कांग्रेस की रैली में क्यों लगने मोदी के नारे

0
46

मंगलवार को मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में कांग्रेस की एक विशाल किसान विजय रथ यात्रा हुई. लोक सभा चुनाव 2019 को ध्यान में रखते हुए इस रैली का आयोजन किया गया था. इस रैली के ज़रिये कांग्रेस ज्यादा से ज्यादा किसान वोटों को बटोरना चाहती थी. लेकिन इस रैली में कुछ ऐसा हुआ जिससे कांग्रेस के सभी नेता सकते में आ गए.

दरअसल हुआ ये कि किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश गुर्जर किसानों को संबोधित कर रहे थे. रैली के दौरान किसानों ने कर्ज माफ़ी के प्रमाण पत्र मिलने के बाद खातों में राशि नहीं आने और कई किसानों कि कर्ज माफ़ी न होने पर सवाल किए. इसके बाद किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष ने जवाब देने के बजाये किसानों को चुप रहने को कह दिया. इससे किसान आग बबूला हो गए और मोदी मोदी के नारे लगाने लगे. परिस्थिति को काबू करने के लिए पुलिस को बीच में आना पड़ा. पुलिस ने किसानों को शांत कराया. इसके बाद दिनेश गुर्जर ने किसी तरह से बात को संभाला और इसे बैंक कि गलती बताते हुए छह महीने का समय और मांग लिया.

ये रथयात्रा मंगलवार दोपहर मंदसौर कृषि उपज मंडी पहुंची. यहाँ एक शेड के नीचे कांग्रेस नेताओं ने कर्ज माफ़ी को भुनाते हुए किसानों से लोक सभा चुनावों में समर्थन माँगा. किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष फकीरचंद गुर्जर मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किए गए कामों को गिना रहे थे. तभी एक किसान राजेश प्रजापति ने कहा, “मेरा कर्ज माफ नहीं हुआ”. इतने में फकीरचंद गुर्जर ने किसान से कह दिया- मुंह बंद रखो, चुप रहो और सब्र करो, कर्ज माफ़ी का काम चल रहा है. सोचने कि बात ये है कि जब चुनाव होता है तो नेता वोटर्स से बड़े बड़े वादे करते हैं और जरूरत हो तो वोटरों के पांव छूने से भी नहीं कतराते. लेकिन यहाँ नेता जी का तो अलग ही रूप देखने को मिला. नेता जी शायद भूल गये कि वो नेता है और नेता लोग वोटरों से बदतमीजी से बात नहीं करते और खासकर तब जब लोक सभा चुनाव बिलकुल सामने हों.

फिर इसके बाद नाराज किसान सभा छोड़ के जाने लगे. कांग्रेस प्रदेश महामंत्री प्रशांत चौहान उन्हें शेड के बाहर समझाने पहुंचे. उन्होंने भी अपनी तरफ से पूरी कोशिश की किसानों को समझाने कि. उन्होंने कहा, अभी कर्ज माफ़ी कि प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, हमें सरकार में बैठे समय ही कितना हुआ है. इसपर राजेश ने कहा कि आपने तो 10 दिन में ही कर्ज माफ करने कि बात की थी और इसमें भी सिर्फ हजार दो हजार रुपय ही दिए जा रहे हैं. तभी किसानों ने मोदी मोदी के नारे लगाना शुरू कर दिया. इसके बाद थोड़े बहुत किसान भी जो सभा में थे वे भी उठ के चले गए.

मंदसौर जिला बीते कुछ दिनों में खूब चर्चा में रहा. 2017 में मंदसौर में किसानों द्वारा आंदोलन हुआ था. आंदोलन कर्जा माफ़ी के लिए था लेकिन आगे चल के ये हिंसा में तबदील हो गया था. हिंसा को रोकने के लिए पुलिस कि फैरिंग से छह किसानों कि जान भी चली गयी थी. उस समय विपक्षी पार्टी यानी कांग्रेस ने सरकार कि खूब आलोचना की थी और मंदसौर में किसान कि हालत को बहुत गंभीर बताया था. लेकिन मध्य प्रदेश 2018 विधान सभा चुनावों ने सभी को हैरान कर दिया था. दरअसल मंदसौर में आठ विधान सभा सीटें हैं जिसमें से 7 सीट बीजेपी ने जीत ली थी और एक सीट जो कांग्रेस को मिली वो भी सिर्फ 350 वोटों से ही बच सकी थी.

इसके बाद कांग्रेस ने किसानों का कर्ज माफ करने का ऐलान कर दिया था. कांग्रेस ने कहा था कि 10 दिन के अंदर कांग्रेस सरकार मध्य प्रदेश के किसानों का कर्जा माफ कर देगी और अगर ऐसा नहीं हुआ तो मुख्यमंत्री ही बदल दिया जायेगा. इस पूरी घटना क्रम से एक बात तो साफ़ है नेता वोट लेने के लिए ऐसे वादे वोटरों से कर देते हैं जिन्हें पूरा करना लगभग नामुमकिन सा होता है. तो आगे ये देखना होगा कि कांग्रेस को लोक सभा चुनावों में मध्य प्रदेश के किसानों का समर्थन मिलता है या नहीं.