5 दिन बाद जेल से रिहा हुई प्रियंका शर्मा, जेल प्रशासन पर लगाया टॉर्चर करने का आरोप

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ममता बनर्जी का मीम शेयर करने वाली प्रियंका शर्मा 5 दिन जेल मे बिताने के बाद जमानत पर रिहा हो गई. जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने बंगाल सरकार पर कई आरोप लगाए. उन्होंने आरोप लगाया कि रिहाई के आदेश देने के बाद भी उन्हें 18 घंटे तक जेल में रखा गया . उन्हें टॉर्चर किया गया और जबरदस्ती माफीनामे पर साइन करवाया गया . वकील और परिवार से भी मिलने नहीं दिया गया.
प्रियंका ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा -“कल मेरा बेल हो चूका था फिर भी मुझे 18 घंटे तक जेल में रखा गया . कल मैंने उनसे बोला कि मुझे मेरे परिवार और वकील से मिलने दिया जाए तो भी मेरी बात नहीं मानी गई. मैंने जो किया मुझे उसका कोई अफ़सोस नहीं है. मैं अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखूंगी. मैंने ऐसा कोई काम नहीं किया जिसके लिए माफ़ी मांगनी पड़े. जुलाई में मेरे मामले की सुनवाई होगी और मैं आगे भी कानूनी लड़ाई जारी रखूंगी .एक मीम शेयर करनेके कारण मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया गया. ये कहाँ की शालीनता है?”

प्रियंका ने कहा कि भाजपा से जुड़े होने के कारण उनके साथ बुरा व्यवहार किया गया. जेलर ने उन्हें धक्का दिया. जेल में वॉशरूम की हालत ठीक नहीं थी और पीने का पानी भी नहीं दिया गया . प्रियंका ने सवाल उठाया कि ममता का मीम शेयर करने के कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया तो फिर ममता को गिरफ्तार क्यों नहीं गया. ममता ने तो पीएम को बहुत कुछ आपत्तिजनक बोला है.

सुप्रीम कोर्ट ने 14 मई को ही प्रियंका को जमानत दे दी गई थी लेकिन जेल से उन्हें 15 मई को सुबह 9 बजकर 40 मिनट पर जेल से रिहा किया गया. जब कोर्ट के आदेश के बाद भी प्रियंका को मंगलवार रिहा नहीं किया गया तो प्रियंका के वकील फिर कोर्ट पहुंचे तब जा कर कोर्ट ने कहा कि अगर आधे घंटे मे प्रियंका को रिहा नही किया गया तो कोर्ट आदेश की अवमानना के तहत कारवाई की जायेगी . जेल प्रशासन की तरफ से कहा गया कि जेल के मैनुअल के मुताबिक कोर्ट के आदेश की पुष्टि की जरूरत होती है. इसकी वजह से देरी हुई और प्रियंका की रिहाई नहीं हो पाई तब कोर्ट ने नाराज होते हुए कहा कि जेल मैनुएल क्या कोर्ट के आदेश से बड़ा होता है .

हालांकि प्रियंका की जमानत पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि उन्हे लिखित में माफ़ी मांगनी होगी. तब प्रियंका के वकील ने आपत्ति जताते हुए कहा कि ये अभिव्यक्ति कीआजादी का हनन होगा . कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की आज़ादी तभी तक है जब तक किसी को इससे तकलीफ ना हो. प्रियंका कोई आम आदमी नहीं है बल्कि राजनैतिक कार्यकर्ता है. बाद में कोर्ट ने अपने आदेश में संशोधन करते हुये माफ़ी की शर्त हटा दी थी .
प्रियंका की गिरफ्तारी ने अभिव्यक्ति की आज़ादी पर नयी बहस छेड़ दी . ट्विटर पर लोगों ने सवाल उठाये कि क्या देश में सिर्फ टुकड़े टुकड़े कहने केलिए अभिव्यक्ति की आज़ादी है. मोदी सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाने वाले राहुल गाँधी और उनकी पार्टी कांग्रेस की चुप्पी भी उनके दोहरे मापदंड को दर्शाता है .