BHU परिसर में निकाला गया ताजिया, विरोध में धरने पर बैठे छात्र

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देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शुमार है बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU). मंगलवार यानी 10 सितम्बर को मुहर्रम की वजह से विश्वविद्यालय में छुट्टी थी. माहौल शांत था. ये शांत माहौल शोर में बदल गया क्योंकि विश्वविद्यालय परिसर में ताजिया घुमाया गया. छित्तूपुर गेट से शुरू हुआ ताजिए का जुलूस काशी हिंदू विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से होते हुए परिसर में करीब एक घंटे तक रहा और सिंह द्वार से बाहर आया. जिसके बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता तथा अन्य छात्र नाराज होकर विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर के कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए.

छात्रों की नाराजगी स्वाभाविक थी. बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के 102 वर्षों के इतिहास में शायद ये पहली बार था कि BHU में ताजिया घुमाया गया. धरने पर बैठे छात्र ये जानना चाहते थे कि विश्वविद्यालय के इतिहास में जब आज तक कभी ताजिया नहीं निकाला गया तो फिर इस बार क्या वजह हो गई कि सारे परम्पराएँ और नियमों को ताक पर रख दिया गया और विश्वविद्यालय कैम्पस पुरे एक घंटों तक मातम के शोर से गूंजता रहा .

बीएचयू अस्पताल से जुड़े एक पूर्व अधिकारी ने जब चार तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की तो ये खबर सोशल मीडिया पर चर्चा में आई और लोग इसपर ट्वीट करने लगे. उन्होंने लिखा ‘आज पहली बार, जब काशी हिंदू विश्वविद्यालय सिंह द्वार से ताजिया निकला तो इतिहास कायम हो गया”. इसके बाद ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं. सोशल मीडिया पर बीएचयू कुलपति राकेश भटनागर पर सवाल उठाने लगे.

यूजर सवाल कर रहे थे कि क्या अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय में नवरात्रि पर माँ दुर्गा की प्रतिमा लगाने की अनुमति मिलेगी? अगर नहीं तो फिर ताजिया कैसे घुमाया जा रहा है BHU में? एक अन्य यूजर ने सवाल किया कि क्या कोई हिन्दू AMU में नवरात्रि का गरबा या गणेश पूजा के बारे में सोच भी सकता है? एक अन्य यूजर ने BHU में ताजिया निकालने पर बेहद आक्रोशित होते हुए ट्विटर पर लिखा “JNU के पैदावार और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के वर्तमान कुलपति राकेश भटनागर द्वारा आज BHU में ताजिया घुसाया जा रहा है, कल BHU में इनके कार्यकाल में मस्जिद भी बना ही दिया जाएगा.”

दूसरी तरफ चीफ प्रॉक्टर के कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे छात्रों ने आरोप लगाया कि जुलूस के दौरान आपत्तिजनक नारे लगाए गए और अवैध हथियार भी लहराए गए. छात्रों की मांग है कि भविष्य में ऐसे जुलूसों को अनुमति ना दी जाए, ताकि परिसर में शांतिपूर्ण माहौल बना रहे.

विवाद बढ़ा तो चीफ प्रोक्टर ओपी राय सफाई देने आये और कहा कि BHU में ताजिया निकालने की परंपरा पुरानी है. उन्होंने आपत्तिजनक नारे और धारदार हथियार लहराए जाने के आरोप पर जांच की बात कही. चीफ प्रोक्टर की सफाई के बावजूद अब तय शंकाएं उभर रही है कि क्या ये सब एक साजिश के तहत हुआ? क्योंकि BHU के कुलपति राकेश भटनागर पहले JNU के प्रोफ़ेसर रह चुके हैं और जहाँ तक परंपरा की बात है तो इस बार से पहले कभी BHU में ताजिया नहीं निकाला गया. लेकिन अब सेक्युलरिज्म के नाम पर ऐसा करने की अनुमति दे कर कुलपति राकेश भटनागर ने मदन मोहन मालवीय के उन मूल्यों पर आघात किया है जिनके आधार पर BHU की नींव रखी गई थी.