टाइम पत्रिका के कवर पर पीएम मोदी, लेकिन बताया गया देश को बाँटने वाला

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भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है साथ ही दुनिया की तेजी से उभरती सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था . भारत के हर कदम पर दुनिया की निगाहें टिकी होती है. फिर तो अभी चुनाव का माहौल है तो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का चुनाव दुनिया की नज़रों से कैसे बचा रह सकता है.
2014 के लोकसभा चुनाव में जब मोदी जीत कर भारत के प्रधानमंत्री बने थे उसके बाद से उन्होंने विदेश यात्रायें कर के भारत की विदेश नीति को उस स्वर्णिम मोड़ पर ला खड़ा किया जहाँ दुनिया के सभी बड़े देश भारत के पक्ष में खड़े नज़र आते हैं. कई देशों के साथ भारत के रिश्ते मजबूत हुए साथ ही दुनिया बहार के देशों में इस बात को भी जानने की बेचैनी है कि क्या भारत की जनता एक बार फिर नरेंद्र मोदी पर भरोसा करेंगी?

प्रतिष्ठत अंतररष्ट्रीय पत्रिका टाइम ने 20 मई 2019 के अपने कवर पर नरेंद्र मोदी को जगह दी है लेकिन साथ ही एक ऐसी उपाधि दी है जिपर विवाद खड़ा हो सकता है. पत्रिका ने मोदी को “India’s Divider in Chief” यानी को ‘भारत का प्रमुख रुप से बांटने वाला’ बताया है. टाइम के इस कवर स्टोरी को लिखा है आतिश तासीर नाम के पत्रकार ने. आर्टिकल में लिखा गया है कि 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने हिन्दू और मुसलमानों के बीच भाईचारे की भावना को बढ़ाने के लिए कोई इच्छा नहीं जताई.

आर्टिकल में कहा गया है कि मोदी आज़ादी के 60 सालों तक देश का प्रतिनिधित्व करने वाले नेहरू – गाँधी परिवार पर हमले करते हैं और कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते हैं. लेकिन उन्होंने कभी भी मुस्लिमों के खिलाफ नफरत मुक्त भारत की बात नहीं की और हिन्दू मुस्लिम भाईचारे की बात नहीं की.
आर्टिकल में देश की दो प्रमुख पार्टियों कांग्रेस और भाजपा के राज में हुए दंगों की भी बात की है लेकिन लेखक आतिश तासीर कांग्रेस के राज में हुए 1984 के सिख विरोधी दंगो के इए सीधे सीधे कांग्रेस और राजीव गाँधी को क्लीनचिट देती नज़र आते है वहीँ 2002 के गुजरात दंगों में नरेंद्र मोदी पर ऊँगली उठाया गया है.

आर्टिकल में कहा गया है कि हालांकि कांग्रेस भी 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर आरोप मुक्त नहीं है लेकिन फिर भी इसने दंगों के दौरान उन्मादी भीड़ को खुद से अलग रखा लेकिन 2002 के दंगों के दौरान अपनी चुप्पी कारण नरेंद्र मोदी ‘उन्मादी भीड़ के पक्ष’ साबित हुए.
अब सवाल ये है कि लेखक तासीर इस निष्कर्ष पर कैसे पहुँच गए कि कांग्रेस 1984 के दंगों की उन्मादी भीड़ से खुद को अलग रखने में सफल रहे? जबकि इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद हुए दंगों पर राजीव गाँधी ने कहा था – जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है. यहाँ तक कि उन दंगों में साफ साफ़ कांग्रेस के बड़े नेताओं की संलिप्तता सामने आई थी जिनमे से एक सज्जन कुमार को सजा भी दी गई. चश्मदीदों के मुताबिक सिखों को ढूंढती भीड़ का नेतृत्व कांग्रेस से जुड़े कई नेता कर रहे थे. फिर भी आतिश तासीर इस नतीजे पर पहुँच गए कि कांग्रेस ने दंगों के दौरान उन्मादी भीड़ को खुद से अलग रखा.

narendra modi

तासीर का ये लेख साफ़ दर्शाता है कि वो नरेंद्र मोदी के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं . आर्टिकल में उतर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भगवा पहनने वाला और नफरत फैलाने वाला महंत बताया गया है. तासीर ने अपने आर्टिकल में वही सब लिखा है जो देश में तथाकथित लिबरल और सेक्युलर जमात द्वारा फैलाया जाता है. पुरे आर्टिकल को नरेंद्र मोदी के प्रति पूर्वाग्रह से गस्त हो कर लिखा गया है

पत्रिका में एक और आर्टिकल है जिसमे मोदी को सुधारवादी बताया गया है. इयान ब्रेमर नाम के पत्रकार ने Modi Is India’s Best Hope for Economic Reform टाइटल के साथ लिखा है कि मोदी ही वो शख्स है जो भारत के लिए डिलीवर कर सकते हैं. इस आर्टिकल में पीएम मोदी की सुधारवादी नीतियों का उल्लेख किया गया है और बताया गया है कि आर्थिक सुधार के उनके कदमों से करोड़ों जिंदगियों में बदलाव आया. साथ ही मोदी के नेतृत्व में भारत के चीन, अमेरिका और जापान के साथ रिश्तों में सुधार का जिक्र है.

इयान ने अपने आर्टिकल में नोटबंदी, GST, हर घर में बिजली पहुंचाने वाली सौभाग्य योजना, देश के बुनियादी ढाँचे में सुधार, बेघरों को घर देना तथा सड़कों और हाइवे का जाल बिछाना जैसे योजनाओं को मोदी सरकार की देश की सूरत बदलने वाली योजना बताया है .
अब चुनाव अपने आखिरी दौर में पहुँच चूका है. आतिश तासीर के आर्टिकल का टाइटल इस चुनावी माहौल में बहुतों के लिए मुद्दा बन सकता है और उम्मीद है कि बनाया भी जाएगा . लेकिन एक सच इयान ब्रेमर का आर्टिकल है भी है जिसे इग्नोर कर दिया जाएगा.