तो कुछ ऐसी थी स्मिता पाटिल की छोटी सी ज़िन्दगी

7833

नीदा फाजली की एक शेर है-

उसके खो जाने का एहसास तो कम बाकी है
जो हुआ, वो न हुआ होता, ये गम बाकी है 

इन पन्तियों में जिस भावनाओं का ज़िक्र है , स्मिता पाटिल का नाम आते ही वैसी ही भावनाए आ जाती है.. पैरेलल सिनेमा को बढ़ावा देने और कोमेर्सिअल फिल्मों से कम मतलब रखने वाली स्मिता पाटिल की छोटी  ज़िन्दगी काफी सीख देने वाली है… और साथ में सिनेमाओं के प्रति लोगों का एक अलग नजरिया बनाने में कायम रही… आज हम बात करेंगे स्मिता पाटिल के जीवन से जुड़े कुछ बातों को….

स्मिता पाटिल ने अपने करियर की शुरुआत महज 16 साल की उम्र में की थी … वैसे उन्होंने अपने करियर की शुरुआत फिल्मों से नहीं बल्कि दूरदर्शन में बतौर न्यूज़ रीडर की थी… इसी दौरान उनकी मुलाकात जाने माने निर्माता निर्देशक श्याम बेनेगल से हुई और बेनेगल ने स्मिता की प्रतिभा को पहचान कर अपनी फ़िल्म ‘चरण दास चोर’ में एक छोटी सी भूमिका निभाने का अवसर दिया…..अस्सी के दशक में स्मिता ने व्यावसायिक सिनेमा की ओर अपना रूख कर लिया। इस दौरान उन्हें तब के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के साथ ‘नमक हलाल’ और ‘शक्ति’ में काम करने का मौका मिला………यह फ़िल्में कामयाब रहीं…….

1985 में स्मिता पाटिल की फ़िल्म ‘मिर्च मसाला’ प्रदर्शित हुई….इसी साल भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान को देखते हुये उन्हें पदमश्री से सम्मानित किया गया….. एक दशक से छोटे फ़िल्मी सफ़र में स्मिता पाटिल ने अस्सी से ज्यादा हिंदी और मराठी फ़िल्मों में अभिनय के कई रिकॉर्ड रचे..

स्मिता पाटिल की पर्सनल लाइफ की बात करें तो काफी उतार चढ़ाव से भरी है उनकी ज़िन्दगी….. उनकी बढ़ती शोहरत के साथ-साथ विवादों के वजह से भी वो चर्चा में रहीं… स्मिता पाटिल पर घर तोड़ने का भी आरोप लगाया जाता रहा है……. गौरतलब है कि जब राज बब्बर के साथ उनकी नजदीकियां कुछ ज्यादा ही बढ़ गई थीं तब मीडिया ने उनकी आलोचना करनी शुरू कर दी थी…. क्योंकि राज की शादी नादिरा से हो चुकी थी और वो स्मिता के साथ एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर चला रहे थे…… ऐसे में लोगों को नादिरा से सहानुभूति थी और स्मिता को काफी भला-बुरा कहा जा रहा था…….. राज बब्बर के दो बेटे हैं…… उनकी पहली पत्नी नादिरा से आर्य बब्बर और स्मिता से प्रतीक बब्बर….

स्मिता की जीवनी लिखने वाली लेखिका मैथिलि राव अपनी किताब में कहती हैं, “स्मिता पाटिल की मां स्मिता और राज बब्बर के रिश्ते के ख़िलाफ़ थीं.. वो कहती थीं कि महिलाओं के अधिकार के लिए लड़ने वाली स्मिता किसी और का घर कैसे तोड़ सकती है? लेकिन, राज बब्बर से अपने रिश्ते को लेकर स्मिता ने मां की भी नहीं सुनी….” आपको बता दें, प्रतीक के जन्म के कुछ घंटों बाद ही 13 दिसंबर 1986 को स्मिता का निधन हो गया….

वैसे स्मिता पाटिल के बारे में यह तो खबर थी की उन्होनिं कभी शादी नहीं की लेकिन उनकी यह इक्स्षा थी की उनके मरने के बाद उन्हें दुल्हन की तरह सजा के विदा किया जाए … और ऐसा हुआ भी….