लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन में से किसे हुआ फायदा और किसका हुआ नुकसान

लोकसभा चुनाव के नतीजे सामने आ गये हैं. एक बार फिर देश में मोदी सरकार बनने जा रही है. हालाँकि मोदी सरकार को दोबारा आने से रोकने के लिए विपक्ष ने पूरी ताकत लगा दी थी इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव ने मायावती के साथ सालों से चल रही दुश्मनी को दरकिनार कर गठबंधन कर लिया. गठबंधन भी इसीलिए किया गया था कि उत्तर प्रदेश में अधिक सीटें जीती जाए.. चाल थी कि जब सपा और बसपा के वोट मिल जायेंगे तो बीजेपी को हार का सामना करना पड़ेगा लेकिन जो चुनाव नतीजे सामने आये तो सवाल ये उठता है कि इस गठबंधन से कितना फायदा हुआ.. फायदा हुआ तो किसका हुआ.. किसका नुकसान हुआ और हाँ नुकसान तो उसका होता है जिसके पास खोने के लिए कुछ होता है. आगे बढ़ने से पहले यहाँ आपको बताते चलें कि 2014 लोकसभा चुनाव में सपा को पांच सीटें मिली थी जोकि उनके पूरे परिवार की ही थी..

2014 में सपा को 22.35 प्रतिशत वोट मिले थे.. वही अगर मायावती की बात की जाय तो मायवाती एक भी सीट हासिल करने में सफल नही हुई थी लेकिन बसपा का वोट प्रतिशत 19.77 रहा था. हालाँकि 2019 लोकसभा चुनाव में सपा बसपा के गठबंधन को 15 सीटें मिली है. जिसमें से सपा को 5 और बसपा 10 सीटें मिली है. वही अगर बात वोट प्रतिशत की करें तो सपा-17.98%,बसपा-19.31%, रालोद-1.68% मिला है. और बीजेपी को 49.5% वोट मिले… अनुमान लगाया जा रहा था कि सपा बसपा का गठबंधन बीजेपी के लिए खतरनाक साबित हो सकता है लेकिन हुआ उल्टा… अब हम आपको समझाते हैं कि किसको फायदा हुआ है और किसको नुकसान हुआ है. ना सपा को फायदा हुआ और ना ही गठबंधन को फायदा हुआ.. फायदा सिर्फ बसपा को हुआ है मायवाती को हुआ है और नुकसान अखिलेश यादव यानी सपा का हुआ है. सपा के उम्मीदवारों का हुआ है. सपा के कार्यकर्ताओं का हुआ है. आये हम आपको बताते हैं कैसे?

दरअसल बसपा 2014 में जब एक भी सीट नही जीत पायी थी तो सपा ने उनके साथ गठबन्धन किस उम्मीद से की थी.. दरअसल उपलोकसभा चुनाव में सपा बसपा के गठबंधन के उम्मीदवार को जीत क्या मिली.. अखिलेश यादव की भावनाएं उनके पिता की सोच से भी ऊपर उठ गयी… उपलोकसभा चुनाव में मायावती ने दोनों सीटें सपा की दे दी थी और दोनों सीटों पर सपा के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी..लेकिन इस बार सीट बँटवारा बहुत सोच समझ कर किया गया था.2019 लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा ने गठबंधन कर चुनाव लड़ने का निर्णय किया.. एक दुसरे के लिए प्रचार किया.. लेकिन नतीजे जब सामने आये तो सपा को तो फायदा ही नही हुआ सपा के खाते में पांच सीटें ही आई और बसपा को 10 सीटे मिली है. अब फायदा किसका हुआ आपको समझ आ ही गया होगा.. फायदा बसपा को हुआ.. उसी बसपा को जिसे 2014लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नही मिली थी. विधानसभा चुनाव में भी कुछ ख़ास प्रभाव नही था लेकिन अखिलेश यादव ने गठबंधन किया और लगभग खत्म हो चुके मायवाती के जनाधार के बावजूद मायावती को 10 सीटें देने का काम अपना नुकसान करके अखिलेश यादव ने किया. वोट प्रतिशत में भी सपा को नुकसान हुआ और बसपा के वोट प्रतिशत में कमी जरूर आई लेकिन सीट अधिक जीतने में कामयाब हुई है. हालाँकि कहा तो यह भी जा रहा है कि जिन सीटों पर बसपा के उम्मीदवार थे उन सीटों पर सपा और बसपा के कार्यकर्ताओं ने जमकर मेहनत की लेकिन जिन सीटों पर सपा के उम्मीदवार थे उन सीटों पर सपा के कार्यकर्ता मेहनत तो कर ही रहे थे लेकिन बसपा के कार्यकर्ता बीजेपी की तरफ आकर्षित हो गये.. मतलब मोदी सरकार की योजनाओं ने उन्हें अपनी तरफ खींच ही लिया.. घर, गैस, बिजली तमाम योजनायें बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हुई.. मतलब पूरा का पूरा नुकसान सपा को होता दिखाई दिया.. वैसे बीजेपी की सीटें कम होने का अनुमान पहले से ही लगाया जा रहा था लेकिन जितने सीटें बीजेपी ने हासिल की थी ये अनुमान से अधिक ही साबित होती दिखाई दी है.

वैसे जब अखिलेश यादव ने बसपा के साथ गठबंधन को लेकर एलान करने वाले थे तो उनके पिता और राजनीति के अनुभवी मुलायम सिंह यादव ने उन्हें ऐसा करने से मना किया था. एलान के बाद मुलायम सिह यादव ने नाराजगी भी जाहिर की थी लेकिन अखिलेश यादव नही माने और आज स्थिति ये हो गयी है कि अखिलेश यादव मात्र तीन सीटें अधिक जीतकर आठ से दस सीटें बसपा को दे गये.. हालाँकि चुनाव नतीजे सामने आने के बाद मुलायम और अखिलेश के क्या रिएक्शन सामने आते हैं वो देखने वाली बात होगी.