो आपको उस व्यक्ति के पैरों में गिर जाना चाहिए। यदि वह दोषी आपको मारता है तो आपको वो मौत स्वीकार करनी चाहिए।


और भी कई आलोचकों ने गांधी जी की अलग-अलग बातों पर कई बार आलोचना की। बीबीसी, इंडिया टूड़े और अन्य कई बार गांधी के नामालूम किस्सों का खुलासा किया। कभी लड़कियों के साथ उनके अश्लील संबंध की अफवाएं फैलाई जाती हैं तो कभी उनकी हिटलर को लिखी गई चिट्ठी में लिखे ‘डियर फ्रेंड’ पर सवाल उठने लगते हैं। जहां प्रशंसक हैं, वहाँ आलोचना करने वालों का होना भी जायज़ है। लेकिन इतनी आलोचनाओं के बाद भी आज़ादी में उनकी भूमिका पर उंगली नहीं उठाई जा सकती।यही कारण रहा कि उन्हें ‘ महात्मा’ और ‘राष्ट्रपिता’ जैसी उपाधियाँ दी गई है।