आपातकाल को हो गए 44 साल

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क   रीब 44 साल पहले….इसी महीने के 25 तारीख को देश में पहली बार इमरजेंसी लगाई गयी थी….जिसे भारतीय राजनीति के इतिहास का काला अध्याय भी कहा जाता है… 25 जून 1975 की आधी रात को आपातकाल की घोषणा की गई, जो की 21 मार्च 1977 तक लगी रही….. उस दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार की सिफारिश पर भारतीय संविधान की. धारा 352 के अधीन देश में आपातकाल की घोषणा की थी….

वैसे आपको बता दें कि आखिर आपातकाल होता क्या है?

आपातकाल भारतीय संविधान में एक ऐसा प्रावधान है, जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है, जब देश को किसी आंतरिक, बाहरी या आर्थिक रूप से किसी तरह के खतरे की आशंका होती है….

वैसे आपके ज़हन में भी यह सवाल आता होगा कि आखिर इस आपातकाल कि ज़रुरत तो क्यों है?

तो बात कुछ ऐसी है कि संविधान निर्माताओं ने आपातकाल जैसी स्थिति की कल्पना ऐसे वक्त को ध्यान में रखकर की थी, जिसमें देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा खतरे में हो….. इसी को ध्यान में रखकर कुछ ऐसे प्रावधान बनाए गए, जिसके तहत केंद्र सरकार बिना किसी रोक टोक के गंभीर फैसले ले सके….

वैसे आपको बता दें कि आपातकाल 3 तरह के होते है –

  1. राष्ट्रीय आपातकाल (नेशनल इमरजेंसी)
  2. राष्ट्रपति शासन (स्टेट इमरजेंसी)
  3. आर्थिक आपातकाल (इकनॉमिक इमरजेंसी)

नेशनल इमरजेंसी

संविधान के अनुच्छेद 352 देश में नेशनल इमरजेंसी का ऐलान विकट परिस्थितियों` में किया जा सकता है….. इसका ऐलान युद्ध, बाहरी आक्रमण और राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर किया जा सकता है…

राष्ट्रपति शासन या स्टेट इमरजेंसी

संविधान के अनुच्छेद 356 के अधीन राज्य में राजनीतिक संकट को देखते हुए संबंधित राज्य में राष्ट्रपति आपात स्थिति का ऐलान कर सकते हैं….. जब किसी राज्य की राजनीतिक और संवैधानिक व्यवस्था फेल हो जाती है या राज्य, केंद्र की कार्यपालिका के किन्हीं निर्देशों का अनुपालन करने में असमर्थ हो जाता है, तो इस स्थिति में ही राष्ट्रपति शासन लागू होता है…..

आर्थिक आपात

वैसे तो देश में अब तक आर्थिक आपातकाल लागू नहीं हुआ है….लेकिन संविधान में इसे अच्छी तरह से परिभाषित किया गया है…. अनुच्छेद 360 के तहत आर्थिक आपात की घोषणा राष्ट्रपति उस वक्त कर सकते हैं, जब उन्हें लगे कि देश में ऐसा आर्थिक संकट बना हुआ है, जिसके कारण भारत के वित्तीय स्थायित्व या साख को खतरा है….

वैसे 1975 के जिस इमरजेंसी कि बात हम कर रहे है वो है नेशनल इमरजेंसी मतलब कि राष्ट्रिय आपातकाल…

स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह सबसे विवादित काल मना जाता है… आपातकाल के दौरान  चुनाव स्थगित हो गए थे… यू तो आपातकाल 25 जून को को लगाया गया था… लेकिन इसकी खबर लोगों में अगले सुबह यानी 26 जून को रेडियो पर इंदिरा गांधी की आवाज में पता लगा… आपातकाल के पीछे कई वजहें बताई जाती है, जिसमें सबसे अहम है 12 जून 1975 को इलाहबाद हाईकोर्ट की ओर से इंदिरा गांधी के खिलाफ दिया गया फैसला….

तो बात दरअसल यह थी कि राज नारायण इंदिरा गांधी के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट चले गए….. संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर इंदिरा गांधी के सामने रायबरेली लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ने वाले राजनारायण ने अपनी याचिका में इंदिरा गाँधी पर यह आरोप लगाया था कि इंदिरा गांधी ने चुनाव जीतने के लिए गलत तरीकों का इस्तेमाल किया है……इस मामले में कोर्ट का फैसला 12 जून, 1975 को आया.. और वह राजनारायण के पक्ष में था…

दरअसल राज नारायण ने 1971 में रायबरेली में इंदिरा गांधी के हाथों हारने के बाद मामला दाखिल कराया था……और जस्टिस जगमोहनलाल सिन्हा ने इंदिरा गाँधी को फैसला सुनाया था…. हालांकि 24 जून 1975 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश बरकरार रखा, लेकिन इंदिरा को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बने रहने की इजाजत दी…… एक दिन बाद जयप्रकाश नारायण ने इंदिरा के इस्तीफा देने  कि मांग की थी… और इस्तीफा ना देने पर  देश भर में रोज प्रदर्शन भी होने लगे थे …… और देश भर में हड़तालें चल रही…

ऐसा कहा जाता है कि गृह मंत्रालय के  संयुक्त सचिव प्रेम प्रकाश नैयर ने देहरादून में उत्तरप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से मुलाकात की थी और उनसे कहा था कि संभव हो तो इस फैसले को टाल दिया जाए, कम से कम प्रधानमंत्री के पहले से निर्धारित विदेश दौरे के पूरा होने तक…और फिर  चीफ जस्टिस ने यह अनुरोध इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा तक पहुंचा दिया…. क्योंकि सिन्हा ने ही इस मामले की सुनवाई की थी और फैसला सुनाने वाले थे….. लेकिन जज साहब काफी इमानदार थे और उनकी छवि भी काफी दाग साफ़ थी… जज साहब उस सिफारिश  से इतना नाराज हुए कि उन्होंने तुरंत कोर्ट के रजिस्ट्रार को फोन घुमाया और कहा कि वह घोषित कर दें कि 12 जून को फैसला सुनाया जाएगा….. 8 जून को होने जा रहे गुजरात विधानसभा के इलेक्शन से पहले ही फैसला न सुना कर सिन्हा पहले ही  कांग्रेस पार्टी को एक रियायत दे चुके थे…

और फिर 12 जून को जब फैसले की  बात आई तब याचिका स्वीकार करते हुए यह इंदिरा गाँधी को 6 साल के लिए उनके निर्वाचित पद से निष्काषित करने का आदेश दिया था….और उनपर उन्हें दो भ्रष्ट आचरणों का  भी दोषी ठहराया था….

वहीँ इंदिरा गाँधी भी आसानी से सिंहासन खाली करने के मूड में नहीं थीं….. संजय गांधी कतई नहीं चाहते थे कि उनकी मां के हाथ से सत्ता जाए…. और वह प्रधानमंत्री पद छोड़े…. वहीँ उधर विपक्ष सरकार पर लगातार दबाव बना रहा था… सिंघासन खली करने के लिए… और इसी बीच अपने पद और सत्ता के खातिर इंदिरा गाँधी ने अपने ताकतों का इस्तेमाल कर के देश में आपातकाल कि घोषणा कर दी थी..

आपातकाल में जय प्रकाश नारायण की अगुवाई में पूरा विपक्ष एकजुट हो गया था …….पूरे देश में इंदिरा गाँधी के खिलाफ आंदोलन छिड़ गया था….. सरकारी मशीनरी विपक्ष के आंदोलन को कुचलने में लग गई थी….. अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुलायम सिंह यादव समेत विपक्ष के तमाम नेता जेल भेज दिए गए थे…. संजय गांधी की मनमानियां सीमा पार कर गई थीं. उनके इशारे पर न जाने कितने पुरुषों की जबरन नसबंदी करवा दी गई थी… प्रेस को सेंसर कर दिया गया तरह ..  मतलब की प्रेस कि आज़ादी चीन ली गयी थी…

यह बताया जाता है कि सरकार ने पूरे देश को एक बड़े जेल में बदल दिया था… आपातकाल के दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकारों को स्थगित कर दिया गया था…. इमरजेंसी में जीने तक का हक छीन लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने भी 2011 में अपनी गलती मानी थी……. सुप्रीम कोर्ट ने 2 जनवरी, 2011 को यह स्वीकार किया कि देश में आपातकाल के दौरान इस कोर्ट से भी नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ था….

वैसे इस बात को नकारा नहीं जा सकता है कि कैसे जय प्रकाश नारायण ने आपातकाल से देश को मुक्त किया था…. जेपी की लड़ाई ने निर्णायक मुकाम तक पहुंची…..और फिर अन्तः इंदिरा को सिंहासन छोड़ना पड़ा…. मोरारजी देसाई की अगुवाई में जनता पार्टी का गठन हुआ….. 1977 में फिर से आम चुनाव हुए…. 1977 के चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह हारी…. इंदिरा गाँधी  खुद रायबरेली से चुनाव हार गईं और कांग्रेस सिर्फ  153 सीटों पर सिमट कर रह गई…. 23 मार्च 1977 को इक्यासी वर्ष की उम्र में मोरार जी देसाई प्रधानमंत्री बने…. वैसे इस के परिणाम के बाद जो सरकार बनी थी … वो आज़ादी के पुरे 30 साल बाद गैर कांग्रेसी सरकार थी…