दिल्ली की इस सीट पर दो बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. हार-जीत तय करेगा भविष्य

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देश में चल रहा लोकसभा चुनाव अब पूरी तरह से लोगों का ध्यान दिल्ली की राजनीति पर ले आया है. दिल्ली की सातों सीटों पर वोटिंग होने वाली हैं लेकिन वोटिंग से पहले चुनाव प्रचार और उससे पहले गठबंधन वाली ख़बरों ने इस चुनाव को बेहद दिलचस्प बना दिया है. कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और बीजेपी आमने सामने हैं. दिल्ली की सातों सीटें बीजेपी के पास थी.. इस बार कुछ उम्मीदवारों को बदला गया है.. नए चेहरे लाये गये हैं.. गौतम गंभीर और हंस राज हंस जैसे लोग इस बार चुनाव लड़ रहे हैं..लेकिन सबसे ज्यादा चर्चित सीट हैं उत्तर-पूर्वी दिल्ली की सीट… जहाँ पर दो प्रमुख पार्टियों दो प्रमुख नेता आमने सामने हैं. दोनों दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष हैं.. एक मौजूदा सांसद है तो दूसरे दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री हैं.. दिल्ली कांग्रेस की बड़ी नेताओं में गिनी जाती हैं.
दरअसल दिल्ली की उत्तरी-पूर्वी लोकसभा सीट से बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी सांसद हैं और इस बार भी उन्हें ही टिकट मिला है. कांग्रेस ने भी काफी मंथन के बाद अपनी पार्टी की प्रदेश प्रमुख शीला दीक्षित को उनसे दो-दो हाथ करने के लिए इसी सीट पर भेज दिया है। इस तरह से दिल्ली की दो प्रमुख पार्टियों के प्रदेश अध्यक्ष आमने-सामने आ गए हैं।


पंद्रह साल तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं 81 वर्षीय शीला दीक्षित चुनाव में उतरी हैं. राजनीति का अच्छा खासा अनुभव हैं और दिल्ली की राजनीति में तो अच्छी खासी पकड है. शीला दीक्षित दिल्ली कांग्रेस की अध्यक्ष भी है. वहीँ मनोज तिवारी बीजेपी के मौजूदा सांसद हैं और दिल्ली बीजेपी प्रदेश के अध्यक्ष भी हैं. पिछले कई सालों से राजनीति में हैं और मनोज तिवारी की अध्यक्षता में ही एमसीडी के चुनाव में बीजेपी को रिकॉर्ड जीत हासिल हुई थी. मनोज तिवारी जमीनी स्तर के नेता माने जाते हैं इससे वे लोगों को सीधे अपने आप को जोड़ लेते हैं.
शीला दीक्षित के लिए प्रियंका वाड्रा रोड शो कर चुकी हैं.. क्योंकि शीला दीक्षित की उम्र अधिक हो गयी है तो ज्यादा सभाएं और बैठक नही करती लेकिन उनके बेटे संदीप दीक्षित जमकर प्रचार कर रहे हैं. वहीँ अगर मनोज तिवारी की बात करें तो, मनोज तिवारी जमकर प्रचार कर रहे हैं. आपने काम के दम पर वोट मांग रहे हैं. मनोज तिवारी के समर्थन में राजनाथ सिंह सभा कर चुके हैं और इसके साथ ही भोजपुरी के कई कलाकार मनोज तिवारी के समर्थन में रोड शो कर चुके हैं. सपना चौधरी जिनके कांग्रेस में जाने की अफवाहे खूब उडी थी वही सपना चोधरी मनोज तिवारी के किये रोड शो कर चुकी है.


दोनों उम्मीदवारों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दिए हैं..क्योंकि ये लड़ाई सिर्फ सांसद बनने के नही है. संसद पहुँचने का नही है.. ये चुनाव है साख ली लड़ाई का… ये चुनाव है अस्तित्व के लड़ाई का…. प्रदेश अध्यक्ष पद की प्रतिष्ठा बचाने का भी है। इस चुनाव के एक साल के भीतर दिल्ली में विधानसभा चुनाव भी होने हैं। ऐसे में दोनों पार्टियां चाहेंगी कि जीते हुए प्रदेश अध्यक्ष के साथ ही विधानसभा चुनाव में उतरें। कहा तो यह भी जा रहा है कि हारने वाले उम्मीदवार की प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी भी जा सकती है. इसलिए दोनों तरफ से धुंआधार प्रचार चल रहा है. वैसे शीला दीक्षित के शासनकाल से तंग आकर ही प्रदेश की जनता ने आम आदमी पार्टी को चुना था वहीँ आम आदमी पार्टी कांग्रेस के साथ गंठबंधन के लिए हाथ पैर मार रही थी लेकिन अंत में गठबंधन हुआ ही नही.. लेकिन जनता में कहीं ना कहीं दिल्ली सरकार और कांग्रेस के प्रति नाराजगी है जिसका फायदा बीजेपी यानि मनोज तिवारी को हो सकता है. हालाँकि किसका कितना फायदा हुआ? कौन अपनी कुर्सी बचाने में सफल हुआ? जनता ने किसे चुना.. ये सब नतीजे आने के बाद ही पता चल पायेगा..