“सुषमा स्वराज आंध्र प्रदेश की राज्यपाल बनेंगी” यह सरासर झूठ है

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पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के आंध्र प्रदेश का राज्यपाल बनाए जाने की खबरें सुर्खियां बटोर रही थीं. लेकिन अब इन खबरों को खुद सुषमा स्वराज ने ही खारिज कर दिया है. उन्होंने अपने ऑफिशियल  अकाउंट से ट्वीट कर सफाई दी है.

 कुछ ऐसा था कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन के एक ट्वीट से पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को लेकर सस्पेंस पैदा हो गया था  उस ट्वीट में उन्होंने सुषमा स्वराज को आंध्र प्रदेश का राज्यपाल बनने की बधाई दी . हालांकि बाद में उन्होंने वह ट्वीट डिलीट कर दिया, जिससे अटकलों का बाजार और गर्म हो गया. उन्होंने ट्वीट में लिखा था कि “भाजपा की वरिष्ठ नेता और मेरी दीदी पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को आंध्र प्रदेश का राज्यपाल बनने पर मोदी बधाई व शुभकामनाएं. सभी क्षेत्रों में आपके लंबे अनुभव से प्रदेश की जनता लाभान्वित होगी.”

लेकिन जब तक हर्षवर्धन ने ट्वीट डिलीट किया, तब तक यह वायरल हो चुका था.एक  न्यूज एजेंसी एएनआई ने उनके ट्वीट का स्क्रीनशॉट पोस्ट भी किया था .

पर सस्पेंस इसलिए भी कहा जा रहा था क्योंकि अभी तक इस संबंध में आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की गई है. हालांकि ऐसा देखा जा रहा है कि कई राज्यों में राज्यपालों के पद खाली पड़े हैं. ऐसे में यह मुमकिन है कि सुषमा को यह पदभार दे दिया जाए.

वैसे भी इस बार सुषमा स्वराज ने  लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा था. उन्होंने लोकसभा चुनाव ना लड़ने का कारण उनके स्वास्थ्य की बताया था।

बीजेपी की वरिष्ठ नेताओं में से एक सुषमा स्वराज का नाम सबसे कर्मठ नेताओं में आता है।

वह  मंत्रिमंडल के उन मंत्रियों में शामिल हैं जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल के दौरान मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली.

वैसे भी  सुषमा स्वराज के मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होने का कारण स्पष्ट रूप से  सामने नहीं आया था । और पार्टी के किसी भी सदस्य द्वारा इसे ज़ाहिर नहीं किया गया था।   लेकिन कयास यह लगाया जा रहा था कि उनके  खराब स्वास्थ्य के कारण उनको मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया।

सुषमा स्वराज सरकार के पूर्ववर्ती मंत्रिमंडल में विदेश मंत्री थीं और इस बार उन्होंने लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ा था. उन्होंने कहा था कि उनका स्वास्थ्य लोकसभा चुनाव लड़ने और प्रचार करने की इजाजत नहीं देता है.

लेकिन अगर देखा जाए तो बतौर विदेश मंत्री वह प्रवासी भारतीयों के बीच अपने कामकाज की वजह से काफी लोकप्रिय रही थीं. इसके अलावा सिर्फ  एक ट्वीट पर कई लोगों की मदद के लिए भी उन्हें याद किया जाएगा. 2004 से 2014 तक यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान सुषमा स्वराज लोकसभा में विपक्ष की नेता थीं और उनका कार्यकाल सफल रहा था. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का यह ट्वीट missunderstaing या मिसकॉमुनिकेशन का शिकार हो गया। लेकिन अगर सुषमा स्वराज कोई भी पद संभालेंगी तो यह निश्चित है कि वह उसके मर्यादा और सम्मान की रक्षा करेगी। क्योंकि हम सबने उनकी कर्मठता और जिम्मेदारी  को बतौर विदेश देखा है।