आज़ादी के नारों से गूँज उठा पाक अधिकृत कश्मीर, भारत के साथ जाने की मांग कर रहे लोग

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सोमवार को पाक अधिकृत कश्मीर आज़ादी के नारों से गूँज उठा. हज़ारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आये और नारे लगाने लगे “पाकिस्तानी फौजियों, छोड़ दो कश्मीर को” और “ये जो दशहतगर्दी है, इसके पीछे वर्दी है”. POK में हाल के दिनों में ये सबसे बड़ा प्रदर्शन था आज़ादी के लिए और इसकी गूँज पूरी दुनिया ने देखी. प्रदर्शनकारियों को तितर बितर करने के लिए पाकिस्तानी पुलिस ने जमकर दमन चक्र चलाया और आंसू गैस के गोले छोड़े. बढ़ते विरोध-प्रदर्शनों के कारण रावलकोट, हजीरा, तेतरी नोट जिलों में मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई है.

अल जजीरा के मुताबिक़ जिन इलाकों में प्रदर्शन हुए वो सभी POK के शहर मुज़फ्फराबाद से 80 किलोमीटर दूर हैं और लाइन ऑफ़ कण्ट्रोल के बेहद नजदीक हैं. इन नारों और प्रदर्शनों ने पाकिस्तान के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच दी क्योंकि प्रदर्शनकारी खुलेआम भारत के साथ जाने की बातें कर रहे थे.

दरअसल पाकिस्तान बेचैन तो उसी दिन से है जब भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि “अब पाकिस्तान से बात होगी तो सिर्फ पाक अधिकृत कश्मीर” पर होगी. POK में आज़ादी के लिए हुआ प्रदर्शन. अचानक ही नहीं था बल्कि ये तो वो सुलगता लावा था जो वर्षों से POK के लोगों के सीने में दबा हुआ है. पाकिस्तान POK की खनिज संपदा समेत प्राकृतिक स्रोतों का जमकर दोहन करता रहा है लेकिन इलाके के लोग बदहाल दशा में जीने को मजबूर हैं. आतंकी शिविरों ने वहां के लोगों की ज़िन्दगी को बद से बदतर बना दिया है.

बलूचिस्तान से परेशान पाकिस्तान

पाकिस्तानी की परेशानी सिर्फ POK ही नहीं है बल्कि उसका सबसे बड़ा प्रान्त बलूचिस्तान भी उसकी परेशानियों में इजाफा कर रहा है. बलूचिस्तान में मानवाधिकार हनन और नागरिकों पर अत्याचार के पोस्टरों से स्वीटजरलैंड की राजधानी जेनेवा की सड़कें पट गईं. जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्यालय है और वहां पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन का 42 सम्मलेन होने वाला है.

वर्तमान में बलूचिस्तान, पाकिस्तान का सबसे अशांत प्रान्त है. पाकिस्तान की आजादी के साथ ही बलूचिस्तान की आज़ादी की मांग भी उठने लगी थी और पाकिस्तान ने हमेशा बलूच आन्दोलन को अपनी सेना के दम पर बर्बरता से कुचला है और अब भी कुचल रहा है. पाकिस्तान बलूच आन्दोलन को कुचलने के लिए अपने ही क्षेत्र के लोगों पर हवाई हमले करता रहता है.

पाकिस्तान में चार सूबे हैं- खैबर पख्तुनख्वा, सिंध, बलूचिस्तान और पंजाब. इन चारों सूबों में से बलूचिस्तान का सबसे ज्यादा सामरिक महत्त्व है. बलूचिस्तान, पाकिस्तान के लिए कितना महत्त्व रखता है ये आप इससे समझिये कि बलूचिस्तान का 760 किलोमीटर लंबा समुद्र तट पाकिस्तान के समुद्र तट का दो तिहाई है. पाकिस्तान के तीन नौसैनिक ठिकाने ओरमारा, पसनी और ग्वादर, बलूचिस्तान में ही है. बलूचिस्तान के ग्वादर में ही चीन ने बंदरगाह का निर्माण किया है जो उसकी पहुँच सीधे अरब सागर तक बनाता है.

मुश्किल में ग्वादर बंदरगाह

बात निकली है ग्वादर की तो आइये आपको ग्वादर की हकीकत भी बता देते हैं. ग्वादर बंदरगाह बन तो गया लेकिन बनने के बाद वो पाकिस्तान के लिए सिरदर्द बन गया है. पाकिस्तान ने सोचा था कि इस बंदरगाह के बनने से उसे थोड़ी आर्थिक मदद मिलेगी क्योंकि ग्वादर से अफगानिस्तान पहुंचना आसान था लेकिन ग्वादर से मात्र 78 किलोमीटर दूर इरान के चाबहार में भारत के सहयोग से बने पोर्ट ने उसकी उम्मीदों को तोड़ दिया. अफगानिस्तान तक व्यापार के लिए ग्वादर का नहीं बल्कि चाबहार का इस्तेमाल हो रहा है और इससे ग्वादर पोर्ट की मुश्किलें बढ़ गई. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़ चीन की कॉस्को शिपिंग लाइन्स ने हाल ही में कराची से ग्वादर के बीच कंटेनर लाइनर सेवा बंद कर दी है. साथ ही पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि हालात नहीं सुधारे तो रिश्ते ख़राब हो सकते हैं.

फ़िलहाल तो पाकिस्तान इस वक़्त चारो तरफ से घिरा हुआ है. आर्थिक मोर्चे पर तो पहले ही उसकी हालत खस्ता है और अब घरेलू मोर्चे पर भी पाकिस्तान टुकड़ों में बंट जाने के कगार पर पहुँच चूका है.