पाकिस्तान क्यों है चरमपंथियों पर इतना मेहरबान?

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मसूद अजहर, जैश- ए- मोहम्मद का सरगना. जो ‘मौलाना मसूद अजहर’ कहा जाता है. वो मसूद अजहर जो ज़िहाद के नाम पर नौजवानों को हिंसा की तालीम देता है. वो मसूद अजहर भारत की तरफ से हो रही कड़ी कार्रवाई को देखकर बीमार हो गया. ये वही मसूद अजहर है जो हरकत उल अंसार का हिस्सा था, और जिसको भारत की कैद से छुड़ाने के लिए 1999 में इंडियन एयरलाइन्स का एक विमान तक हाईजैक कर लिया गया, जिसमें 155 लोग सवार थे. नतीजा ये हुआ कि मसूद अजहर को छोड़ दिया गया. जैश- ए- मोहम्मद ने पुलवामा हमले के अलावा पहले हुए और भी कई आतंकी हमलों की खुद ज़िम्मेदारी ली.

बहुत से देश कर रहे हैं मसूद अजहर का विरोध-
ना जाने कितने ही बड़े और ताकतवर देश उस मसूद अज़हर के विरोध में और भारत के समर्थन में खड़े हो गए. और यूनाइटेड नेशन की 1267 समिति में उसे इंटरनेशनल टेररिस्ट घोषित करने के लिए आवेदन कर चुके हैं. लेकिन अब भी कुछ गिने चुने देश हैं, और कुछ मीडिया संस्थाएं हैं, जो ये मानने को तैयार नहीं हैं कि अलकायदा, तालिबान और दूसरे कई आतंकी संगठनों की मदद से बना जैश- ए- मोहम्मद एक आतंकवादी संगठन है.

समझ नहीं आता चीन का समर्थन-
पाकिस्तान जो आतंकवाद की सबसे सुकून भरी पनाहगाह है, वो जब मसूद अजहर का बचाव करता है तो समझ आता है. अलकायदा और तालिबान को चरमपंथी संगठन कहने वाला बीबीसी मीडिया संस्थान जब जैश- ए- मोहम्मद को भी ‘चरमपंथी संगठन’ कहकर संबोधित करता है तो समझ आता है. लेकिन अपने चंद फायदों के लिए, भारत से दुश्मनी निभाने के लिए और पाकिस्तान का दुलार पाने के लिए चीन का मसूद अज़हर को समर्थन देना समझ नहीं आता.

इस बार भी नहीं किया है खुलकर विरोध-
चीन हर बार अपना वीटो लगाकर यूनाइटेड नेशन की तरफ से मसूद अजहर को इंटरनेशनल टेररिस्ट बनाए जाने पर रोक लगा देता है. इस बार भी चीन ने यूनाइटेड नेशन को बाकी देशों की तरफ से दी गयी अर्जी पर खुलकर मसूद अजहर की खिलाफत नहीं की है. वो शायद भूल जाता है कि दुश्मन का दुश्मन दोस्त वाली रणनीति तब ठीक नहीं होती जब बात विश्व एकता की हो, विश्व की सुरक्षा की हो. वो शायद ये भूल जाता है कि चीन- पाक इकनोमिक कॉरिडोर उसे भी आतंकवाद के गढ़ पाकिस्तान से जोड़ता है.

क्या होंगे मसूद अज़हर के इंटरनेशनल टेररिस्ट घोषित हो जाने के नतीजे-
चीन को अगर ये बात समझ आती है, और इसबार यूनाइटेड नेशन की तरफ से मसूद अजहर को इंटरनेशनल टेररिस्ट घोषित कर दिया जाता है तो फिर मसूद अजहर पर कई तरह के प्रतिबन्ध लगा दिए जायेंगे. और पाकिस्तान पर मसूद अज़हर के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बढ़ जाएगा.

विदेश यात्रा होगी प्रतिबंधित-
यूनाइटेड नेशन की तरफ से इंटरनेशनल टेररिस्ट घोषित होने के बाद मसूद अजहर की विदेश यात्राओं पर प्रतिबन्ध लगा दिया जाएगा. मसूद अजहर पाकिस्तान से बाहर नहीं निकल पायेगा. और ऐसा हो जाने से उसकी आतंकी गतिविधियों पर काफी हद तक रोक लगेगी.

बंद होगी फॉरेन फंडिंग-
ये बात दुनिया में किसी से नहीं छुपी है कि आतंकवाद फॉरेन फंडिंग की नींव पर ही पानपता है. बहुत से देश दबे तौर पर गुपचुप तरीके से आतंकवाद का खर्चा चलाते हैं. जैश- ए- मोहम्मद को भी ऐसे ही देशों से पैसा पहुंचता होगा. लेकिन अगर यूनाइटेड नेशन मसूद अजहर को इंटरनेशनल टेररिस्ट घोषित कर देते हैं तो उसकी फॉरेन फंडिंग पर रोक लगेगी. और फॉरेन फंडिंग पर रोक लगने का नतीजा समझ तो गए ही होंगे आप.

संपत्तियों को कर लिया जाएगा फ्रीज-
यूनाइटेड नेशन की तरफ से इंटरनेशनल टेररिस्ट घोषित होने के बाद मसूद अजहर की विश्व में मौजूद संपत्तियों को फ्रीज कर लिया जाएगा. ऐसा हुआ तो वो अपनी उन संपत्तियों से नियंत्रण खो देगा और उन संपत्तियों में से किसी का इस्तेमाल नहीं कर पायेगा.

कुल मिलाकर सिर्फ पाकिस्तान ही बचेगा जो उसकी पनाहगाह बनकर रह जाएगा. मसूद अजहर को जो कुछ भी करना होगा वहाँ बैठे- बैठे ही करना होगा. और इससे उसकी गतिविधियों पर काफी हद तक लगाम लगेगी. यूनाइटेड नेशन की 1267 समिति जल्द ही फ्रांस, यूएस और ब्रिटेन की तरफ से दायर याचिका पर अपना फैसला सुनाएगी. और हमें इस फैसले का इंतज़ार है, क्योंकि हमें देखना है कि पिछली दो बार की तरह चीन इस बार मसूद अजहर का बचाव करता है या नहीं.

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