क्या पश्चिम बंगाल में नहीं हो सकते शांतिपूर्वक चुनाव?

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देश का माहौल चुनावी है, और हर तरफ चुनावी सरगर्मियां तेज़ हैं. नेता लगातार जनसभाओं में जुटे हुए हैं, और देश के अलग-अलग हिस्सों में बसे लोग मतदान के दिन अपने घरों को लौट रहे हैं. देश के कुछ राज्यों में मतदान हो चुके हैं और कुछ में बाकी हैं.

फिलहाल लोकसभा चुनाव में चौथे चरण के मतदान चल रहे हैं. इसी क्रम में आज पश्चिम बंगाल की 8 लोकसभा सीटों के लिए मतदान हो रहा है. पिछले तीन चरणों की तर्ज़ पर ही चौथे चरण के चुनाव भी शर्मसार हुए हैं. एक बार फिर से हिंसा हुई है. और एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी के नेता पर हमला हुआ है.

चुनाव की नज़र से देखें तो ये एक संवेदनशील इलाका है. चुनाव के दौरान मतदान केन्द्रों पर हिंसा यहाँ आम बात है. शांतिपूर्ण चुनाव होना यहाँ के लिए दिन में सपना देखने जैसा है. इतना वक़्त बीत गया लेकिन पश्चिम बंगाल के चुनावी हालातों में आज तक बदलाव होता नज़र नहीं आता.

हिंसा से यहाँ का इतिहास जुड़ा हुआ है. यहाँ जब भी चुनाव होते हैं तब कहीं ना कहीं से हिंसा की खबरें आ ही जाती हैं. आज भी यहाँ सुबह से ऐसा ही माहौल बना हुआ है. सुबह से अभी तक पश्चिम बंगाल के असनसोल से हमें दो खबरें मिल चुकी हैं जो यहाँ के माहौल में फ़ैली अराजकता की कहानी कहती हैं.

पश्चिम बंगाल के असनसोल में आज सुबह सुरक्षा बालों और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई. झड़प के बाद तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता हिंसा पर उतारू हो गए. माहौल को बिगड़ता देखकर सुरक्षा बालों को लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा.

घटना असनसोल के 125-129 की है. मिली जानकारी के मुताबिक़ जेमुआ में केंद्र पर केन्द्रीय बल मौजूद नहीं थे. तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता सुरक्षाबलों की गैरमौजूदगी में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता मतदान के लिए जोर देने लगे.

ऐसा होता देख भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया. असहमति इतनी बढ़ गई कि तृणमूल कांग्रेस और Quick Reaction Force के बीच झड़प हो गई. विवाद और हिंसा यहाँ तक बढ़ चुकी थी कि महिलायें तक हाथों में लाठी-डंडे लेकर उपद्रवियों में शामिल थीं. आखिर में नतीजा ये हुआ कि सुरक्षाबालों को उपद्रवियों पर लाठीचार्ज करना पड़ा.

इसके अलावा चुनाव के दौरान ही हिंसा की एक और घटना भी घटी. इस घटना को भी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने ही अंजाम दिया. और ये घटना है असनसोल से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार और केन्द्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो की कार पर हमले की.

तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने सुरक्षाबलों पर हमला किया और भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार बाबुल सुप्रियो की कार पर हमला कर दिया. इस हमले में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बाबुल सुप्रियो की कार का कांच तक फोड़ दिया.

केन्द्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के खिलाफ साफ़ तौर पर कहा कि मतदान प्रक्रिया को गंभीर रूप से प्रन्हावित किया जा रहा है.

उन्होंने यह भी कहा कि,

मैं खुद को केंद्रीय सुरक्षा बलों को मतदान केंद्रों तक ले जाऊंगा. यह अच्छी बात है कि पश्चिम बंगाल के लोगों को अच्छी तरह से पता है कि क्या सही है. लोग खुद वोट देना चाहते हैं और यही वजह है कि ममता बनर्जी डरी हुई हैं.

अपनी बात में उन्होंने आगे जोड़ा कि

टीएमसी के पास सिर्फ एक ही तरीका है जिससे वो चुनाव जीत सकती है, वो है वोट लूट. जहांजहां मैं जाऊंगा वहांवहां ज्यादा हिंसा की जाएगी.”

उन्होंने ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर साफ़ तौर पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये दोनों मिलकर मतदान नहीं होने दे रहे हैं. यहाँ का माहौल फिलहाल काफी गर्म है, और निश्चित तौर पर इससे मतदान प्रभावित हुआ ही है.

लेकिन इस तरह की घटनाएं होने के बाद अपने पीछे बहुत से सवाल छोड़ रही हैं. भारत जो खुद को सबसे बड़ा लोकतंत्र कहता है, इसके ही एक हिस्से में चुनाव के दौरान इस तरह की घटनाएं क्या कहती हैं?

क्या ये किसी एक राजनीतिक दल की तानाशाही नहीं है? क्या ये घटनाएं नहीं दिखीतीं कि चुनाव जीतने के लिए राजनीतिक दल किस हद तक जा सकते हैं? और सबसे आखिरी और अहम सवाल कि क्या इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने वाले राजनीतिक दलों को जनता की तरफ से चुना जाना चाहिए?