हिन्दुस्तान को पहचान देने वाले इस व्यक्ति को भुला दिया देश! देखिये कैसे बना था देश की शान

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तिरंगा जो देश की आन, बान और शान है. तिरंगा जो जीत का प्रतीक है, उसे बनाने वाले को कितना जानते हैं आप? नही जानते तो जानेंगे भी क्यों? आखिर उससे क्या फायदा है अब आपका? लेकिन अगर आपने इनके बारे में जानना चाहते हैं तो आइये आज हम आपको बताते हैं. पढ़िए और समझिये कि देश में एक्टर और नेता का जन्मदिन याद रखा जा सकता है लेकिन ततिरंगा जो देश की शान है उसे बनाने वाले को लोग क्यों भूल जाते हैं ?

तिरंगे को पिंगली वेंकैया नामक शख्स ने डिजाइन किया था. आज ही के दिन 2 अगस्त 1876 को उनका जन्म हुआ था. सिर्फ 19 साल की उम्र में पिंगली ब्रिटिश आर्मी में शामिल हो गए. लेकिन उन्हें तो देशसेवा में जाना था. दक्षिण अफ्रीका में पिंगली वेंकैया की मुलाकात महात्मा गांधी से हुई. वो बापू से इतने प्रभावित हुए कि उनके साथ हमेशा के लिए रहने वो भारत लौट आए. पिंगली ने स्वतंत्रता संग्राम में अपना अहम योगदान दिया. लगभग तीस देशों के राष्ट्रीय ध्वज की स्टडी करने के बाद पिंगली ने एक भारतीय ध्वज को तैयार किया. 1916 से लेकर 1921 तक लगातार इस पर रिसर्च ही करते रहे. इसके बाद जो ध्वज उन्होंने तैयार किया था, उसमें लाल रंग हिन्दुओं के लिए, हरा रंग मुस्लिम के लिए और सफ़ेद रंग एनी धर्म के लोगों के लिए रखा गया था. बीच में चरखे को भी जगह दी गयी थी.

1921 में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के विजयवाड़ा अधिवेशन में पिंगली वेंकैया के डिजाइन किए तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के तौर पर मंजूरी दे दी. महात्मा गाँधी ने यंग इंडिया में पिंगली के बारे में लिखा था कि ‘वेंकैया वेंकैया आंध्र प्रदेश के मचिलीपट्टनम नेशनल कॉलेज में काम करते हैं. उन्होंने कई देशों के झंडे का अध्ययन करके भारत के राष्ट्रीय झंडे के कई डिजाइन बनाकर दिए हैं. इसको लेकर उन्होंने एक किताब भी लिखी है. मैं उनके कड़ी मेहनत की प्रशंसा करता हूं.’

पिंगली दबनाये गये झंडे में कई संसोधन किये गये. जैसे, लाल की जगह केसरिया रंग, चरखे की जगह अशोक चक्र को स्थान दिया गया. कुछ लोग ये भी कहते हैं ध्वज में चरखा हटाये जाने पर महात्मा गांधी नाराज हो गये थे. हालाँकि कई संसोधन के बाद इस ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज का स्थान मिल गया था.

अब बात करते हैं पिंगली वेंकैया की, जिनका निधन 1963 में उस वक्त हो गया था जब वे एकझोपड़ी में रहते थे. उसके बाद पिंगली की याद तक को लोगों ने भुला दिया. 2009 में पहली बार पिंगली वेंकैया के नाम पर डाक टिकट जारी हुआ था. इसके बाद लोगों को ये पता चल था कि पिंगली ही थे, जिन्होंने देश को तिरंगा दिया था.