खराब मौसम में रडार से बचा जा सकता है…

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आजकल के चुनावी मौसम में PM मोदी द्वारा जो भी कुछ बोला जाता है तो उसे विपक्ष द्वारा हास्यपद बना दिया जाता … मतलब की अगर आम भाषा में बोले तो उनका मज़ाक उड़ाया जाता है … कभी उनके इंटरव्यूज के कराण तो कभी उनके बयानों के कारण… वैसे हाल में ही एक इंटरव्यू में pm मोदी ने बालाकोट में हुए सेर्गिकल स्ट्राइक को लेके कुछ बोला….

विपक्ष ने और सोशल मीडिया पर उनके विपक्षियों ने उनका जमकर मज़ाक उड़ाया… बात दरअसल यह थी कि एक टीवी इंटरव्यू में pm मोदी ने बालाकोट हमले पर यह कहा कि “मैं दिन भर बहुत व्‍यस्त था… वार मेमोरियल का उद्घाटन था…. चुरू में रैली करने गया था…. मेरा कार्यक्रम चल रहा था…. मैं टीम प्‍लेयर हूं…… जिसको काम एसाइन करता हूं वो करता है.. यह काम टीम ने किया था….. रात को 9 बजे मैंने रिव्‍यू किया, फिर रात को 12 बजे रिव्‍यू किया…… हमारे सामने समस्‍या थी कि उस समय मौसम खराब हो गया था…… यह बात मैं पहली बार बोल रहा हूं….. अचानक एक सुझाव मिला कि डेट बदल दें क्‍या? मैंने कहा कि इस मौसम में हम रडार से बच सकते हैं……. मैंने कहा कि आसामान में बादल हैं और बारिश हो रही है…… यह हमारे लिए फायदेमंद हो सकता है…….’

वहीं कांग्रेस ने निशाना साधते हुए कहा, ‘जुमला ही फेंकता रहा, पांच साल की सरकार में… सोचा था क्लाउडी (बादल) मौसम है….. नहीं आऊंगा रडार में…’
हालांकि बहुत लोगों को यह राडार वाली बात झूठ लग रही थी … तो हमने भी सोचा की ज़रा टटोला जाए और पता किया जाए कि क्या सच में बादलों के कराण रडार से बचा जा सकता है या फिर यू ही बात बनाया जा रहा…
वैसे pmmodi ने झूठी बातें नहीं कही थीं… उससे पहले हम आपको बताते है आखिर क्या है रडार

रडार बादलों के माध्यम से वस्तुओं का पता लगा सकते हैं, उनकी सटीकता बारिश या बादलों जैसे मौसम की स्थितियों से प्रभावित होती है…. रडार प्रोसेस पर एक एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका प्रविष्टि के अनुसार, “बारिश और वर्षा के अन्य रूपों से राडार में इको पैदा होता है..”
रडार सिस्टम एक चौरी पट्टी के frequency transmission से काम करती है…. इस प्रोसेस की frequency जितनी अधिक होती है, उतनी ही यह बारिश या बादलों जैसे मौसम की स्थितियों से प्रभावित होती है….लेकिन जिन रडार हाइली transmitted frequency होती है वो राडार के acuurate रिजल्ट देने में मदद करती है….

वायु निगरानी रडार के लिए अगर मौसम उसके अनुसार होता है तो वो एकदम सटीक काम करता है …और यह s-band में काम करता है… जिसकी frequency 2-4 ghz होती है….. हालांकि, इस frequency में भी, इसकी क्षमता वातावरण में भारी बारिश, कोहरे और बादलों के लिए अतिसंवेदनशील बनी होती है और क्षीणन बहुत अधिक हो सकता है। दूसरे शब्दों में, हालांकि रडार बादलों के माध्यम से वस्तुओं का पता लगाने में सक्षम हैं और इसे वैज्ञानिक रूप से स्वीकार किया गया है कि आसमान साफ होने पर उनकी दक्षता बेहतर होती है… मतलब की वह साफ़ सीखता है …

आम तौर पर हवाई निगरानी के मामले में, बादलों के कारण होने वाली गड़बड़ी को दूर करने के लिए एक माध्यमिक निगरानी रडार का उपयोग किया जाता है…. माध्यमिक रडार विमान में सवार ट्रांसपोंडर द्वारा भेजे गए संकेतों का उपयोग करता है….. हालाँकि बालाकोट मिशन एक दुसरे देश के हवाई गतिविधियों पर था, इसलिए भारतीय विमान पर लगे ट्रांसपोंडर को बंद कर दिया गया होगा था…

वैसे आपको बता दें कि द्वितीयक रडार की भूमिका को खारिज कर दिया गया था , क्लाउड कवर की उपस्थिति के कारण पाकिस्तान के प्राथमिक रडार की प्रभावशीलता कम हो गई थी … जिसके कराण भारतीय वायु सेना के मिराज 2000 पाकिस्तानी के वायु रक्षा में प्रवेश कर गया….
बालाकोट हमले के बाद पकिस्तान के रक्षा मानती ने यह कहा की is हमले का जवाब देने में बहुत अँधेरा है…

वैसे एक बात और बता दें कि 1000 किलो के बम ले जाने वाले एक दर्जन भारतीय मिराज 2000 विमानों ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) को पार कर लिया था और 26 फरवरी, 2019 के शुरुआती घंटों में पाकिस्तान में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बालाकोट शहर के आसपास के इलाकों में बम गिराए थे…. हालांक 1971 के युद्ध के बाद यह पहली बार था कि भारतीय लड़ाकू जेट नियंत्रण रेखा को पार कर गए….

बहरहाल मोदी जी ने जो रडार वाली बात कही थी उसको वैज्ञानिक भी सही मानते है … लेकिन ना जाने क्यों विपक्षी नहीं मानते… शायद उन्होनें कोई नया इन्वेंशन किया है … लेकिन जैसे विपक्ष द्वारा यह बोला गया की मोदी जी बिना पढ़े समझे कुछ भी बोल गए … तो जरा वो भी पढ़ कर ट्वीट करते… लेकिन इससे एक अच्छी बात हुई की लोगों को रडार के बारे में जानने का मौका मिला