अमित शाह के बेटे जय शाह ने किया था THE WIRE पर केस, हालत हो गयी खराब!

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गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह पर द वायर ने एक आर्टिकल लिखा था. इस आर्टिकल में जय शाह के कारोबार को लेकर कई गंभीर आरोप लगाये हुए थे. इस लेख में दावा किया गया था कि जब भाजपा सरकार 2014 में सत्ता में आई तो जय शाह के व्यापार में दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि हुई है. इस पर जय शाह ने 100 करोड़ का मानहानि का मामला इस वेबसाइट के खिलाफ दायर किया था. जय शाह का कहना था कि उस लेख में लगाए गए सभी आरोप ‘बेबुनियाद है, आपत्तिजक है और मानहानि हुई  हैं.’ इसी मामले को लेकर सुपीम कोर्ट में सुनवाई हुई और जस्टिस अरुण मिश्रा की पीठ के समक्ष ‘द वायर’ की तरफ़ से दलीलें पेश करते हुए गुजरात के ट्रायल कोर्ट में मामला चलाने की अपील की गयी. अदालत ने द वायर के वकील कपिल सिब्बल की दलीलें तो मान ली लेकिन कुछ ऐसी बातें भी कही, जिससे ‘द वायर’ द्वारा लगातार फैलाए जा रहे झूठ की पोल खुल जाती है. कोर्ट ने कहा कि आज कल जिस तरह की पत्रकारिता हो रही है उसपर सवाल खड़े हो रहे हैं.

Rohini singh

अदालत ने आपत्ति जताते हुए कहा कि बिना समय दिए ही लेख प्रकाशित कर दिए जाते हैं इस पर द वायर ने बयान देते हुए कहा कि जय शाह के ख़िलाफ़ प्रकाशित किए गए लेख में जो कुछ भी लिखा है, उसे ट्रायल के दौरान सही साबित किया जाएगा और इसीलिए वे अपनी याचिका वापस ले रहे हैं. भारत के बड़े प्रोपेगंडा पोर्टल द वायर ने दावा किया था कि उस लेख को लिखने से पहले काफ़ी रिसर्च किया गया लेकिन ऐसा साफ़ झलक रहा था कि लेखक के पास वित्तीय समझ नहीं है. वहीँ जय शाह की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल ने जल्दी ट्रायल पूरी होने पर जोर दिया और कहा, ‘उनके मुवक्किल को द वायर की तरफ से रात के 1 बजे सवाल भेजे गए और स्टोरी को अगले दिन शाम 6 बजे छाप दिया गया.’ अदालत ये जानना चाहती है कि इतने कम समय दिए जाने का क्या मकसद था और संस्थान को इससे क्या नुकसान हो रहा था.

इसके बाद अदालत ने भी सुनवाई के दौरान ये साफ किया कि वो सिर्फ महत्वपूर्ण पहलुओं की ही सुनवाई करेगा. अदालत ने यह भी कहा वो सिर्फ इस बात पर सुनवाई करेगा कि इस मामले में संस्था को कहां नुकसान हुआ है. अब द वायर को ट्रायल का सामना करना है और ये साबित करना है कि लेख में लिखे गये  सारे तथ्य सही हैं और साथ ही कोर्ट के सामने ये भी दिखाना है कि इससे उन्हें नुकसान क्या हुआ है? वहीँ जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा ‘जिस तरह से नोटिस केवल 10 या 12 घंटे पहले भेजा गया है यह एक ऐसा सवाल है, जिस पर अदालत को गंभीरता से विचार करने की जरूरत है. इस तरह के खुलासे की धमकी नहीं दी जा सकती.

  यहाँ आपको बता दें कि रोहिणी ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है जिसमें बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह द्वारा दाखिल मानहानि केस को रद्द करने की मांग खारिज कर दी गयी थी. वहीँ अहमदाबाद कोर्ट ने द वायर वेब साइट के खिलाफ आदेश दिया था कि वह डायरेक्ट या इनडायरेक्ट शाह के खिलाफ किसी विशेष रूप में लेख नहीं प्रकाशित कर सकते जिसके बाद ‘द वायर’ ने हाईकोर्ट की तरफ रुख किया था, लेकिन हाईकोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी. अब द वायर को लेख में लिखे गये सभी तथ्यों को सही साबित करने की चुनौती मिली है. दरअसल द वायर एक अलग ही तरह की पत्रकारिता के मशहूर हो रहा है, अक्सर ऐसी खबरें चलाई जाती है जिसमें प्रोपगेंडा ठूंस ठूस कर भरा गया होता है. ऐसे में कोर्ट द्वारा भी सवाल खड़ा किया जाना द वायर के लिए एक झटका जरूर साबित होता दिखाई दे रहा है.