संसदीय दल की बैठक में पीएम मोदी ने बल्लेबाज नेताओं की दी नसीहत

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संसद के मौजूदा सत्र के दौरान बीजेपी संसदीय दल की पहली बैठक आज हो रही है. बैठक शुरू होने से पहले बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और जेपी नड्डा समेत कई बड़े नेताओं ने पीएम मोदी का जोरदार स्वागत किया. यह संसद के मौजूदा सत्र के दौरान पार्टी के संसदीय दल की पहली बैठक रही। यह बैठक 25 जून को ही होने वाली थी, पर राजस्‍थान बीजेपी के अध्‍यक्ष व पार्टी के वरिष्‍ठ नेता मदन लाल सैनी के निधन के कारण यह स्‍थगित कर दी गई थी। संसद के मौजूदा सत्र को देखते हुए यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है, जिसमें आम चुनाव जीतने के बाद दोबारा सत्‍तासीन होने वाली मोदी सरकार न केवल पूर्ण बजट पेश करेगी, बल्कि इस दौरान कई अन्‍य महत्‍वपूर्ण विधेयकों के भी पारित होने की उम्‍मीद की जा रही है। लेकिन इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने पार्टी का नाम धूमिल करने वाले नेताओं के लिए भी कड़ा सन्देश दिया है.

आकाश विजयवर्गीय का नाम लिए बिना प्रधानमंत्री मोदी ने जो कहा उसे हल्के में लेना अब नेताओं के लिए भूल हो सकती है. प्रधानमन्त्री मोदी ने कहा कि हर किसी को पार्टी की मर्यादा व अनुशासन का ख्‍याल रखने की जरूरत है। यह मायने नहीं रखता कि पार्टी की मर्यादा या अनुशासन को ठेस पहुंचाने वाला शख्‍स किसका बेटा या बेटी है। ऐसे किसी भी शख्‍स को पार्टी से पार्टी से निकाल दिया जाएगा, जिससे बीजेपी की प्रतिष्‍ठा धूमिल होगी..
दरअसल बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय ने कुछ दिन पहले नगर निगम के अधिकारीयों को बैट से पीटा था. जिसका वीडियो हम सबने देखा था. हर तरफ से निंदा की गयी.. आकाश को जेल भी भेजा गया. जेल से बहार आने के बाद उन्होंने कहा कि मैं जनता की सेवा करता रहूंगा। ऐसी स्थिति में जब पुलिस के सामने ही किसी महिला को घसीटा जा रहा था, मैं कुछ और करने की नहीं सोच सकता था। इसलिए मैंने जो कुछ किया उसे लेकर शर्मिंदा नहीं हूं। मैं भगवान से प्रार्थना जरूर करूंगा कि वह दोबारा मुझे ऐसी बल्‍लेबाजी करने का मौका ना दे। चूँकि आकाश विजयवर्गीय कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र हैं तो इससे दोनों नेताओं की वजह से बीजेपी के लिए असहज स्थिति पैदा हो गयी थी.


प्रधानमंत्री मोदी उन नेताओं से काफी खफा रहते हैं जो कानून तोड़कर पब्लिसिटी पाने की कोशिश करता है. या पार्टी लाइन से बाहर जाकर काम करता है.
बैठक के दौरान सांसदों को प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद एक सीखने की जगह है, जो सीखेगा उसका ही सम्मान होगा. साथ ही ये ही कहा गया कि सरकार की योजनाओं को जनता तक ले जाइए, इसके अलावा बजट को भी जनता के पास ले जाया जाए.


नए सांसदों को संदेश देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी सांसद सिर्फ बयानबाजी ना करें और सेवा काम में जुटें. हर बूथ में सांसद 5 पेड़ लगाएं, यानी पंचवटी. .. नये सांसदों को सदन में उपस्थित रहने को कहा है.
बीजेपी की संसदीय दल की इस बैठक में गौर करने वाली बात ये भी है कि कई दशकों में ऐसा पहली बार रहा जब वरिष्‍ठ भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी इस बैठक में मौजूद नहीं थे।

यहीं नहीं इस बैठक में पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी नहीं नजर आईं। भाजपा के ये सभी दिग्‍गज नेता इस बार संसद के किसी सदन के सदस्य नहीं हैं. साथ ही बीजेपी के राजनीतिक इतिहास में पहली बार है कि संसद में पार्टी की सबसे ज्यादा सदस्यों की संख्या है. इस बैठक में राज्यसभा और लोकसभा के 380 सांसद मौजूद थे.