कतारपुर बॉर्डर खुलने से पहले पाकिस्तान की नीच हरकत, लगाया “जजिया टैक्स”

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कतारपुर बॉर्डर को लेकर पाकिस्तान समय समय पर पलटी मारता रहता है. जल्द ही कतारपुर बॉर्डर के जरिये श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पाकिस्तान जायेंगे.. लेकिन पाकिस्तान ने अब यहाँ एक चाल चली है.

गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर शुरू हो रहे करतारपुर कॉरिडोर का काम तेजी से चल रहा है। इस प्रॉजेक्ट पर काम करने वाली सरकारी एजेंसी लैंड पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष गोविंद मोहन के मुताबिक प्रॉजेक्ट का काम हर हाल में 31 अक्टूबर तक पूरा कर लिया जाएगा। 20 अक्टूबर से पाकिस्तान स्थित करतारपुर साहिब जाने के लिए तीर्थयात्री ऑनलाइन अप्लाई कर सकेंगे.. एप्प्लाई करने के लिए वेबसाइट बनायी जायेगी.. प्रधानमंत्री मोदी 8 नवंबर को इस कोरिडोर का उदघाटन करने वाले हैं लेकिन अब पाकिस्तान की एक हरकत सामने आई है दरअसल करतारपुर कॉरिडोर से गुजरने वाले प्रत्येक भारतीय श्रद्धालु से पाकिस्तान द्वारा 20 डॉलर का सेवा शुल्क लिया जाएगा. बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने कहा कि वह उन्हीं श्रद्धालुओं को मत्था टेकने देगी जो 1500 रुपये का भुगतान करेंगे, बिना पैसे दिए श्रद्धालु दर्शन नहीं कर पाएंगे. पजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने पाकिस्तान द्वारा वसूली जा रही 20 डॉलर प्रति यात्री की एंट्री फीस को ‘जजिया टैक्स’ करार दिया है साथ ही मांग की है कि इस फीस को कम किया जाए ये मांग की है.

सवाल ये है कि आखिरकार पाकिस्तान इतनी रकम वसूल क्यो रहा है? दरअसल भारत से करतापुर जाने वाले श्रद्धालुओं को सीमा पर एक स्लिप जारी की जाएगी, जिसकी फीस 20 डॉलर यानी करीब 1500 रुपए तय की गई है. भारत के विरोध के बावजूद पाकिस्तान ने इतनी ज्यादा फीस तय की है. भारत ने इसका विरोध किया था जब पाकिस्तान ने मानने से इंकार कर दिया. आपको बता दें कि भारत फ्री में दर्शन की मांग करता आया है लेकिन इमरान खान की सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह 20 डालर की रकम दिए बिना श्रद्धालुओं को मत्था नहीं टेकने देगी. वैसे अगर देखा जाए तो हर दिन 5000 यात्री जाएंगे यानी पाकिस्तान को हर दिन 75 लाख रुपए की कमाई होगी.. इसे ही जजिया टैक्स का नाम दिया गया है.. वैसे भी पाकिस्तान में आर्थिक तंगी चल रही है. ऐसे में कमाने का ये बढ़िया जरिया निकाला है इमरान खान ने.. लेकिन दर्शन के नाम पर उगाही करके?


खैर इस जजिया टैक्स क्यों कहा जा रहा है इसके इतिहास में पर भी थोडा नजर डालते हैं. दरअसल भारत में मुगल साम्राज्य के दौरान जजिया कर की शुरुआत हुई थी. तब गैर-मुस्लिम देशों से यह टैक्स वसूला जाता था. आज से करीब 450 साल पहले मुगल शासक अकबर ने जजिया कर को खत्म कर दिया था. यह कर गैर मुस्लिम नागरिकों से लिया जाता था. जो जानकारी मिलती है उसके मुताबिक़ पाकिस्तान के कुछ हिस्सा में अब भी यह टैक्स वसूला जा रहा है. खासतौर पर पाकिस्तान की अफगान सीमा पर सिखों से जजिया कर वसूला जा रहा है.

डेराबाबा नानक साहिब से पाकिस्तान जाने के लिए भारत की ओर से रावी नदी पर आधा ब्रिज बनकर तैयार हो गया है. लेकिन, पाकिस्तान ने अभी तक अपनी तरफ से इसका निर्माण तक शुरू नहीं किया है. जानकारी के मुताबिक ऐसे में 300 मीटर के एक रैंप की व्यवस्था की गई है. यह रैंप पैसेंजर टर्मिनल कैंपस से पाकिस्तान बॉर्डर तक जाएगा. खैर देखना है कि कब तक पाकिस्तान दर्शन करने जा रहे लोगों से ये जजिया टैक्स वसूलता है.