आइए जानें क्यों टीपू सुल्तान के इतिहास पर छिड़ गया है इतना बवाल?

जो लोग कुछ महीनों पहले राजस्थान में वीर सावरकर के सरकारी किताबों से निकालने के कदम को सराह रहे थे वो आज हाल ही में कर्नाटक में टीपू सुल्तान को इतिहास की किताबों से हटाने की बात पर तांडव कर रहे हैं. हाल ही में मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कहा है कि पाठ्यक्रम की किताबों से टीपू से जुड़ी सामग्री हटाने पर विचार किया जा रहा है. सावरकर को बच्चों की किताबों से बेदख़ल करने की कोशिश करने वाली कांग्रेस आज इस फैसले से बौखलाई हुई है. आईये समझते हैं कांग्रेस को टीपू सुल्तान से इतना प्यार क्यों है, आखिर कांग्रेस टीपू सुल्तान कि महिमा के गीत क्यों गा रही है और आखिर भाजपा टीपू सुल्तान पर इतना सख्त फैसला क्यों ले रही है?

वैसे लोग कहते हैं कि टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ जंग लड़ी थी. इसलिए वो एक हीरो हैं. लेकिन एक सच ये भी है की उसी टीपू सुल्तान ने हिंदुओं पर अत्याचार किया. तलवार के बल पर हजारों की संख्या में हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराया.

आईए, आपको बताते हैं टीपू सुल्तान से जुड़ी वे बातें जो शायद आपको नहीं मालूम हों. 19वीं सदी में ब्रिटिश गवर्मेंट में रहे विलियम लोगान ने अपनी किताब ‘मालाबार मैनुअल’ में लिखा है कि कैसे टीपू सुल्तान ने अपने 30,000 सैनिकों के दल के साथ कालीकट में तबाही मचाई थी. टीपू सुल्तान लोगों को सरेआम फांसी दिया करता था सिर्फ इस लिए क्योंकी वो उसके मज़हब को नहीं मानते थे.
इसी किताब में विलियम ने ये भी लिखा है कि उसने शहर के ज़्यादातर मंदिर और चर्चों को तोड़वा दिया था. यहीं नहीं, उसके समय में हिंदू औरतों की शादी जबरन मुस्लिमो से करवा दी जाती थी और वो इसका समर्थन किया करता था.

वो अपनी प्रजा को डराता –धमकाता कि वो मुस्लिम धर्म अपना लें और इससे इंकार करने वालों को उसने मार डालने का आदेश दे दिया था. कई जगहों पर एक ख़त का भी जिक्र मिलता है, जो टीपू सुल्तान को लिखा गया था, उस ख़त में ऐसा बोला गया था कि, ‘पैगंबर मोहम्मद और अल्लाह कि रहमत से कालीकट के सभी हिंदूओं को मुसलमान बना दिया है. महज़ कोचिन स्टेट के सीमवर्ती इलाकों के कुछ लोगों का धर्म परिवर्तन अभी बाकी है. मैं जल्द ही इसमें भी कामयाबी हासिल कर लूंगा.’

इसके अलावा ‘लाइफ ऑफ टीपू सुल्तान’ नाम की एक किताब में लिखा गया है कि उसने तब मालाबार क्षेत्र में एक लाख से ज्यादा हिंदुओं का धर्मांतरण करवाया था. कई इतिहासकार आज भी मानते हैं कि धर्म परिवर्तन ही टीपू सुल्तान का असल मकसद था. भले ही टीपू सुल्तान ने फ्रेंच शासकों के साथ मिलकर अंग्रेजों को भगाने का मंसूबा बनाया लेकिन ऐसा नहीं था कि वो भारत देश या इस देश के लोगों से प्यार करता था इस लिए वो अंग्रेजों से लड़ रहा था, वो तो बस ये चाहता था की उसकी गद्दी बची रहे, ये दो लुटेरों की लड़ाई थी न की स्वतंत्रता संघर्ष की, तभी तो फ्रेंच से उसने भारत के बंटवारे की बात की थी. उसने तब अफगान को जमान शाह को भारत पर हमला करने को उकसाया था, ताकि यहां पूरी तरह से इस्लामिक साशन रहे.

अब आप ही बताइए की वो कांग्रेस आज़ादी के लिए कालापानी की सजा काटने वाले सावरकर को देशद्रोही बता सकती है उनके मुह पर कालिख पोत सकती था, वही कांग्रेस इतने बड़े हत्यारे के लिए आंसू क्यों बहा रही है. यही कांग्रेस टीपू सुल्तान जयंती मानती है ये कुंठित मानसिकता नहीं तो और क्या है. यही कांग्रेस भाजपा पर सावरकर को पूजने का आरोप लगाती है और खुद टीपू सुल्तान जैसे हत्यारों को पुजती है, कांग्रेस एक secular party है इसलिए तो उन्हे सावरकर के हिन्दूवादी होने से दिक्कत है, तो उसे टीपू सुल्तान जैसे व्यक्ति से नफ़रत क्यों नहीं जिसने मज़हब के नाम पर इतने मासूमों को मार डाला.