पाकिस्तान में हुए तख्तापलट में आखिर बटालियन 111 ही मुख्य भूमिका में क्यों रहती है?

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान जब से अमेरिका से वापस आये हैं तब से उनपर कई तरह के खतरे मंडरा रहे हैं. दरअसल माना जा रहा है कि पाकिस्तान की सेना, आम लोग और विपक्षी दल के नेता.. यहाँ तक कि उनकी ही पार्टी के कई नेता इमरान खान से खुश नही है.. तो क्या अब इमरान खान की छुट्टी हो जायेगी.. क्या वे वापस पवेलियन लौट जायेंगे?

  कई मीडिया संस्थानों से मिली खबर के मुताबिक पाकिस्तान में जल्द तख्तापलट हो सकता है. मलतब इमरान खान को कुर्सी से धकेल कर खुद सेना प्रमुख बाजवा कुर्सी पर बैठ सकते हैं. ऐसा बस ऐसे ही नही कहा जा रहा है बल्कि पाकिस्तान में जो इस समय घटनाक्रम हो रहे हैं उसको देखते हुए बस अंदाजा लगाया जा रहा है. घटनाक्रम क्या है आपको बताते हैं.. सबसे बड़ी बात ये है कि पाकिस्‍तान के आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा ने फौज की 111 ब्रिगेड की छुट्टियां रद्द कर दी है. दूसरी- जनरल बाजवा ने पाकिस्तान के बड़े कारोबारियों के साथ गुप्त बैठक की है मतलब जो खबर मिल रही है उसके मुताबिक़ इमरान खान को इस बैठक के बारे में कोई जानकारी नही थी. दरअसल इतिहास इस बात का गवाह है कि जब जब पाकिस्तान में तख्तापलट की राह अपनाई गयी है तब तब इस ब्रिगेड का इस्तेमाल सैन्य तख्तापलट में किया गया है, इसलिए इसे तख्तापलट ब्रिगेड भी कहते हैं, पाकिस्तानी सेना की 111 ब्रिगेड रावलपिंडी में तैनात रहती है. इस ब्रिगेड का इस्तेमाल पहली बार 1958 में हुआ था जब तत्कालीन सेना प्रमुख आयूब खान ने तत्कालीन राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्ज़ा को उनके पद से हटा दिया था और सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया था. इसके बाद आयूब खान नौ साल तक सत्ता में बैठा रहा. इस दौरान भारत के हाथों पाकिस्तान की करारी हार से अयूब खान की सत्ता पर पकड़ कमजोर होने लगी और 1969 में जनरल याह्या खान ने उन्हें हुकूमत से बेदखल करके पाकिस्तान की बागडोर अपने हाथों में ले ली.. लेकिन याहया खान एक शासनकाल में ही बांग्लादेश का जन्म हुआ.. इसके बाद पकिस्तान में लोकशाही वापस आई. जूल्फीकार अली भुट्टो चुनकर प्रधानमंत्री बने.. और उन्होंने जियाऊल हक़ को सेना प्रमुख बना दिया. जिया उल हक ने 1978 में भुट्टो का तख्तापलट करके खुद ही पाकिस्तान की कमान संभाल ली. साल भर बाद ही भुट्टो को फांसी पर लटका दिया गया. इसके बाद 1988 तक.. जब तक जियाऊल हक़ मर नही गया.. सेना का ही शासन चलता रहा. पाकिस्तान लड़खड़ाता रहा. इसके बाद 1999 में फिर तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को बेदखल करके आर्मी चीफ परवेज मुशर्रफ ने सत्ता हथिया ली. आज अन्वाज शरीफ जेल में हैं. मलतब 1969, 1977 और 1999 में सेना ने तख्तापलट किया था तब भी इसी ब्रिगेड का का इस्तेमाल किया गया था. ऐसा इसलिए क्योंकि ये सेना इस्लामाबाद से मात्र 21 किमी की दूरी पर तैनात रहती है और बहुत कम समय में ये इस्लामाबाद पर कब्जा कर लेती है.

पाकिस्तान की सेना ही पाकिस्तान की सरकार चलाती है.. ऐसा आपने बहुत सुना होगा.. कई लोगों से सुना होगा लेकिन कैसे …आज हम आपको बताते हैं..

दरअसल पाकिस्तानी सेना द्वारा पाकिस्तान में कई बड़ी बड़ी कंपनियाँ चलाई जाती है. एक आकडे के अनुसार 2016 में पाकिस्तान में सेना के पास 1 लाख 42 हज़ार करोड़ रुपये का कारोबार था..जो 2019 में बढ़कर 7 लाख करोड़ रुपये का हो गया.. मतलब पाकिस्तानी सेना के तो क्या कहने? दरअसल पाकिस्तानी सेना अलग अलग प्रोजेक्ट के अलग-अलग संस्थान बनाकर व्यापार करती है. इसके नाम भी अलग-अलग हैं. फौजी फाउंडेशन, शाहीन फाउंडेशन, बहरिया फाउंडेशन, Army Welfare Trust और Defence Housing Authorities. आपको जानकर हैरानी होगी की इस सभी संस्थाओं की कमान पाकिस्तानी सेना के बड़े अफसर के हाथ में होती है. वो इससे मोटा पैसा कमाते हैं.

पाकिस्तानी सेना के पास पाकिस्तान की 12 फीसद जमीन है और सैन्य अफसरों को कौड़ियों के भाव ज़मीनें दे भी दी जाती हैं. जिसे अधिकारी बाजार के भाव में बेंचते हैं. पाकिस्तान की सेना CornFlakes, अनाज, आटा, शहद, चॉकलेट और कस्टर्ड पाउडर तक बनाती है. पाकिस्तान की सेना Employment Exchange भी चलाती है और सीमेंट भी बेचती है. कई पेट्रोलियम कम्पनियों की भी मालिक खुद पाकिस्तानी सेना ही है. पाकिस्तानी सेना अपना एक बैंक भी चलाती है, जिसे अस्कारी बैंक कहा जाता है. अब जब पाकिस्तानी सेना के पास इतने बड़े पैमाने पर कारोबार है.. पैसा है.. कारोबारियों के साथ अच्छे रिश्ते हैं.. ताकत तो है ही.. तो कभी वो प्रधानमंत्री को उठाकर कुर्सी से नीचे फेंक सकती है.. जिसे हम तख्तापलट कहते हैं. दरअसल जैसी ही सरकार किसी मुद्दे पर कमजोर पड़ती है तो इसी का फायदा पाकिस्तानी सेना उठाती है..

 दरअसल पाकिस्तान में ऐसा कहा जा रहा है कि इमरान खान कश्मीर मुद्दे को उतना जोर से नही उठा पाए जितना कि पाकिस्तानियों ने उम्मीद की थी. इतना ही नही, कश्मीर का मुद्दा उठाते उठाते इमरान खाने ने ये भी स्वीकार कर लिया कि पिछली सरकारें आतंकवाद को बढ़ावा देती थी, इससे पाकिस्तानी सेना भी घेरे में आ गयी.. पाकिस्तान की हालत ख़राब है लेकिन इमरान तो अमेरिका को आंखे दिखाकर आये हैं.. ऐसे में पाकिस्तान की सेना इमरान खान से नाराज है..और ऐसा कहा जा रहा है कि तख्तापलट की तैयारी हो रही है. खबर तो ये भी मिल रही है कि अगर तख्तापलट नही हुआ तो इमरान खान की सरकार गिर जायेगी.. इमरान खान के नेता ही बगावत कर सकते हैं.

 इमरान खान और उनके मंत्रियों पर झूठ बोलने का भी आरोप लग रहा है. दरअसल पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी एक इंटरव्यू के दौरान भड़क गये थे.. उनसे सवाल पुछा गया था कि जो उन्होंने ट्वीट किया था कि 50 देश कश्मीर मुद्दे पर उनके साथ खड़े हैं तो वे 50 देश कौन से हैं? इस पर विदेश मंत्री कुरैशी साहब इतने आगबबूला हो गये कि पत्रकार को डांटने लगे.. हालाँकि उनके प्रधानमंत्री मलतब इमरान खान ने ट्वीट किया था कि हमें 58 देशों का समर्थन मिल गया है.. लेकिन ये 58 देश कौन हैं ये आज तक पता नही चला!

खैर कश्मीर में तख्तापलट होगा या नही होगा! ये तो आने वाले वक्त में पता चलेगा लेकिन स्थिति तो कुछ इसी तरफ इशारा कर रही है. कश्मीर के चक्कर में इमरान खान अब अपनी कुर्सी तक गवां सकते हैं.