शीला दीक्षित के आखिरी ख़त से दिल्ली में क्यों मचा घमासान!

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15 सालों तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहने वाली शीला दीक्षित अब हमारे बीच में नही है.. शिला दीक्षित के निधन के कुछ ही घंटों में दिल्ली कांग्रेस की सियासत गरमा गयी है. चर्चा तेज हो गयी है.. चर्चा शीला दीक्षित के अंतिम ख़त को लेकर है जो शिला दीक्षित ने सोनिया गाँधी को लिखा था.. लेकिन सवाल तो यही है कि आखिर इस खत में ऐसा क्या था जिसके बाद दिल्ली में कांग्रेस नेताओं में हलचल तेज हो गयी है.

दरअसल शीला दीक्षित गुट के लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी मौत से तीन दिन पहले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (United Progressive Alliance) अध्यक्ष सोनिया गांधी के नाम एक पत्र लिखा था। सूत्रों का कहना है कि शीला ने अपने पत्र में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के वर्तमान हालात और गुटबाजी के बारे में खुलकर लिखा था। हालांकि, इस पत्र के बारे में आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं हो रही है। जानकारी के मुताबिक़ शीला दीक्षित ने इस खत में पीसी चाको के साथ चल रहे टकराव का भी जिक्र किया था. शीला ने पार्टी के एक बड़े नेता को इन सबका जिम्मेदार बताया था।


शीला दीक्षित ने अपने आखिरी खत में लिखा है, “मैं दिल्ली कांग्रेस को मजबूत करने के लिए फैसले ले रही हूं, लेकिन पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन के इशारे पर चलकर प्रभारी पीसी चाको बेवजह कदम उठा रहे हैं। पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन प्रभारी चाको को गुमराह कर रहे हैं और पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जानबूझकर मेरे फैसलों में अड़ंगा लगाया जा रहा है, जबकि, मैने ही ‘आप’ से अलग चुनाव लड़ने का फैसला लिया था।“ , “माकन के कहने पर चाको तो उसके (आप) पक्षधर थे। आखिर में नतीजे बताते हैं कि 3 नम्बर की कांग्रेस बिना गठजोड़ के 2 नम्बर पर आ गयी। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने प्रभारी चाको को गलत समझाया और बेवजह मेरे फैसलों पर सवाल खड़े करवाए”” ।

जो जानकारियाँ सामने आ रही हैं उसके मुताबिक़ आठ तारिख को शीला दीक्षित ने सोनिया गाँधी को खत लिखकर स्थिति से अवगत कराया था इसके बाद सोनिया गाँधी के करीबियों ने शीला दीक्षित, अजय माकन और पीसी चाको से मुलाक़ात की थी और समस्या का हल निकालने का आश्वासन भी दिया गया था. पर अब शीला दीक्षित हमारे बीच नही रही. वे सबसे ज्यादा तीन बार 1998 से 2013 तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रही. निधन के बाद शीला दीक्षित के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी मात्रा में लोग इकट्ठे हुए लेकिन पीसी चाकों दो दिन बाद शीला दीक्षित के परिजनों से मिलकर सांत्वना दी. मिली जानकारी के मुताबिक़ पीसी चाको कहीं बाहर थे जिसके चलते वे अंतिम यात्रा में शामिल नही हो सके थे..

लेकिन शीला दीक्षित के निधन के बाद अब जो खबरें सामने आ रही हैं वो इस बात की तरफ इशारा कर रही हैं कि दिल्ली कांग्रेस में सबकुछ ठीक नही चल रहा था.. तीसरे नंबर पर खिसक चुकी दिल्ली में कांग्रेस लोकसभा चुनाव में दुसरे नम्बर पर पहुँचने में कामयाब रही लेकिन अंदरूनी कलह अब कांग्रेस को परेशान कर रही हैं.

दरअसल दिल्ली में शीला दीक्षित और पीसी चाको के बीच कई सारे मुद्दों पर मतभेद थे लेकिन ये टकराव दिल्ली लोकसभा चुनाव के समय खुले तौर पर दिखी. पीसी चाको के साथ कई पुराने नेता आम आदमी पार्टी से गठबंधन के पक्ष में थे लेकिन शीला दीक्षित खेमा इसके खिलाफ था और इसी का नतीजा था कि कांग्रेस दिल्ली में अच्छा प्रदर्शन करने में सफल रही. खैर चिट्ठी की खबर सार्जनिक होने के बाद ये बात समझना बिलकुल मुश्किल नही है कि दिल्ली में विकास की बयार बहाने वाले शीला दीक्षित और पीसी चाको के रिश्ते अंतिम वक्त में भी ठीक या सामान्य नही थे.