परमाणु परीक्षण के बाद लगे आर्थिक प्रतिबन्धों से कैसे उबरा देश

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“हमने लौटाए सिकंदर, सिर झुकाए, मात खाए, हमसे भिड़ते हैं वे, जिनका मन धरा से भर गया है”

11 मई 1998 राजस्थान के पोखरण में एक धमाका हुआ. जिसने दुनिया के सभी ताकतवर देशों को हिला के रख दिया. ये धमाका था भारत के परमाणु परीक्षण का और धमके के वक़्त केंद्र में सरकार थी अटल बिहारी वाजपेयी की. एक सन्धि हुआ करती थी PTBT. उसमे हस्ताक्षर करने वालो देशों को उस संधि की शर्तों को मानना होता था. शर्त कुछ ऐसी थी आप जल थल और नभ यानी जमीन जल और वायुमंडल में कहीं भी परमाणु परीक्षण नही कर सकते है. अब जिन देशों के पास परमाणु हथियार थे उनका तो मस्त था. लेकिन जिनके पास नही था वे बेचारे क्या करें. दुर्भाग्य से नेहरू जी ने ptbt पे हस्ताक्षर किया हुआ था. अब समस्या विकट थी भारत करे भी तो क्या करे. लेकिन जुगाड़ में हम भारतीयों का कोई सानी नही. इसका तोड़ निकाला गया न तो हम जल में करेंगे न थल में न नभ में हम करेंगे अंडरग्राउंड परीक्षण. अटल जी शायद सोचा होगा सन्धि की शर्तों को तोड़े बिना हम बनाएंगे भारत को अमरीका.

बस फिर क्या था सालों से तैयारी चल ही रही थी वैज्ञानिक लगे हुए थे. जरूरत थी तो बस एक राजनैतिक इच्छाशक्ति की. वो दम दिखाया अटल जी नें. करवा दिया परीक्षण. जैसा कि हमेशा से होता आया है इस परीक्षण से अमेरिका बौखला गया. भारत पे कड़े आर्थिक प्रतिबन्ध. अब नई समस्या. विदेशी मुद्रा आएगी नही व्यापार कैसे होगा. लेकिन गुरु देश ऐसे नही कहा गया भारत को. इसका भी जुगाड़ निकाला गया. अटल जी के ps बृजेश मिश्रा ने प्लान बनाया कि वे भारतवंशी जो विदेशों में रह रहे थे. उनसे मदद ली जाए. अब इतना तो साफ था जो भारतीय अमरीका ब्रिटेन कनाडा ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में रह रहे थे. वे सामान्य भारतीयों से पैसे वाले तो होंगे. उनसे मदद मांगी गई. उनके नाम संदेश दिया गया. आपका देश संकट में है. विदेशी मुद्रा का फ्लो बना रहे इसलिये आप आइये अपने देश मे इन्वेस्ट करिये. बाहर की मुद्रा देश मे लाइये.

अपील कारगर साबित हुई . nri लोगो ने इन्वेस्ट किया. कुछ ने अपनी एक एक महीने की सैलरी तक भेजी. विदेशी मुद्रा की कमी नही होने दी. भारत का व्यापार चलता रहा, ये अमरीका के मुंह पे करारा तमाचा था… प्रतिबन्ध का भारत पे कोई असर न पड़ा. हार मान के अमेरिका को प्रतिबन्ध हटाना. उस वक़्त जो दम हमने दिखाया उसकी बदौलत आज हमे दुनिया की प्रमुख शक्तियों के रूप में गिना जाता है.

लेखक, कवि, पत्रकार, The Chaupal के सम्पादक के रूप में कार्यरत है। सोशल मीडिया पर अपने बेबाक़ राय के लिए जाने जाते है। इनकी कविताएँ और कहानियाँ समय समय पर विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती है। शृंगार रस इनकी रचनाओं में पसंदीदा है। राजनैतिक मामलों और इतिहास के अच्छे जानकार है। अपने प्रशसंको में प्रोपेगैंडा क़िलर के नाम से मशहूर है।

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