24 घंटों बाद नींद से जगे राहुल गाँधी, धारा 370 पर तोड़ी चुप्पी

आखिरकार राहुल गाँधी ने धारा 370 के मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ी . ऐसा लगता है पुरे मुद्दे को समझने में उन्हें 24 घंटे लग गए या फिर उन्हें ये समझने में 24 घंटे लग गए कि मोदी और शाह की जोड़ी ने उनके साथ ये कर क्या दिया . मुझे लगता है कि राहुल गाँधी तो अब तक ये भी नहीं समझ पाए कि 23 मई 2019 को जनता ने उनके साथ क्या किया ….
एक हफ्ते से कश्मीर को लेकर पुरे देश में गहमा गहमी थी लेकिन देश के सबसे बड़े मुद्दे पर देश की सबसे पुरानी और बड़ी पार्टी के सबसे बड़े नेता राहुल गाँधी लापता थे.

देश का इतिहास बदल गया, कश्मीर का भूगोल बदल गया. धारा 370 हटा कर एक देश, एक विधान, एक निशान का सपना पूरा हुआ और राह्यल गाँधी 24 घंटों बाद सामने आये इस मुद्दे पर बोलने के लिए या यूँ कहिये कि 24 घंटों बाद सामने आये इस मुद्दे पर ट्वीट करने के लिए. राहुल गाँधी ने ट्वीट किया – सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर संविधान का उल्लंघन किया. सरकार ने राष्ट्रीय एकीकरण तोड़ा है. जम्मू कश्मीर के चुने हुए प्रतिनिधियों को कैद किया गया. देश लोगों से बनता है, जमीन के टुकड़ों से नहीं. सत्ता के दुरुपयोग से देश की सुरक्षा को खतरा है.”

राहुल गाँधी ने प्रतिक्रिया देने में बहुत देर कर दी .. क्योंकि कब इस मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी दो फाड़ हो चुकी है. और पार्टी की काफी किरकिरी भी हो चुकी है. पार्टी के कई युवा नेता इस मुद्दे पर सरकार के साथ खड़े हैं तो कई वरिष्ठ नेता भी इसे इतिहास की गलती को सुधारना बता रहे हैं और इन सब के बीच पार्टी कन्फ्यूज है कि करें तो करें क्या?
पार्टी इसे पहले सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक पर बड़ी गलती करके उसका खामियाजा भुगत चुकी है और अब धारा 370 पर भी इसी उसी रह पर खड़ी है. आइये पहले आपको बताते हैं किस नेता ने आर्टिकल 370 हटाने के मुद्दे पर पार्टी लाइन के खिलाफ जाते हुए क्या कहा दीपेन्द्र हुडा ने ट्वीट किया – दीपेन्द्र हुडा ने ट्वीट कर लिखा – मेरी व्यक्तिगत राय रही है कि 21वीं सदी में अनुच्छेद 370 का औचित्य नहीं है और इसको हटना चाहिए। ऐसा सिर्फ देश की अखंडता के लिए ही नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर जो हमारे देश का अभिन्न अंग है, के हित में भी है। अब सरकार की यह जिम्मेदारी है कि इसका क्रियान्वयन शांति और विश्वास के वातावरण में हो।“

दीपेन्द्र हुदा के बाद मिलीं देवड़ा भी पार्टी लाइन के खिलाफ जा कर सरकार के साथ खड़े नज़र आये मिलिंद देवड़ा ने कहा – यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अनुच्छेद 370 को उदार बनाम रूढ़िवादी बहस में तब्दील कर दिया गया। पार्टियों को अपनी विचारधारा से अलग हटकर इस पर बहस करनी चाहिए कि भारत की संप्रभुता और संघवाद, जम्मू-कश्मीर में शांति, कश्मीरी युवाओं को नौकरी और कश्मीरी पंडितों के न्याय के लिए बेहतर क्या है।” युवा ही नहीं .. वरिष्ठ नेता भी धारा 370 पर पार्टी के रुख से असहज नज़र आये .. कभी गाँधी परिवार के बेहद करीबी रहे जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि इतोहास में की गई एक गलती को सुधारा गया है .. राज्यसभा सांसद भुवनेश्वर कलिता ने भी पार्टी के स्टैंड से नाराज हो कर इस्तीफ़ा दे दिया ..सबसे मजेदार बात ये कि भुवनेश्वर कलिता पर ही राज्यसभा में व्हिप जारी करने की जिम्मेदारी थी.

कांग्रेस का इस वक़्त कोई अध्यक्ष नहीं है … ऐसा कोई नेता नहीं है जो पुरे पार्टी को विश्वास में ले सके … इसलिए इस मुद्दे पर चर्चा के लिए पार्टी के सभी सांसदों की कोई मीटिंग तक ना हुई जिसमे ये तय किया जा सके कि क्या बोलना है और क्या नहीं … राज्यसभा में गुलाम नबी आज़ाद अकेले इस प्रस्ताव के विरोध में खड़े हो कर बोलते रहे और बसपा, आप, बीजेडी, टीडीपी जैसी विरोधी पार्टियों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को समर्थन दे दिया … 24 घंटे तक ना तो राहुल गाँधी, ना सोनिया गाँधी और न ही प्रियंका गाँधी ने इस पर कोई बयान दिया और 24 गनते बाद जब राहुक्ल गाँधी ने कुछ कहा भी तो सिर्फ एक ट्वीट कर के चुप्पी साध गए. धारा 370 देश के जनमानस के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ था या यूँ कहे कि भाजपा ने इसे देश के जनमानस के साथ जोड़ दिया था. ठीक उसी तरह जैसे एयर स्ट्राइक को जोड़ा था. राष्ट्रवाद के मुद्दे पर जब देश का प्रधानमंत्री या गृहमंत्री हुंकार भरता है तो जनता का रोम रोम रोमांचित हो उठता है और ये तो फिर भी कश्मीर का मुद्दा था. कांग्रेस ने इस बार विरोध कर अपने लिए के ऐसा गड्ढा खोदा घी जो उसे गर्त में ही ले जाएगा .