मुगलों की तारीफ़ में ये क्या कह गईं स्वरा भास्कर?

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अक्सर फ़िल्मी सितारे अपनी फिल्मों की वजह से चर्चा में रहते हैं लेकिन स्वरा भास्कर उन अभिनेत्रियों में से हैं जो फिल्मों की वजह से नहीं बल्कि अपने इतिहास, राजनीतिक, सामाजिक और अर्थशास्त्र के ज्ञान की वजह से चर्चा में रहती हैं. अपने इस ज्ञान का वो जब तब सोशल मीडिया पर प्रदर्शन भी करती रहती हैं जिसकी वजह से उन्हें ट्रोल होना पड़ता है. इस बार उन्होंने अपने इतिहास के ज्ञान का प्रदर्शन किया और एक आर्टिकल शेयर किया. इस आर्टिकल का टाइटल है- “मुगलों ने भारत को लूटा नहीं बल्कि अमीर बनाया.” इस आर्टिकल को लिखा है राना सफवी ने. ये आर्टिकल 2017 में लिखा गया था. 2017 में लिखे इस आर्टिकल की चर्चा अब इसलिए हो रही है क्योंकि स्वर भास्कर ने अपने ट्विटर अकाउंट से इसे शेयर किया है.

इस आर्टिकल में लिखा गया है कि बाबर ने पानीपत की लड़ाई में इब्राहिम लोदी को हरा कर मुग़ल सल्तनत की नींव रखी थी, उसके बाद ज्यादातर मुग़ल बादशाहों ने राजपूत लड़कियों से शादी कर गंगा-जमुनी तहजीब की नींव रखी, राजपूतों को अपने दरबार और सेनाओं में उच्च पदों पर रखा. लेखिका के मुताबिक़ मुगलों ने ये सब इसलिए किया ताकि हिन्दू और मुसलमानों के बीच गंगा-जमुनी तहजीब कायम की जा सके. चूंकि स्वरा ने इस आर्टिकल को शेयर किया है तो जाहिर सी बात है वो भी इन बातों से सहमत हैं.

आर्टिकल की लेखिका राना सफवी बहुत ही चालाकी से इन बातों को छुपा जाती है कि मुगलों ने राजपूत राजाओं के पास सन्देश भिजवाये कि हमारी अधीनता स्वीकार कर लो वरना हम हमला कर देंगे, मुगलों को डर था कि अधीनता स्वीकार करने के बाद भी कहीं राजपूत बगावत ना कर दें इसलिए उनकी बेटियों से विवाह किया ताकि राजपूतों की तरफ से प्रतिकार की सभी संभावना ख़त्म की जा सके. कौन सा घराना अपने दामाद के खिलाफ ही बगावत करेगा. जिस गंगा-जमुनी तहजीब को राणा सफ़वी मुगलों के इतिहास में चस्पा करना चाहती हैं वो क्या सच में मुगलों के समय था? मुगल जिन्होंने मंदिरों को तोड़ा, हिन्दुओं के धर्म परिवर्तन करवाए उन्हें गंगा जमुनी तहजीब का हिमायती बताना कहाँ तक सही है? मंदिरों को तोड़ कर मस्जिद बनाने वाले, हिन्दुओं पर जजिया कर लगाने वाले मुग़ल बादशाहों को गंगा-जमुनी तहजीब का हिमायती बताना ये साबित करता है कि स्वरा भास्कर और राना सफवी का का इतिहास हकीकत से कम और संजय लीला भंसाली और आशुतोष गोवारिकर जैसे फिल्मकारों की कल्पना से ज्यादा प्रेरित है.

राना आगे लिखती है कि मुग़ल बादशाहों ने रोड बनवाएं, इमारतें बनवाई, किले बनवाएं और ब्यापार को बढ़ावा दिया जिसके कारण भारत समृद्ध हुआ. नहीं राना जी मुगलों ने भारत को समृद्ध नहीं बनाया. भारत तो पहले से ही समृद्ध था. भारत के मंदिर तो पहले से ही इतने समृद्ध थे कि एक मंदिर पर 17 बार हमला कर के लूटा गया.

मथुरा – श्रीकृष्ण जन्म भूमि

राना ये नहीं बताती कि मुगलों ने रोड और किले क्यों बनवाएं? 10-10 शादियाँ करने वाले मुग़ल अगर किले और महल बनवाकर अपनी बेगमों को नहीं रखते तो क्या सड़कों पर और झोपड़ियों में सुलाते? अगर व्यापार को बढ़ावा नहीं देते तो इतनी बड़ी सेना और परिवार की अय्याशियों के लिए खर्चा कहाँ से पूरा होता . जब भी कोई बाहरी किसी देश या राज्य पर कब्ज़ा करता है तो अपने साथ सिर्फ सेना ले कर नहीं आता बल्कि अपनी सभ्यता ले कर आता है. अगर वो व्यापार को बढ़ावा नहीं देगा, तो जनता में गरीबी बढ़ेगी, गरीबी बढ़ेगी तो अराजकता फैलेगी और इससे साम्राज्य को खतरा होगा. भारत की जनता तो मुगलों से पहले भी व्यापार करती रही होगी या फिर ऐसा था कि खुद का उगाया फसल खुद ही खा कर निपटा दिया ?

राना सफवी दरअसल मुग़ल काल के भारत को ही भारत का इतिहास मानती है. उन्हें पता नहीं है कि इतिहासकारों के अनुसार गुप्त काल में भारत सबसे समृद्ध राष्ट्र था. जिस व्यापार और पद्धति की बात राना सफवी कर रही हैं वो तो मौर्य काल में भी था. हर युग में भारत समृद्ध था और इसी समृद्धि ने विदेशी आक्रान्ताओं को भारत की तरफ आकर्षित किया. अगर मुग़ल इतने ही काबिल और समृद्ध थे और भारत इतना ही कंगाल था तो क्या लेने के लिए हुमायु ने पानीपत की लड़ाई लड़ी? किसी कंगाल राष्ट्र को मुग़ल क्यों हासिल करना चाहते थे?इसका जवाब ना तो स्वरा के पास होगा और ना राना सफवी के पास. क्योंकि ये इस तथ्य को स्वीकार नहीं कर पा रहे कि भारत आने वाले मुस्लिमों ने हमेशा रक्तपात किया है और देश को लूटा है .