कौन थे कबीर तिवारी? जिनकी हत्या पर प्रदेश में मचा है हंगामा

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#जस्टिसफॉरकबीर ये पोस्टर शायद आपके सामने गुजरा हो… लेकिन आपने शायद गौर नही किया होगा कि आखिर ये हैं कौन? जिसके लिए जस्टिस की मांग की जा रही है..
एक युवा नेता जो अभी उभर हो रहा था.. एक युवा नेता जो सबको प्रिय था.. नौजवानों से लेकर बुजुर्गों को भी भाता था ये युवा नेता.. इसे दो युवकों ने मिलकर गलियों से भून दिया.. ये घटना उस वक्त हुई जब आदित्य नारायण तिवारी उर्फ़ कबीर चाय की दूकान पर खड़े थे..इस दौरान दो हमलावर कबीर के पास पहुंचे और पैर छूकर प्रणाम किया.. इसके बाद बेहद नजदीक से गोलियों से भून दिया.. इसके बाद कबीर को जिला अस्पताल ले जाया गया.. जहाँ से उन्हें लखनऊ रेफर कर दिया गया हालाँकि रास्ते में ही कबीर ने दम तोड़ दिया.. वहीँ दूसरी तरफ हमलावरों को स्थानीय लोगों ने घेर लिया.. जो पिस्टल फेंकर छुपने की कोशिश कर रहा था. जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार भी किया . कबीर पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष थे और युवाओं इनकी काफी लोकप्रियता थी.. दिन दहाड़े हुए इस घटना से बस्ती जिला हिल गया.. शांति में रहने वाला बस्ती उबल पड़ा.. बस्ती जिले में जमकर उत्पात मचा.. गाड़ियां तोड़ी गयी.. बसे रोंकी गयीं.. पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी दिखी..

दरअसल पुलिस के रवैये पर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं.. आरोपियों को स्थानीय लोगों ने पकड़ा जिसे पुलिस अपनी कामयाबी बता रही है. हालाँकि दोनों ने अपना गुनाह भी कबूल कर लिया है. मिली जानकारी के अनुसार दोनों आरोपी नाबालिग हैं. आरोपियों का कहना था कि कबीर उनसे पैसों की मांग करते थे इसलिए उन्होंने गोली मार दी.. लेकिन कबीर के समर्थकों को इसमें कुछ और ही मामला नजर आ रहा है.. कबीर के चाचा ने कई लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई. जिसमें पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अमन प्रताप सिंह सहित अक्षय प्रताप सिंह, अभिजीत सिंह, मो. शाद, साहिल सिंह, इमरान और दो अज्ञात शामिल हैं. वहीँ बस्ती के सांसद हरीश द्विवेदी भी बस्ती पुलिस पर जमकर बरसे और पुलिस के रवैये पर सवाल खड़ा कर दिए.. बीजेपी सांसद हरीश दि्ववेदी  ने पुलिस अधीक्षक की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मांग की कि उनके खिलाफ 120बी के तहत मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए.

 मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई भी की है. शुक्रवार को योगी सरकार में कानून मंत्री ब्रजेश पाठक ने भी कबीर तिवारी के पैतृक गाँव पहुंचकर श्रधांजली अर्पित की और उच्च स्तरीय जाँच की बात भी कही.. वहीँ जब मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय जांच की बात सामने आई तो सपा के पूर्व प्रवक्ता का एक बेहद घटिया बयान सामने आया.. सपा के पूर्व प्रवक्ता जीतू वर्मा को जातिवाद नजर आ रहा है.दरअसल इस घटना को लेकर सपा के क्रांतिकारी प्रवक्ता ने कहा कि ये है असली जातिवाद.. कबीर तिवारी के हत्या की जांच होगी, पुलिस के रवैये की जाँच होगी.. पुष्पेन्द्र यादव की हत्या की जाँच नही होगी क्योंकि वो निचली जाति से थे क्योंकि वे यादव थे.. सपा के प्रवक्ता का बयान किसी नीच मानशिकता से कम नही है.. हालाँकि जब इन महाशय को सोशल मीडिया पर लोगों ने घेरना शुरू किया तो उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया है लेकिन इतने में ही उन्होंने अपनी घटिया मानशिकता का परिचय तो दे चुके थे..

कबीर तिवारी की हत्या के बाद बस्ती शहर में हुई तोड़ फोड़ व आगजनी की घटना के बाद बस्ती आए एडीजी अभियोजन ने दूसरे दिन शुक्रवार को भी शहर का भ्रमण किया. कानून व्यवस्था का जायजा लिया. इस दौरान उनके साथ डीजीपी मुख्यालय से आए आइपीएस अफसर एस आनंद भी थे. दरअसल कबीर के समर्थक शुक्रवार को कैंडल मार्च निकालना चाहते थे. पुलिस ने सतकर्ता दिखाते हुए इस कैंडल मार्च को रोकने की कोशिश की आयोजकों से बात की लेकिन वे पुलिस की बात सुनने को तैयार नही थे हालाँकि पुलिस ने जब सख्त रवैया अपनाया तो उन्होंने कैंडल मार्च को रोक दिया गया.

 दरअसल कबीर तिवारी हत्याकांड की गुत्थी उलझती जा रही है.. पुलिस के हाथ आरोपियों के अवाला अभी तक खाली है.. अभी तक ना तो हत्या की वजह का पता चला है और ना ही हत्यारों के सरगना का पता लगाने में पुलिस को कामयाबी मिली है.. इन सबमें बस्ती पुलिस सवालों के घेरे में थी जिसपर योगी सरकार ने कार्रवाई की है. दरअसल इस घटना को लेकर पुलिस पर लापरवाही बरतने का आरोप है. वहीँ कबीर के घर पहुंचे कानून मंत्री ने उनके परिजनों को सांत्वना दी और आश्वासन दिया कि इस हत्याकांड की उच्च स्तरीय जांच की जाएगी. कानून मंत्री ने कहा कि वह इस पूरे मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाएंगे. इसमें पुलिस की भूमिका की भी जांच कराई जाएगी. हालाँकि इन सबके बावजूद बस्ती ने एक उभरते नेता को खो दिया है.