NRC पर मचे बवाल के बीच शेख हसीना भारत दौरे पर

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अमित शाह ने कहा है “भारत सरकार एक भी घुसपैठिये को भारत में नहीं रहने देगी.” भारत सबसे ज्यादा बांग्लादेशी घुसपैठियों से परेशान है जो बंगाल और असम में आ कर बस गए. घुसपैठियों कि पहचान कर उन्हें निकलने के लिए असम में NRC लाया गया है. अब बंगाल में भी NRC की चर्चा है. इन बयानों और प्रक्रियाओं के बीच बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना अपने चार दिवसीय यात्रा पर नई दिल्ली पहुंची.

बांग्लादेश, भारत के पूरब में बसा एक छोटा सा देश जो कभी पाकिस्तान का हिस्सा हुआ करता था और पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जाना जाता था. 1971 में बांग्लादेश जब स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आया तो भारत ने उसे मित्र राष्ट्र की सूची में रखा और अब भी है लेकिन फिर भी दोनों देशों के बीच कई ऐसे मुद्दे हैं जिनपर पेंच फंसा हुआ है. अवैध घुसपैठ, चीन का बांग्लादेश में बंदरगाह का निर्माण, सीमा पर कंटीली तारों की फेसिंग, तीस्ता जल बंटवारा और रोहिंग्या शरणार्थी दोनों देशों के बीच विवादास्पद मुद्दे हैं. यूँ तो दोनों देश कभी खुल कर एक दुसरे के खिलाफ कोई बयान नहीं देते और ना ही कभी रिश्ते ख़राब होने कि बात करते हैं लेकिन इन मुद्दों पर दोनों देशों के बीच अक्सर खींचतान रहती है. लेकिन ऐसा भी नहीं है कि दोनों देशों के रिश्तों में तनाव ही है.

भारत और बांग्लादेश के आपसी रिश्तों की

शेख हसीना 2009 से सत्ता में है और इस दौरान भारत और बांग्लादेश के रिश्ते ज्यादा बेहतर हुए हैं. भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में उग्रवाद की समस्या से निपटने में बांग्लादेश ने जिस तरह से भारत का साथ और समर्थन दिया वो शानदार था. इसके अलावा उसने अपनी जमीन पर पनपने वाले आतंकी गुटों पर लगाम लगाए जो भारत की पूर्वी सीमा पर खतरनाक साबित हो सकते थे. दोनों देशों के बीच पुराना सीमा विवाद सुलझा और कई एकड़ जमीन की अदला बदली हुई. बांग्लादेश के मोंगला और चटगाँव बंदरगाह का इस्तेमाल भारत पूर्व के देशों में व्यापार के लिए करता है.

दोनों देशों के बीच सड़क मार्ग और रेल मार्ग की शुरुआत हुई है. कोलकाता-ढाका और कोलकाता-खुलना के बीच ट्रेन सेवाएं शुरू हुईं और अब अगरतला – अखौरा के बीच तीसरी ट्रेन लाइन के निर्माण का काम चल रहा है. वर्ष 2018 से पहले तक बांग्लादेश भारत से 660 मेगावाट बिजली का आयात करता था. लेकिन उस साल इसमें और पांच सौ मेगावाट वृद्धि हुई. वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान भारत और बांग्लादेश के बीच आपसी व्यापार नौ अरब डॉलर से ज्यादा पहुंच गया.

भारत और बांग्लादेश के बीच प्रमुख मुद्दों पर

NRC और रोहिंग्या समस्या :
NRC बिल को लेकर बांग्लादेश चिंतित है. पहले से ही रोहिंग्या शरणार्थियों का दवाब झेल रहे बांग्लादेश को लगता है कि अगर भारत ने अवैध घुसपैठियों को वापस भेजा तो उसका संतुलन बिगड़ जाएगा और बांग्लादेश का माहौल अराजक हो जाएगा. पहले से ही रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर बांग्लादेश के लोगों में भारत के प्रति नाराजगी है. बांग्लादेश को लगता है कि रोहिंग्या शरणार्थियों के मुद्दे पर भारत को बांग्लादेश और म्यांमार के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा कर मामले को सुलझाने में मदद करनी चाहिए थी क्योंकि भारत की बांग्लादेश और म्यांमार दोनों से दोस्ती है लेकिन बजाये इसके भारत मौन साधे रहा. चीन ने इस मामले में मध्यस्थता की जिसके बाद म्यांमार ने पहचान कर सभी शरणार्थियों को अपनी नागरिकता पहचान पत्र देने की सहमती जताई.

तीस्ता जल बंटवारा :
तीस्ता जल बंटवारे का मुद्दा भी दोनों देशों के बीच काफी समय से लंबित है. सिक्किम की पहाड़ियों से निकल कर भारत में लगभग तीन सौ किलोमीटर का सफर करने के बाद तीस्ता नदी बांग्लादेश पहुंचती है. वहां इसकी लंबाई 121 किलोमीटर है. बांग्लादेश का करीब 14 फीसदी इलाका सिंचाई के लिए इसी नदी के पानी पर निर्भर है. दोनों देशों के बीच पानी को लेकर आखिरी समझौता 1996 में हुआ था.

चीन का बांग्लादेश में लगातार निवेश :
पडोसी देशों में चीन की दिलचस्पी भारत के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. चीन ने बांग्लादेश में बड़ा निवेश किया है. यहाँ तक कि जब वर्ल्ड बैंक ने पद्मा नदी पर बनने वाले पुल के लिए कर्ज देने से मना कर दिया तो चीन आगे आया और उसने बांग्लादेश को करीब 350 करोड़ डॉलर का कर्ज दिया. चीन कि इस मदद के बाद बांग्लादेश के कई परियोजनाओं में चीन ने निवेश किया. चीन के साथ बांग्लादेश की बढती करीबी ने भारत को चिंतित कर रखा है. इसके अलावा चीन ने बांग्लादेश में एक बंदरगाह विकसित करने में भी दिलचस्पी दिखाई थी लेकिन बांग्लादेश ने मना कर दिया क्योंकि वो भारत को नाराज नहीं करना चाहता था.

लेकिन ऐसा भी नहीं है कि चीन के साथ करीबी बढाने के लिए बांग्लादेश ने भारत की अनदेखी की हो. शेख हसीना ने बेहतरीन ढंग से चीन और भारत के बीच संतुलन बनाए रखा है. शेख हसीना की इस यात्रा के दौरान उनकी पीएम मोदी के साथ कई मसलों पर द्विपक्षीय बातचीत होनी है और कई समझौतों पर दस्तखत होने हैं.