ऑटो सेक्टर में सुस्ती के लिए वित्त मंत्री ने क्यों दिया ओला-उबर का उदाहरण ?

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मोदी सरकार के दुसरे कार्यकाल के 100 दिन पुरे होने के अवसर पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण चेन्नई में पत्रकारों से बात कर रही थीं. बात चली ऑटो सेक्टर में आई सुस्ती की तो वित्त मंत्री ने कहा “कुछ रिपोर्ट्स में छपा है कि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर बीएस6 और लोगों की सोच में आए बदलाव का असर पड़ रहा है, लोग अब गाड़ी खरीदने की बजाय ओला या ऊबर को तरजीह दे रहे हैं.” वित्त मंत्री के इस बयान के बाद विपक्ष उनपर हमलावर हो गया. सोशल मीडिया पर ओला, उबर के साथ साथ निर्मला सीतारमण भी ट्रेंड होने लगीं. वित्त मंत्री ने इतनी बड़ी बात बिना सोचे समझे तो कहा नहीं होगा. तो आज हम ऑटो सेक्टर ने आई सुस्ती के कारणों पर वित्त मंत्री के बयान पर चर्चा करेंगे.

भारतीय अर्थव्यवस्था की मैन्युफैक्चरिंग जीडीपी में ऑटो इंडस्ट्री का योगदान करीब 49 फीसदी है और इसमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से 3.5 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ है. लेकिन ऐप बेस्ट कैब सर्विस ने ऑटो सेक्टर को कड़ी टक्कर दी है. 8 सितम्बर 2019 को फ़ोर्ब्स में एक रिपोर्ट छपी थी, जिसमे कहा गया कि भारतीय युवा Shared Mobility Services की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं. इस रिपोर्ट में हवाला दिया गया था Dellolite के ग्लोबल ऑटोमेटिव कंज्यूमर सर्विस स्टडी का. अब आपके मन में सवाल आएगा कि Dellolite क्या है तो आपको बता दें कि Dellolite दुनिया की अग्रणी कंपनी है को सर्वे के जरिये कस्टमर का मूड भांपती है और ऑटो इंडस्ट्री ट्रेंड का आंकलन करती है. फिर उसके आधार पर इंडस्ट्री के फायदे और नुकसान का आंकलन करती है.

Dellolite की रिपोर्ट में सामने आया कि भारत, जहाँ कि आधी से ज्यादा आबादी 25 साल तक के युवाओं की है, वहां Shared Mobility Services तेजी से बढ़ रहा है. Shared Mobility Services यानी ट्रांसपोर्टेशन माध्यम को शेयर करना, चाहे वो कार हो या बाइक हो या फिर कोई अन्य वाहन. ये एप बेस्ड कैब सर्विस सिस्टम ही है. फ़ोर्ब्स के आर्टिकल में ऑटो सेक्टर में आई सुस्ती के लिए Shared Mobility Services को एक बड़ा कारण माना गया है. फाइनेंशियल एक्सप्रेस में अमेरिकन फाइनेंशियल सर्विस कंपनी मॉर्गन स्टेनली के हवाले से एक रिपोर्ट छपी जिसमे कहा गया कि भारत 2030 तक दुनिया का सबसे बड़ा Shared Mobility Services वाला बाज़ार बन जाएगा.

वित्त मंत्री ने ऑटो सेक्टर में सुस्ती के जो कारण बताये उसे हम सीधे सीधे ख़ारिज भी नहीं कर सकते. आंकड़े भी इसकी गवाही दे रहे हैं. 2018 के आखिरी छमाही में डेली राइड्स 35 लाख के करीब थी, जो 2019 के पहली छमाही में बढ़कर लगभग साढ़े 36 लाख हो गई यानी कि करीब 4 फ़ीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई.

कारपूलिंग और सेल्व ड्राइविंग रेंटल सर्विस शहरों में एक बड़ा स्टार्टअप बन कर उभरा है. इंट्रासिटी कारपूलिंग स्टार्टअप sRides के को-फाउंडर नितिन चड्डा कहते हैं “इस देश में Shared Mobility Services तेजी से उभरता बाज़ार है. कई मल्टीनेशनल कम्पनी हमारे ग्राहक है. कैपजेमिनी, इनफ़ोसिस, टेक महिंद्रा और विप्रो को sRides कारपूलिंग सर्विस प्रोवाइड कराता है.” चड्डा कहते हैं कि पार्किंग स्पेस की कमी और पीक आवर में बढ़ते ट्रैफिक के बीच कारपूलिंग मल्टीनेशनल कंपनी के एम्प्लाइज को काफी रास आ रहा है. नितिन कहते हैं कि 12 महीनों में उनके रेवेन्यु में 10 गुना बढ़ोतरी हुई है. उदाहरण के लिए अगर आप दिल्ली NCR में रहते हैं तो सुबह साढ़े 8 से 10 बजे और शाम 6 से रात 8 बजे के बीच दिल्ली से नोयडा और गुडगाँव के लिए ट्रैफिक का हाल मालूम होगा. गुडगाँव् से धौला कुआं तक आने में पसीने छूट जाते हैं.

मेट्रोसिटिज में एक और नया स्टार्टअप है, कार रेंट पर देने का. इस मार्केट में बड़ा खिलाड़ी है ZoomCar. ZoomCar मंथली कार सब्सक्रिप्शन सर्विस उपलब्ध कराती है. अगर आप कार खरीदने की स्थिति में नहीं है और कारपूल करने से भी हिचक रहे हैं तो ZoomCar सेल्फ ड्राइव के लिए मासिक शुल्क पर कार उपलब्ध कराती है. इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़ हुंडई ने ओला और सेल्फ ड्राइविंग सब्सक्रिप्शन सर्विस उपलब्ध कराने वाली कंपनी Revv में 300 मिलियन डॉलर इन्वेस्ट किया है.

अब आते हैं कि वैश्विक स्तर पर क्या स्थिति है? एशिया पेसिफिक रीजन में इस साल कारों की बिक्री में 2 से 3.5 फीसदी की गिरावट आई है. रायटर्स के मुताबिक़ अप्रैल 2019 में चीन में ऑटो सेक्टर में 14.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई अप्रैल 2018 के मुकाबले. ये गिरावट लगातार 10 महीनों से जारी है. चाइना एसोशियेशन ऑफ़ ऑटोमोबाईल मैनूफैक्चरर (CAAM) के मुताबिक़ गाड़ियों की बिक्री गिर कर 1.98 मिलियन तक आ गई. चाइना की बात हम इसलिए कर रहे क्योंकि एशिया में वो भारत का मुख्य प्रतिद्वंदी है.

एशियन रिव्यू के अनुसार जुलाई 2019 में हलाई 2018 के मुकाबले सेल में करीब 4.5 फीसदी तक गिर गई. यही नहीं बल्कि चाइना की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी BYD कंपनी लिमिटेड के सेल में जुलाई के महीने में 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.

तो ऐसा नहीं है कि ऑटो सेक्टर में गिरावट सिर्फ अपने ही देश में है. ये गिरावट बाकी देशों में भी है. लेकिन विपक्ष को हाय तौबा मचाना है इसलिए दुनिया में क्या चल रहा है उसे इग्नोर कर दिया. ऑटो सेक्टर एक ऐसा सेक्टर है जिसमे दुनिया में चल रहे ट्रेंड्स का प्रभाव पड़ता है और इसे इग्नोर नहीं किया जा सकता.