पीएम पद का त्याग करने वाला बयान देने के एक दिन बाद ही कांग्रेस ने लिया यू टर्न

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आखिरी चरण के मतदान से पहले ही सभी पार्टियाँ संभावित नतीजों को लेकर गुणा भाग करने में लगी है. भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए 16 मई एक बयान दे कर कांग्रेस ने राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ा दी. पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नवी आज़ाद ने कहा कि कांग्रेस का सबसे मुख्य उद्धेश्य मोदी को सत्ता में आने से रोकना है. अगर अन्य पार्टियाँ कांग्रेस का समर्थन करती है तो हम नेतृत्व करने को तैयार हैं लेकिन अगर पार्टियाँ तैयार नहीं होती तो फिर कोई भी ये जिम्मेदारी संभाले हमें ऐतराज नहीं होगा.

कांग्रेस के इस बयान से ये सन्देश गया कि पार्टी नतीजों से पहले ही हार मान लिया है. गुलाम नवी आज़ाद के इस बयान से पार्टी बैकफुट पर आ गई. जिस कारण अगले ही दिन गुलाम नवी आज़ाद अपने बयान से पलट गए . शुक्रवार 17 मई को आज़ाद ने अपने एक दिन के बयान से यू टर्न मारते हुए कहा कि ये सच नहीं है कि कांग्रेस पीएम पद की दावेदारी पेश नहीं करेगी. उन्होंने कहा – कांग्रेस देश की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी पार्टी है तो जाहिर सी बात है कि अगर 5 साल सरकार चलाना है तो सबसे बड़ी पार्टी को मौका मिलना चाहिए.

चुनाव से पहले भी प्रधानमंत्री पद  को लेकर विपक्षी दलों में रार मच चुकी है. लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा से पहले ही डीएमके चीफ स्टालिन ने राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था लेकिन अखिलेश यादव, मायावती और ममता बनर्जी ने चुनाव से पहले प्रधानमंत्री पद पर किसी भी तरह के चर्चा को खारिज कर दिया था और कहा था कि चुनाव के बाद इस पर चर्चा होनी चाहिए.

सोनिया गाँधी ने चुनाव बाद की संभावनाओं को टटोलना शुरू कर दिया है. उन्होंने नतीजों वाले दिन 23 मई को विपक्षी दलों की बैठक बुलाई है. पहले ये बैठक 21 मई को होने वाली थी लेकिन सपा, बसपा और टीएमसी ने कहा कि कोई भी बैठक नतीजों के बाद होनी चाहिए ताकि जब टेबल पर चर्चा के लिए बैठे तों सभी के पास आंकड़े हों जिसपर चर्चा की जा सके. विपक्ष की रणनीति है कि अगर नतीजे कुछ उंच नीच रहे तो भाजपा को किसी भी तरह का मौका ना मिले.

बाकी विपक्षी दलों से इतर आम आदमी पार्टी एक ऐसा फ़ॉर्मूला ले कर आई जिसे सुन कर सिर्फ हंसा जा सकता है. AAP नेता संजय सिंह ने 5 साल 5 पीएम का फ़ॉर्मूला सामने रखा. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि जिस दल के सबसे अधिक सांसद हो उनका प्रधानमंत्री सबसे पहले बने. उसके बाद दूसरे, तीसरे, चौथे नंबर की पार्टी से पीएम बने . इससे सभी दल के नेता पीएम बन पाएंगे.

संजय सिंह के इस फ़ॉर्मूले पर कुमार विश्वास ने तंज कसते हुए कहा था इतने दल हैं तो हर महीने नया पीएम भी ठीक रहेगा. उन्होंने tweet करते हुए कहा – कुमार विश्वास ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘वैकल्पिक राजनीति के आंदोलनकारी मसीहाओं का मानना है कि पांच साल में पांच प्रधानमंत्री बनने चाहिए. हर साल एक नया पीएम, पर गठबंधन में तो तीस-चालीस दल हैं, तो हर महीने नया भी ठीक रहेगा? जय हो लोकतंत्र के नए रक्षकों की!’

मायावती और ममता बनर्जी खुद को प्रधानमंत्री पद के दावेदारों में सबसे आगे मानती हैं जबकि केसीआर उप प्रधानमंत्री पद का दावेदार मानते हैं.जब तक चुनाव परिणाम नहीं आते तब तक नये नये फ़ॉर्मूले सामने आते रहते हैं और प्रधानमंत्री पद के कई दावेदार भी सामने आयेंगे .