इतनी बेशर्मी कहाँ से लाते हैं राजदीप सरदेसाई ?

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असहिष्णुता, लिंचिंग, फासीवाद, लोकतंत्र को खतरा, डर का माहौल है. ये कुछ शब्द ऐसे हैं जो हमारे देश में साल 2014 के बाद अस्तित्व में आये. अगर किसी भाजपा शासित राज्य में कोई लिंचिंग या हत्या हो जाती है तो भाजपा सरकार जिम्मेदार होती है. उस राज्य की क़ानून व्यवस्था पर सवाल उठाये जाते हैं. लोकतंत्र खतरे में आ जाता है और देश असहिष्णु हो जाता है. सोशल मीडिया पर वीभत्स तस्वीरें शेयर होने लगती है. मोमबत्ती और प्लेकार्ड गैंग एक्टिव हो जाता है. अवार्ड वापस लौटाए जाने लगते हैं और हिंदुत्व को आतंकी घोषित कर दिया जाता है.

लेकिन अगर लिंचिंग या हत्या किसी ऐसे राज्य में हो जहाँ भाजपा सरकार नहीं है तो आपको पता है क्या होता है? तो ये बताने कि होड़ लग जाती है कि इस हत्या या लिंचिंक का कोई राजनीतिक या धार्मिक एंगल नहीं है. तब ऐसी तस्वीरें शेयर करने को भड़काऊ हरकत कहा जाने लगता है. संबंधित राज्य की क़ानून व्यवस्था के बारे में एक शब्द नहीं कहा जाता और वो प्लेकार्ड और मोमबत्ती गैंग एक ट्वीट कर के घटना की निंदा कर देता है. गैर भाजपा शासित राज्य में कोई अपराध होने पर न तो लोकतंत्र खतरे में आता है, न असहिष्णुता आती है, न डर का माहौल आता है और न ही कोई अवार्ड वापसी होती है.

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में एक आरएसएस कार्यकर्ता और उसके पुरे परिवार की हत्या कर दी जाती है. हत्यारे 7 महीने कि गर्भवती पत्नी और 8 साल के मासूम बेटे को भी नहीं छोड़ते. सोशल मीडिया पर इसकी जबरदस्त तरीके से निंदा की जाती है. तस्वीरें और विडियो वायरल होते हैं. पश्चिम बंगाल सरकार और क़ानून व्यवस्था सवालों के घेरे में आती है. लेकिन एक तबका लिबरल और सेक्युलर गैंग का भी है जो ढाल बनकर ममता बनर्जी सरकार के बचाव में खड़ा हो जाता है.

मशहूर पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने मुर्शिदाबाद हत्याकांड पर एक ट्वीट किया, “पश्चिम बंगाल पुलिस ने इंडिया टुडे को बताया कि इस हत्या में कोई पोलिटिकल या धार्मिक नहीं है. इस हत्याकांड का विडियो सिर्फ इसलिए शेयर किया जा रहा है ताकि लोगों को भड़काया जा सके. सोशल मीडिया पर इस हत्याकांड को लेकर राजनीति हो रही है.“

सेक्युलर शिरोमणि राजदीप सरदेसाई के ट्वीट में कहीं भी आपको बंगाल की खराब क़ानून व्यवस्था पर सवाल , ममता सरकार की निंदा नहीं दिखेगी। इस ट्वीट में मारे गए लोगों के लिए सहानुभूति के 2 शब्द भी नहीं दिखेंगे. उस ट्वीट में उल्टा उनलोगों की निंदा की गई है जो इस हत्याकांड को लेकर सोशल मीडिया पर आउटरेज चला रहे हैं… राजदीप वो काम कर रहे हैं जो तृणमूल कांग्रेस या पश्चिम बंगाल सरकार के प्रवक्ता का काम है.

ये सच है कि अभी तक इस घटना में कोई राजनितिक या धार्मिक एंगल सामने नहीं आया है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि इस हत्याकांड से पश्चिम बंगाल की खराब क़ानून व्यवस्था या फिर पश्चिम बंगाल सरकार सवालों के घेरे में नहीं है. लोकसभा चुनाव के दौरान का वो खुनी दौर अब तक आप भूले नहीं होंगे जब भाजपा कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतार दिया जाता था और लिबरल और सेक्युलर गैंग ने चुप्पी साध रखी थी.

साल 2017 में कर्नाटक में गौरी लंकेश नाम के एक पत्रकार की हत्या हुई थी. उस वक़्त कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार थी लेकिन सवालों के घेरे में कौन आया? केंद्र की मोदी सरकार. कर्नाटक की तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर कोई आरोप नहीं लगे. राजदीप ने उस वक़्त ट्वीट किया था, “पत्रकार और हिन्दू विचारधारा की आलोचक गौरी लंकेश की हत्या.”

इस ट्वीट में पत्रकार के साथ साथ हिंदुत्व विचारधारा की आलोचक शब्द का भी प्रयोग है. इस “हिंदुत्व विचारधारा की आलोचक” शब्द पर विशेष ध्यान दीजियेगा. ये इशारा किस तरफ है ये समझदार लोगों को बताने की जरूरत नहीं.अब तो गौरी लंकेश के नाम पर इस गैंग ने एक अवार्ड भी शुरू कर लिया है.

साल 2015 में उत्तर प्रदेश के दादरी में अख़लाक़ हत्या कर दी गई थी. उत्तर प्रदेश में सरकार थी समाजवादी पार्टी की. अख़लाक़ को पीटने वाले उसी के गाँव के कुछ लोग थे जिनका किसी राजनितिक पार्टी से कोई ताल्लुक नहीं था. लेकिन फिर भी केंद्र की मोदी सरकार को घेरा गया. देश में असहिष्णुता की थ्योरी गढ़ी गई. अवार्ड लौटाए गए लेकिन राज्य की समाजवादी पार्टी सरकार से किसी ने सवाल नहीं पूछे. किसी ने राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाये. उस वक़्त किसी ने ये नहीं कहा कि इसमें कोई राजनितिक एंगल नहीं है.

दिल्ली में बीच सड़क पर एक मुस्लिम परिवार एक हिन्दू युवक अंकित सक्सेना को लिंच कर देता है. लेकिन कितने अवार्ड लौटाए गए? कितने प्लेकार्ड लहराए गए? कितनी मोमबत्तियां जली? क्या आपको याद है ? कैसे याद रहेगा जब ऐसा कुछ हुआ ही नहीं. इसे तो लिंचिंग मानने से ही इनकार कर दिया गया.

इतने दोगलेपन के बाद भी लोग सीना तान कर कहते हैं कि हम निष्पक्ष है. खुद गोदी में बैठ कर दूसरों को ज्ञान देते हैं कि वो गोदी मीडिया है.