BBC का नया प्रोपगैंडा, कर रहा है विदेशों से भारतीयों को भगाने की बात

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अवैध घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने वाले NRC बिल को लेकर उन लोगों में खलबली मची हुई है जिन्होंने सालों तक in घुसपैठियों के दम पर सत्ता की मलाई खाई है और साथ ही दर्द उन्हें भी हो रहा है जिन्हें देश के घरेलू मामलों में हस्तक्षेप करने का चस्का लग चूका है. ऐसे ही एक पत्रकार हैं पाकिस्तान के वुसतुल्ला खान . ये पत्रकार बीबीसी के लिए आर्टिकल लिखते हैं.

इन्होने बॉर्डर के तारों को फांद कर देश में घुस आये अवैध घुसपैठियों की तुलना पासपोर्ट और वीजाधारी उन अप्रवासी भारतियों से कर दी जो दुनिया के कई देशों में रहते हैं . और साथ ये सवाल उठाये की अगर दुनिया भर के देश अपने यहाँ से भारतियों को भगा दें तो गृहमंत्री अमित शाह क्या करेंगे?

सबसे पहले तो वुसतुल्ला की बुद्धि को सलाम कि उन्होंने वीजा और पासपोर्ट लेकर वैध रूप से किसी देश में रह रहे भारतीयों की तुलना बिना कागज़ और दस्तावेजों के रात के अँधेरे में बॉर्डर के तारों को लांघ कर देश में घुस आये बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों से की. वुसतुल्लाह NRC बिल के लिए गृहमंत्री अमित शाह की तुलना युगांडा के तानाशाह से की जिसने अपने देश से एशियाई मूल के लोगों को भगा दिया था.

वुसतुल्ला जिक्र करते हैं 1971-72 का , तब युगांडा के तानाशाह ईदी अमीन ने 80,000 से ज़्यादा एशियाई मूल के लोगों को 80 दिनों के अंदर देश छोड़ने का हुक्म दे दिया था। वुसतुल्ला भारत को अहसास दिलवाना चाहते हैं कि कैसे लगता है अगर एक ही झटके में लाखों लोगों को बेघर कर दिया जाए, ….. तो वुसतुल्ला साहब, बेघर तो घर से हुआ जाता है .. जो देश आपका घर है ही नहीं .. जब आप चोरी छुपे किसी के घर में घुस आये और अधिकार ज़माने लगे तो उसे अपना घर नहीं कहते …

आप कहते हैं कि क्या करेंगे अमित शाह जब दुनिया के देश भारत के लोगों को अपने यहाँ से भगा देंगे? दुनिया के देश किस भारतीय को भगायेंगे अपने देश से? गूगल के सीईओ से लेकर माइक्रोसोफ्ट के सीईओ तक भारतीय मूल के हैं, भारतीय मूल के क्षात्र US की GDP में 3.6 billion डॉलर्स का योगदान देते हैं. UK में भारतीय लोगों की कुल तादाद वहां की पूरी आबादी का सिर्फ 1.6 % है फिर भी वो वहां की जीडीपी पे 6 % का योगदान देते हैं.

वो सब किसी देश के बॉर्डर के तारों को फांद कर वहां नहीं गए… भारतीय जहाँ भी गए, चाहे वो किसी कंपनी के सीईओ हों , या डॉक्टर, इंजिनियर, या फिर मजदुर ही क्यों ना हों, उन्होंने वहां के अर्थव्यवस्था में अपना योगदान दिया है .. लेकिन अवैध घुसपैठिये किसी देश के लिए एक बोझ से ज्यादा कुछ नहीं होते … एक बार फिर आपकी बुद्धि को सलाम कि आपने वीजा और पासपोर्ट के दम पर दुनिया भर के देशों में अपनी मेहनत के दम पर पहचान बनाने वाले प्रवासी भारतियों की तुलना उन घुसपैठियों से की जो अपने देश की भुखमरी. लाचारी को छोड़ कर अवैध रूप से देश में घुस आयें हैं .