जोमैटो के बाद अब मैक्डॉनल्ड्स का भी हुआ पर्दाफाश

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जोमैटो के बाद अब फ़ूड चैन मैक्डॉनल्ड्स भी सोशल मीडिया पर विवादों में फंस गया है. कुछ दिनों पहले जोमैटो ने ये कह कर लिबरल और सेक्युलर गैंग से खूब तारीफें बटोरी थी की खाने का कोई धर्म नहीं होता. लेकिन उसके बाद जोमैटो का दोहरा रवैया सामने आ गया था की कैसे वो दो धर्म के ग्राहकों के साथ भेद भाव करता है … ठीक उसी तरह फ़ास्ट फ़ूड चैन मैक्डॉनल्ड्स ने भी मान लिया है कि नॉन मुस्लिमों के साथ भेद-भाव करना भारत में उनके बिसनेस मॉडल का पार्ट है. अब हम आपको बताते हैं कि मामला क्या है ?

एक यूजर ने मैकडोनाल्ड्स से सवाल पूछा की क्या भारत में मैक डी के रेस्टोरेंट हलाल सर्टिफाइड है? तो मैक डी ने उसे जवाब देते हुए कहा की – भारत में उसके सभी रेस्टोरेंट में अच्छी क्वालिटी के मीट मिलते हैं. यहाँ एक बात पर ध्यान दीजिये. यूजर ने हलाल सर्टिफिकेट के बारे में पूछा था. हलाल सर्टिफिकेट का मतलब क्या होता है इसके लिए हमने एक स्पेशल विडियो बनाया था जिसे आप हमारे चैनल पर देख सकते हैं. फिर भी हम आपको बता दें की हलाल सर्टिफिकेट का हलाल मीट से कोई सम्बन्ध नहीं है … फिर भी मैकडोनाल्ड्स ने यूजर को मीट की क्वालिटी के बारे में समझाने लगा. गौरतलब है की मुस्लिम सिर्फ हलाल मीट खाते हैं जबकि सिख और हिन्दू झटका मीट को प्राथमिकता देते हैं. तो हलाल सर्टिफिकेट मांगने पर कम्पनी ने मीट का जिक्र कर के ये बताया की उसके सभी रेस्टोरेंट में सिर्फ हलाल मीट मिलता है. जैसे उसके लिए गैर मुस्लिम ग्राहक कोई मायने ही नहीं रखते. उनकी भावनाएं कोई मायने ही नहीं रखती. समस्या यह नहीं है कि एक कंपनी मुसलमानों को हलाल मांस दे रही है, बल्कि समस्या तो ये है कि वो हिन्दुओं को ज्ञान देने में कभी नही चूकती.

अब मैक्डॉनल्ड्स ने भी साफ़ शब्दों में बोल दिया है कि पूरे भारत में उन्हें हर एक रेस्तरों में सिर्फ हलाल मांस का इस्तेमाल किया जाता है. मैक्डॉनल्ड्स ने ट्वीट करके साफ़-साफ़ कहा कि हमारे सभी रेस्तराँ में हलाल प्रमाणपत्र हैं. आप अपनी संतुष्टि और पुष्टि के लिए किसी भी रेस्तरां प्रबंधकों को आपको प्रमाण पत्र दिखाने के लिए कह सकते हैं. इसके बाद कई लोगों ने अलग-अलग तरीके से अपनी प्रतिक्रियाए देनी शुरू कर दी.

एक यूजर ने ट्वीट करते हुए कहा कि वाह, मुझे नहीं पता था कि आप एक इस्लामिक फ़ूडचैन फ्रैंचाइज़ी हैं. मैं इस रेस्तरां से कभी नहीं खाऊंगा जो सिर्फ इस्लामी प्रथाओं के माध्यम से चला गया भोजन परोसता है. आप भारत में सिर्फ 15% मुस्लिमों को खाना खिलाकर नही रह सकते.

एक यूजर ने कहा कि और ये लोग कहते हैं कि भोजन का कोई धर्म नहीं है! यदि भोजन का कोई धर्म नहीं है, तो “हलाल” प्रमाणीकरण की क्या आवश्यकता है?

एक यूजर ने लिखा कि हालांकि, एक वेज होने के नाते, मेरा मानना ​​है कि सभी प्रकार की हत्याएं दर्दनाक हैं, लेकिन इस मामले में मैं इस बात के लिए दृढ़ हूं कि हम इस्लामी जीवन पद्धति का पालन करने के लिए क्यों मजबूर हैं.

वहीँ एक ने ट्वीट किया कि आपने अपने हिंदू और सिख ग्राहकों को खोने का जोखिम उठा लिया है.

हलाल या झटके वाले मांस से कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन किसी को अगर फर्क पड़ता है तो वो अपने अधिकारों के दायरे में रहकर आवज़ उठा सकता है. सभी फ़ूड कंपनियों को ये ध्यान में रखना चाहिए कि वो खाने के नाम पर धर्म को बीच में न लाए. अगर वो धर्म के नाम पर अपनी फ़ूड कंपनियों को चलाएंगे तो इससे वो अपने ही ग्राहकों को खो देंगे.