मिसेज एशिया USA का खिताब जीत कर नीलम ने बढ़ाया भारत का मान

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मिसेज एशिया USA, का ख़िताब भारत की बेटी नीलम सिंघाल ने जीत लिया है. नीलम उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से हैं. इस कांटेस्ट में पूरे एशिया से कई सुंदरियों ने हिस्सा लिया था, लेकिन नीलम ने सभी को पीछे छोड़ दिया. आज उनकी वजह से भारत को यह गौरव हासिल हुआ है.

नीलम ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने शहर गोरखपुर से हासिल की थी. फिर बाद में उन्होंने केमिस्ट्री से पीएचडी किया और शादी के बाद अमेरिका के शहर कैनस्स में बस गईं. वहां उन्होंने बतौर प्रोफेसर पढ़ाना शुरू कर दिया. उनका एक 7 साल का बेटा भी है. भारत से दूर होने के बावजूद भी वो अपने बेटे को हिंदी सिखाती हैं. यहां भारत में माँ बाप अपने बच्चों को हिंदी न बोल कर इंग्लिश में बात करने को कहते हैं वहीं इस देश से बाहर रह रहीं नीलम अपने बच्चों को भारतीयता सिखाती हैं.

नीलम बचपन से ही काफी प्रतिभाशाली और मेहनती थीं. उनकी तैयारियों और चुनौतियों के बारे में जानने के लिए हमारी टीम ने उनसे खास बातचीत की. अपने बारे में नीलम बताती हैं, “मैं गोरखपुर में पली बढ़ी हूँ, बचपन से ही मुझे टीचर बनना था. शायद इसकी प्रेरणा मुझे मेरे पिता से मिली थी. मैं हमेशा से बच्चों को पढ़ना चाहती थी. PHD ख़त्म करने के बाद मैंने अपने इस सपने को पूरा कर लिया. लेकिन कहीं ना कहीं मेरे ज़ेहन में सौन्दर्य प्रतियोगिताओं से जुड़ाव भी था. भले ही मैंने उसे कैरियर के तौर पर ना चुना हो लेकिन उसमें रुचि जरूर थी.”

आपका इस प्रतियोगिता में दाखिल होने से लेकर इसे जीतने तक के सफ़र को कैसे देखती हैं?

“मेरे लिए यह गर्व की बात है कि मुझे भारत देश का प्रतिनिधित्व दुनिया के सामने करने का मौका मिला. एक अनजान देश में रहना और पहचान बनाना बेहद मुश्किल होता है, मुश्किलें तब और भी बढ़ जातीं हैं जब नौकरी पेशे के साथ साथ आपको परिवार को भी संभालना हो, लेकिन यहीं चुनौतियां हमें ताकत भी देती हैं.”

खूबसूरती को अपने शब्दों में परिभाषित करती हुई नीलम ने कहा, ‘हमारे संस्कार ही हमारी खूबसूरती है. जब मुझे इस कांटेस्ट में हिस्सा लेने का मौका मिला तो मेरे अंदर पहनावे को लेकर काफी हिचक थी. क्योंकि मैं मर्यादा में रह कर ही अपने टैलेंट को प्रदर्शित करना चाहती थी, ना कि स्किन शो के ज़रिए. ये कांटेस्ट एशियाई मूल के लोगों के लिए था और हम सब एशियाई लोग सभ्य पहनावे को पसंद करते हैं. मुझे खुशी है कि हम एशियाई मूल के लोग सिर्फ स्किन शो को ही ब्यूटी नहीं मानते, बल्कि हमारे टैलेंट और हार्डवर्क पर हमें जज करते हैं.”

“मिसेज़ एशिया बनने के लिए मैने काफ़ी मेहनत की थी. मुझे हार या जीत से मतलब नहीं था. मुझे अपने देश को रिप्रेजेंट करना था, अपने देश का मान बढ़ाना था. मैं भारतीय परंपरा को दिल से बढ़ावा देना चाहती थी. इस शहर के लोग बहुत अच्छे हैं, लेकिन भारत की बात ही अलग है. इस सफ़र ने मुझे धैर्य रखना सिखाया है. एक अच्छी बात ये भी है कि अपने घर से दूर हमे कई चीज़ों की एहमियत पता चल जाती है. मैं अपने बेटे को मंदिर भी ले जाती हूँ ताकि उसे अपनी जड़ों से जोड़े रख सकूं.”

नीलम अपने देश की औरतों के लिए एक प्रेरणा बन कर उभरी हैं, उन्होंने अपनी पढ़ाई, घर -परिवार और सारी जिम्मेदारियों को निभाते हुए इस ख़िताब को अपने नाम किया और यही एक भारतीय औरत की खासियत है.