पाकिस्तान की जेब में नहीं पैसे और ध’मकी युद्ध की

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कश्मीर के पुनर्गठन और धारा 370 हटाने के बाद पाकिस्तान बुरी तरह से बौखालाया हुआ है . उसकी बौखलाहट का अंदाजा इससे लगता है कि कंगाली और दीवालिया होने के कगार पर खड़ा पाकिस्तान अब युद्ध की धमकी देने लगा है . ये धमकी पाकिस्तान के एक मंत्री ने दी है और वो भी ट्वीट के जरिये . पाकिस्तान के मंत्री चौधरी  फवाद हुसैन ने ट्वीट किया – “मोदी सरकार कश्मीर की आबादी में बदलाव करके कश्मीर को एक  और फिलिस्तीन बनाने की कोशिश कर रही है, सांसदों को छोटे मुद्दों पर लड़ना बंद करना चाहिए, भारत को खून, आँसू, और पसीने से जवाब देना चाहिए, हमें युद्ध लड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए.”

दुनिया भर के देशों और वर्ल्ड बैंक के कर्जों तले दबा पाकिस्तान अभी कुछ दिनों पहले तक अपने संसद में रोटी और नान की कीमतें तय कर रहा था ताकि फिजूल खर्ची से बचा जा सके . एक साल पहले तक भैंसें बेच कर कर्ज चुकाने की कोशिशें की जा रही थी .. लेकिन भैंसे बेच कर तो किसानों के कर्जे भी नहीं चुकते, पुरे मुल्क का कर्जा कैसे चुका पाता पाकिस्तान . फवाद साहब ट्विटर पर बैठ कर युद्ध की धमकी दे रहे हैं जबकि उनके वजीरे आजम अमीर देशों के राष्ट्राध्यक्षों को खुश करने के लिए उनके ड्राईवर तक बन रहे हैं .

पाकिस्तान के कंगाली का आलम ये है कि उसकी जीडीपी की तुलना में कर्ज पिछले साल 2018 की चौथी तिमाही (अक्टूबर-नवंबर-दिसंबर 2018 ) में बढ़कर 75.1 फीसदी पहुंच गया . 2017 में ये 67 फीसदी था .. पाकिस्तान का चालू खाता घाटा तेजी से बढ़ रहा है. इसीलिए वो बेलआउट पैकेज के लिए आईएमएफ की तरफ देख रहा है . आईएमएफ अब तक पाकिस्तान को 12 बेल आउट पॅकेज दे चूका है लेकिन फिर भी उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं आया . अब सरकार के पास एक ही विकल्प है या तो लोगों पर टैक्स का बोझ बढाए या भुगतान संतुलन की समस्या से जूझे . लेकिन इससे उसकी अर्थव्यवस्था क्रैश हो सकती है. लेकिन फिर भी पकिस्तान के मंत्री ट्विटर पर बैठ कर युद्ध की धमकियाँ दे रहे हैं . हमारे यहाँ एक कहावत है – घर में नहीं दाने और अम्मा चली भुनाने . वही हाल पाकिस्तान का है . घर में खाने को दाने नहीं और बातें युद्ध की .

पिछले महीने जब इमराना खान अमेरिका के दौरे पर गए थे तो उन्होंने डोनाल्ड ट्रम्प से कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता करने को कहा था और जोश में आ कर ट्रम्प ने भी ऐसा बयान दे दिया जिसपर उनके ही देश में उनकी किरकिरी हो गई थी और अमेरिका के विदेश मंत्रालय को भारत को सफाई देनी पड़ी थी . भारत और पाकिस्तान की स्थिति में तुलना करें तो शायद ही कोई बड़ा देश होगा जो पाकिस्तान जैसे असफल राष्ट्र के साथ खड़ा हो कर दिखना चाहे . अगले साल अमेरिका में चुनाव होने हैं और अमेरिका की विदेश निति बुरोक्रेट्स तय करते हैं . आशंका जताई जा रही है कि अगला चुनाव ट्रम्प हार जायेंगे ऐसे में ब्यूरोक्रेट्स नहीं चाहेगा कि जाते जाते ट्रम्प की वजह से भारत और अमेरिका के रिश्ते बिगड़े . कश्मीर पर मध्यस्थता वाले ट्रम्प के बयान के बाद जिस तरह से व्हाइट हाउस को बैकफुट पर आ कर सफाई देनी पड़ी और सीनेटर ने ट्रम्प के दावों को झुठलाया उससे अमेरिका में ही ट्रम्प के दावे पर सवाल खड़े हो गए .अमेरिका जानता है कि भारत उसके लिए कितना महत्वपूर्ण है इसलिए अगर पाकिस्तान और भारत में से किसी एक को चुनना पड़े तो दवाब दवाब में अमेरिका किसके साथ खड़ा होगा ये समझना ज्यादा मुश्किल नहीं है .

धारा 370 के मुद्दे पर खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ओने ही देस्ग में सवालों के घेरे में हैं . पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज ने इमरान खान को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि , ‘अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कश्मीर के मुद्दे पर मध्यस्थता की बात करके इमरान खान को मूर्ख बनाया और यह अनुमान नहीं लगा पाए कि भारत क्या योजना बना रहा है.’

तो कुल स्थिति ये है कि इमरान खान को अपने मंत्रियों के जुबान पर लगाम रखना चाहिए क्योंकि अब भारत कीई सरकार क्या कर सकती है ये वो समझ ही गए होंगे.