कांग्रेस के जहाज को डूबता छोड़ कर राहुल गाँधी छुट्टी मनाने बैंकॉक चले गए

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सन 37 से 68 ईस्वी के बीच रोम पर एक बादशाह राज करता था. उसका नाम था नीरो. सन 64 में रोम में भयंकर आग लग गई. सारा शहर जल कर ख़ाक होने लगा तब नीरो अपने महल के सबसे ऊँची मीनार पर पहुंचा और रोम की विनाशलीला देखते हुए बांसुरी पर सैक ऑफ़ ईलियम की धुन बजाने लगा. ‘सैक ऑफ़ ईलियम’ एक रोमन महाकाव्य है. तभी से कहावत शुरू हो गई कि जब रोम जल रहा था तब नीरो बांसुरी बजा रहा है.

ये थी इतिहास की बात. अब आइये वर्तमान में. नीरो की जगह ले ली राहुल गाँधी ने और रोम की जगह ले ली कांग्रेस पार्टी ने. हुआ दरअसल ये कि शनिवार की रात ट्विटर पर अचानक से बैंकॉक ट्रेंड होने लगा. पहले तो लगा शायद वहां कुछ हुआ है जिस कारण ये ट्रेंड कर रहा है लेकिन थोड़ी ही देर में माजरा समझ आ गया कि कांग्रेस के युवराज राहुल गाँधी दो राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले छुट्टियाँ मनाने बैंकाक चले गए.

कांग्रेस को हमेशा ये शिकायत रहती है कि भाजपा वाले उनके युवराज का मज़ाक उड़ाते हैं, उन्हें पप्पू कहते हैं. लेकिन भाजपा वाले गलत भी तो नहीं कहते. चुनाव के कुछ ही हफ़्तों पहले जब पार्टी में कलह मचा हो, नेता एक दुसरे पर आरोप लगा कर पार्टी छोड़ रहे हों, जिस वक़्त पार्टी के आत्मविश्वास को बूस्ट करने की जरूरत हो, उस वक़्त अगर युवराज ही छुट्टियाँ मनाने चला जाए तो उसका मज़ाक उड़ना स्वाभाविक भी है.

दो दिन पहले ही हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक तंवर ने पार्टी पर टिकट वितरण में धांधली का आरोप लगाते हुए पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया. रायबरेली की विधायक अदिति सिंह खुलेआम बगावत कर के योगी आदित्यनाथ के साथ घूम रही हैं. मुंबई कांग्रेस में घमासान मचा हुआ है, संजय निरुपम पार्टी छोड़ने की बात कर चुके हैं. राहुल गाँधी का नाम स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल है और महाशय छुट्टियाँ मनाने बैंकॉक चले गए तो मज़ाक तो उड़ेगा ही.

दरअसल राहुल गाँधी ने राजनीति को मज़ाक समझ लिया और राजनीति ने राहुल गाँधी को मज़ाक बना दिया. ये हाल उस उस नेता का है जिसे 6 महीनों पहले तक देश का भावी प्रधानमंत्री बताया जा रहा था. उस नेता ने जब लोकसभा चुनाव में हार के बाद इस्तीफ़ा देने की बात की तो उसके कार्यकर्ता जान देने की बात करने लगे. लेकिन उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता. सोशल मीडिया पर लोग ताना मारने लगे “आग लगी बस्ती में, राहुल गाँधी मस्ती में”.

बीजेपी नेता और हरियाणा हाउसिंग बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष जवाहर यादव ने ट्विटर राहुल गांधी पर तंज भी कसा है और लिखा, “कल अहमद पटेल भूपेंद्र सिंह हुड्डा से पूछ रहे थे कि पार्टी कहां गई? आज पता चला है कि पार्टी बैंकॉक चली गई है.”

कुछ लोग ये भी कहने लगे कि चुनाव से ठीक पहले भाजपा को तगड़ा झटका लगा है. उसका स्टार कैम्पेनर ही छुट्टी पर चला गया। अब भाजपा को और मेहनत करनी पड़ेगी.

वैसे ये कोई पहली बार नहीं है कि राहुल गाँधी इस तरह से बैंकॉक चले गए. साल 2015 में राहुल गाँधी करीब 60 दिनों के लिए बैंकॉक चले गए थे. 16 फरवरी, 2015 को बैंकॉक के लिए रवाना हुए थे और ठीक दो महीने बाद 16 अप्रैल को स्वदेश लौटे थे. वैसे देखते हैं इस बार कितने दिनों बाद लौटते हैं. वैसे जितनी जल्दी लौटेंगे भाजपा के लिए उतना ही अच्छा है.