कांग्रेस एनसीपी के नेता आखिर क्यों कर रहे हैं बीजेपी का प्रचार?

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लोकसभा चुनाव के दौरान कुछ ऐसी ख़बरें आ जाती है तो आम लोगों को तो छोडिये नेताओं को भी सन्न कर देती है. चुनाव के चलते प्रचार प्रसार काफी तेजी से चल रहा है. नेता, मंत्री, सांसद, विधायक सब प्रचार में लगे हैं. विपक्ष पर हमला बोलकर खुद पार्टी को सबसे अच्छी पार्टी और खुद को सबसे अच्छा नेता साबित करने में लगे हुए हैं. लेकिन कई जगह से ऐसी ख़बरें आ रही है कि जहाँ नेता जी तो हैं किसी और पार्टी से लेकिन प्रचार किसी और पार्टी के लिए कर रहे हैं.

इससे वे खुद की और पार्टी की किरकिरी करवा रहे हैं. ऐसा ही कुछ देखने को मिला है महराष्ट्र में जहाँ कांग्रेस और एनसीपी के नेता शिवसेना और बीजेपी के प्रत्याशियों का प्रचार कर रहे हैं. दरअसल राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी मतलब एनसीपी ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल पर अहमदनगर से बीजेपी प्रत्याशी के लिए प्रचार करने का आरोप लगाया है.. कांग्रेस एनसीपी के बीच हुए गठबंधन के चलते अहमदनगर की सीट एनसीपी के हाथ चली गयी और पार्टी ने यहाँ से संग्राम जगताप को बीजेपी के खिलाफ उतारा है. इससे कांग्रेस में कुछ हद तक नाराजगी है. दूसरी बात इस जो कांग्रेस के नेता हैं राधाकृष्ण… इनके बेटे ही बीजेपी के टिकट पर अहमदनगर से प्रत्याशी है. कहा तो यह भी जा रहा था कि राधा कृष्ण कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो सकते है लेकिन अभी तक ऐसा हुआ नही है. और अब खबर सामने आ रही हैं कांग्रेस में रहते हुए वे बीजेपी प्रत्याशी यानी अपने बेटे का प्रचार कर रहे हैं जिससे कांग्रेस की सहयोगी एनसीपी नाराज है और महराष्ट्र के अध्यक्ष अशोक चव्हाण को ख़त लिखते हुए कहा है कि यह काफी गंभीर है कि विपक्ष के नेता अहमदनगर सीट पर अपने बेटे के लिए प्रचार कर रहे हैं न कि एनसीपी उम्मीदवार संग्राम जगताप के लिए…


इसके साथ ही एनसीपी के एक और बड़े नेता विजय सिंह मोहिते-पाटील ने भी भाजपा का समर्थन करने का ऐलान किया है. ये प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री हैं और पार्टी द्वारा लगातार इग्नोर किये जाने से परेशान थे. विजय सिंह के बेटे रणजीत सिंह पाटील बीजेपी में शामिल हो चुके हैं और उन्हें महाराष्ट्र के माधा से टिकट मिलने की संभावना है.
वहीँ कांग्रेस से एमएलए कालीदास कोलंबर भी अब भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना का समर्थन करने का ऐलान कर चुके हैं. उनका कहना है कि कांग्रेस के दक्षिण-मुंबई सेंट्रल सीट से उम्मीदवार एकनाथ गाइकवाड़ ने ना मुझे बुलाया और ना ही मुझे कोई संदेश भेजा। अब मैं राहुल शेवाले जो शिवसेना के उम्मीदवार हैं उनका समर्थन करूंगा और उनका ही प्रचार करूंगा’। इसके बाद कालिदास ने कांग्रेस पार्टी के कमजोर नेतृत्व पर भी अपनी निराशा जताई.


हालाँकि इन नेताओं की गतिविधियों को देखकर तो यह बात समझ आती है कि ये नेता हैं तो एनसीपी और कांग्रेस में लेकिन समर्थन बीजेपी का कर रहे हैं. वजह चाहे जो भी हो लेकिन ये बात एनसीपी और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को बिलकुल पसंद नही आएगा. लेकिन इस सबसे एक बात यह स्पस्ट हो जा रही है कि कांग्रेस और बीजेपी में नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की क्षमता नही रह गयी है. अनुशासन लगभग खत्म सा हो चूका है. अब देखना होगा कि बीजेपी को एनसीपी और कांग्रेस नेताओं की इस हरकत से कितना फायदा पहुँचता है और इन नेताओं पर कोई कार्रवाई की भी जाती है या नही!