1 लाख से ज्यादा फतवे जारी कर चुके दारुल उलूम देवबंद का एक और अजीब फतवा

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सहारनपुर के देवबंद का इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद अपने एक फतवे को लेकर फिर से चर्चा में है. संस्थान की तरफ से ईद पर एक ऐसा फतवा जारी कर दिया गया है जो लोगों के गले से नीचे नहीं उतर रहा. ईद के मौके पर लोगों की जुबां से लेकर सोशल मीडिया तक दारुल उलूम देवबंद के इस फतवे के ही चर्चे हैं.

ये बात कौन नहीं जानता कि दारुल उलूम देवबंद और फतवों का रिश्ता कितना पुराना है. बहुत से अजीबो-गरीब फतवे हैं जो इसी इस्लामिक शिक्षण संस्थान की देन हैं. यही वज़ह है कि यह इस्लामिक शिक्षण संस्थान पूरे विश्व में अपने फतवों के लिए मशहूर हो गया है.

संस्थान की तरफ से बहुत सी चीजों को और बहुत से कामों को इस्लाम में हराम बताया जा चुका है. वो सबकुछ जिसको संस्थान की तरफ से हराम बताया गया है उसमें बहुत कुछ ऐसा भी है जो हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा है.

संस्थान ने कभी महिलाओं के नेलपॉलिश लगाने को हराम बताया, तो कभी उनके गैर मर्द से चूड़ियाँ पहनने को. इसने कभी सोशल मीडिया पर फोटो डालने को हराम कहा तो कभी मुस्लिम महिलाओं के अनजान मर्द से मेहंदी लगवाने को.

यहाँ कभी महिलाओं द्वारा फुटबॉल मैच देखने को हराम कहा तो कभी टाइट बुर्का पहनने को. इतना ही नहीं संस्थान की तरफ से सीसीटीवी कैमरा लगवाने और जीवन बीमा करवाने तक को हराम बताया जा चुका है.

अगर आपको ये सब कम लग रहा हो तो आइये आपको बताते हैं दारुल उलूम देवबंद के हालिया फतवे के बारे में. संस्थान ने ईद के लिए जारी किये गए अपने फतवे में ईद पर गले लगने को इस्लाम की नज़र से अच्छा नहीं करार दिया है.

पाकिस्तान के एक शख्स ने संस्थान से सवाल किया कि कोई जो हमसे गले मिलने की कोशिश करे तो क्या हमें उससे गले मिलना चाहिए?

उस शख्स के सवाल पर दारुल उलूम देवबंद के मुफ्तियों की तरफ से ये जवाब दिया गया कि ऐसी कोशिश करने वाले को नरमी के साथ मना कर दिया जाना चाहिए. अगर किसी से बहुत अरसे बाद मुलाक़ात हो रही है तो उसको गले लगाया जा सकता है.

ईद के मौके पर गले मिलने को लेकर इस तरह के फतवे की वज़ह से दारुल उलूम देवबंद फिर से विवादों में छा गया है. सोशल मीडिया पर दारुल उलूम देवबंद के इस फतवे को जमकर अलग-अलग कैप्शन के साथ शेयर किया जा रहा है. 

हमारी रोजमर्रा की ज़िंदगी में शामिल ऐसी ही बहुत सी चीजों और बातों को हराम बताने के चलते बहुत बार इस संस्थान की आलोचना की जा चुकी है, और इसके फतवों पर सवाल उठाये जा चुके हैं. लेकिन कुछ भी हो आलोचना के साथ-साथ इन फतवों ने संस्थान को देश-दुनिया में मशहूर भी काफी किया है.

साल 2005 में दारुल उलूम देवबंद का ऑनलाइन विभाग बनाया गया था. ये ऑनलाइन विभाग इसलिए था ताकि देश विदेश में बैठे लोग संस्थान से जुड़ सकें और सवालजवाब कर सकें. कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो 2005 से लेकर 2018 तक दारुल उलूम देवबंद ने करीब एक लाख से ज्यादा ऑनलाइन फतवे जारी कर दिए हैं.

इन सभी फतवों में से ख़ास-ख़ास फतवों को संस्थान की वेबसाइट पर भी अपलोड किया जाता है. एक रिपोर्ट की माने तो साल 2018 तक करीब 35 हज़ार फतवों को उर्दू में और 9 हज़ार को इंग्लिश में दारुल उलूम की वेबसाइट पर अपलोड किया जा चुका है.

दारुल उलूम देवबंद की तरफ से जारी किये गए इस तरह के फतवों पर क्या कोई अमल करता होगा ये एक बड़ा सवाल है, लेकिन इससे भी बड़ा सवाल ये है कि एक शिक्षण संस्थान की तरफ से इस तरह के फतवे जारी किस आधार पर किये जाते हैं?

देखिये हमारा वीडियो: