टिक टोक स्टार होने की वजह से नही मिला सोनाली फोगाट को टिकट, सालों से हैं बीजेपी कार्यकर्ता

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टिक टोक स्टार हैं बीजेपी की उम्मीदवार सोनाली फोगाट. भारतीय जनता पार्टी ने आदमपुर विधानसभा क्षेत्र से उतारा है. सोनाली ने अपना नामंकन भी दाखिल कर दिया है. वैसे तो हरियाणा विधानसभा चुनाव में सभी 90 सीटों पर सैकड़ों उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं लेकिन जिस उम्मीदवार की चर्चा बीते कुछ दिनों से सबसे ज्यादा हो रही है वो हैं आदमपुर विधानसभा सीट से बीजेपी की उम्मीदवार सोनाली फोगाट… सोनाली फोगाट वैसे तो प्रदेश महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष हैं लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी चर्चा वायरल हो रहे उनके टिकटॉक वीडिओज़ की वजह से है. टिक टोक पर सोनाली फोगाट की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि देखते ही देखते सोनाली फोगाट के फॉलोवर की संख्या लाखों में पहुँच गयी है. सोनाली फोगाट हिसार जिले की ही रहने वाली हैं और बीते कुछ समय से नलवा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही थीं लेकिन पार्टी ने उन्हें नलवा की बजाय आदमपुर सीट से टिकट दे दिया. आदमपुर से चुनाव लड़ना तो आसान है लेकिन जीतना आसान नही है. आदमपुर सीट हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल का गढ़ रही है, भजनलाल के बाद उनके बेटे कुलदीप विश्नोई और बहू रेणुका विश्नोई भी यहां से न सिर्फ लगातार चुनाव लड़ रहे हैं बल्कि एकतरफा जीत भी दर्ज कर रहे हैं. हालाँकि अब एक गलैमरस उम्मीदवार देकर बीजेपी ने इस सीट की चर्चा जरूर तेज कर दी है.

सोनाली फोगाट पेशे एक अभिनेत्री हैं और उन्होंने कई सीरियल में काम भी किया है साथ ही साथ उन्होंने दूरदर्शन के लिए एंकरिंग भी किया हुआ है. चुनाव से पहले ही जब सोनाली फोगाट के वीडियो वायरल होने शुरू हुए तो वे टिक टोक स्टार बन गयी है. इस पर सोनाली कहती है कि मुझे किसी ने कहा कि मेरे वीडियो लोगों को व्हास्ट्सअप्प के जरिये मिल रहे हैं. कुछ लोगों ने मुझे सलाह दी कि मै अपना अकाउंट डिलीट कर दूँ.. लोगों को लगता था कि राजनीति में होकर ये सब काम नहीं करना चाहिए. लेकिन मैंने तब भी डिलीट नहीं किया था और टिकट मिलने के बाद आज भी डिलीट नहीं करूंगी.

हालाँकि कुछ लोगों का कहना है कि टिक टोक स्टार की वजह से सोनाली को टिकट मिला है लेकिन इस पर खुद सोनाली कहती है कि ये कहना कि मुझे टिक टोक की वजह से टिक मिला है गलत होगा.. क्योंकि मैं पिछले 12 साल से बीजेपी से जुड़ी हुई हूँ. सोनाली ने बताया कि  बीजेपी से जुड़ने के बाद उन्होंने 7 साल तक मध्यप्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में आदिवासी इलाकों में काम किया है इसलिए वहां लोग उन्हें आदिवासी मोर्चे वाली के नाम से पहचानते हैं. सोनाली फोगाट को राजनीति में आने की प्रेरणा पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन से मिली है. सोनाली कहती है कि उनकी मुलाकात जब सुमित्रा जी से हुई थी तब उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुवात कितने छोटे स्तर पर की थी. सुमित्रा जी कई बार सांसद रह चुकी हैं.

 हालाँकि सोनाली के लिए सबसे बड़ी चुनौती है कि कुलदीप विश्नोई को कैसे हराती हैं, क्योंकि बीजेपी यहाँ से जीत हासिल करने में कामयाब नही हो पायी है लेकिन सोनाली के हौसले बुलंद हैं उनका कहना है कि जिस तरह मोदी ने गांधी के वर्चस्व को तोडा मैं विश्नोई के वर्चस्व को तोडूंगी और जीत हासिल करूँगी.

 एक बात छूट रही थी वो भी बता दूँ कि सोनाली ने कहा है कि चुनाव तक वे टिक टोक का इस्तमाल नही करेंगी लेकिन जीत के बाद वे टिक टोक के जरिये अपने काम को लोगों तक पहुंचाएंगी.