कश्मीर के उस मंदिर की कहानी जिसे तो’ड़ने में सालों लगे

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भारत अपने ज्ञान और सांस्कृतिक विरासतों की वजह से विश्वगुरु रहा है. 500 ईसापूर्व से 5वीं सदीं तक भारत का स्‍वर्णिम युग कहा जाता था. आठवीं सदी के बाद से ही मुस्लिम आक्रमण’कारियों ने भारत पर अपनी नज़र गड़ा ली थी. पहले तो महमूद गज़नवी जैसे लुटरों ने न सिर्फ भारतीय मंदिरों को क्षति पहुंचाई बकली इन भव्य मंदिरों का सारा खज़ाना को भी लुटा. सालों तक ऐसे कई आक्रमण’कारी भारत पर हमले करते रहे.

सन 1191-1192 में पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी के बीच तारायन में 2 बार यु’द्ध हुआ था. पहली बार जब उसने यु’द्ध को अपने हाथ से निकलता हुआ पाया तो वो पीठ दिखा कर भाग गया. पृथ्वीराज के संस्कार उन्हें रणभूमि छोड़ पीठ दिखा कर भागते हुए शत्रु को मा’रने की अनुमति नहीं देते थे. जिस कारण वो गौरी की ह’त्या नहीं कर पाए और उसे जाने दिया. आखिरी ल’ड़ाई में पृथ्वीराज के साथ जयचंद ने विश्वासघात किया वह मोहम्मद गौरी से जा मिला. उस यु’द्ध में पृथ्वीराज चौहान को हार का सामना करना पड़ा. शयद वो दिन भारत के इतिहास का सबसे काला दिन था. उस दिन भारत की बाग डोर एक ऐसे इंसान के हाथों में पड़ गई जो आने वाले समय में लाखों हिन्दुओं के नर’संहार का सीधा कारण था.

गौरी तो चला गया लेकिन अपने पीछे कुछ ऐसे क्रू’र शासकों के हाथ छोड़ गया जिन्होंने ना सिर्फ हमारी विरासत को शती पहुंचाई बल्कि हमारी संस्कृति, धार्मिक पहचान को बर्बाद करने में कोई कसर नही छोड़ी. भारत की सत्ता हड़पने के बाद से उनका मुख पेशा बना तलवारों की नोक पर धर्मांतरण करवाना, जो ना माने उनके सिर कलम करवाना. हमारी सभ्यता को मिटाने के लिए उन्होंने हमारे पौराणीक मंदिरों को तोड़ कर उनपर मस्जिदों के ढ़ांचे बनवाए ताकी सनातन पद्यति को ही जड़ से ख़त्म कर सके. अयोध्या में राम मंदिर और मथुरा में कृष्ण जन्मभूमी तो सिर्फ कुछ नामचीन मुद्दे हैं जो सामने आ गये ऐसे कई मंदिर है जिनके अस्तित्व को ही मिटा दिया गया. इसी से जुड़ा एक किस्सा आज हम आपको बताने जा रहे हैं. जो कश्मीर का है. कश्मीर के इस हिन्दुओं के मंदिर को किस तरह बर्बाद किया गया.

दुनिया में सबसे सुंदर मंदिर में से एक मार्तंड सूर्य मंदिर जो जम्मू और कश्मीर के अनंतनाग के पास स्थित था. मार्तंड सूर्य मंदिर एक कश्मीरी हिंदू मंदिर था जो सूर्य को समर्पित था और इसे 8 वीं सदी के दौरान बनाया गया था. इस मंदिर को कर्कोटा राजवंश के तीसरे रूलर ललितादित्य मुक्तापीड़ा ने बनाया था. लेकिन कुछ लोगों ने मंदिर को बनाने का श्रेय राणादित्य को दिया है. कहा जाता है कि मंदिर को मुस्लिम शासक सुल्तान सिकंदर के आदेश पर 15 वीं शताब्दी में तोड़ दिया गया था. मार्तंड मंदिर एक पठारीय भूमी के ऊपर बनाया गया था जहाँ से पूरे कश्मीर घाटी को देखा जा सकता है.

इस मंदिर में मूवी “हैदर” का एक गाना भी शूट हुआ था जिससे इस मंदिर को बहुत कवरेज भी मिला. इससे मंदिर को देखने के लिए लोगों की रुचि बडी है. इस मदिंर का यार्ड 220 से 142 फुट में फैला हुआ है. इस मदिंर की लंबाई 60 फुट और चौडाई 38 फुट है. ये मदिंर अपनी वास्तुकला के लिए पूरे देश में जाना जाता है. इसके स्तंभों में ग्रीक सरंचना का इस्तेमाल भी किया गया.

लेकिन इस मंदिर की खूबसूरती सुल्तानों की आंखों में चुभती थी जो सिर्फ इस्लाम के लिए ही वहां थे और सुल्तान सिकंदर ने तो अपना नाम ही सिंकदर बुतशिकन रख लिया था.आपको बता दे कि बुतशिकन का मतलब होता है जो मूर्तियों को तोड़ने का काम करता है. उन लोगों ने इस खूबसूरत मदिंर को तो’ड़ना का फैसला किया. इस काम को हर बादशाह ने जोर-शोर से किया. इस भव्य मार्तण्ड सूर्य मंदिर को तो’ड़ने में एक वर्ष का समय लगने के बाद भी सुल्तान इसको तो’डने में सफल नहीं हो सका, तब उसने इस मंदिर में लकड़ियों को भरवाकर आग लगवा दी थी.

ये मदिंर बर्फ से ढके पहाडों में स्थित है. यहां सूर्य की पहली किरण के साथ ही इस मदिंर की पूजा अर्चना का दौर शुरू हो जाता है. मदिंर की उत्तरी दिशा से खुबसुरत पहाडो नजारा भी देखा जा सकता है. यह मदिंर पूरे विश्व में सबसे सुंदर मदिंर होने की श्रेणी में भी अपना नाम बनाये हुए है. इस मंदिर को देखने दूर-दूर से पर्यटक भी आते है. इस मदिंर को बनाने के लिए वर्गाकार के चूना-पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था.

15 वीं शताब्दी में तोड़े जाने के बाद खंडर बन चुका ये मदिंर अब भी पर्यटकों को आकर्षित करता है. ये मंदिर इस बात का जीता जागता सबूत है कि कैसे मुग़लों ने हिंदूओं की विरासत को नष्ट करने का कोई प्रयास नहीं छोड़ा और इस खूबसूरत मंदिर को खंडर बना दिया. आलम ये है की हम अपने ही देश में अपने ही मंदिरों के अवशेष देखने परेटक बन कर बड़े उल्लास के साथ जाया करते हैं. हमे ये भी ज्ञात नहीं होता की आखिर इस नफ़रत के पीछे क्या वजह थी. यहाँ रहने वाले पुजारियों और श्रधालुओं ने ऐसे शासकों का क्या बिगाड़ा था.