शबाना आजमी के बचाव में सारी हदें पार कर गये जावेद अख्तर!

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मोदी सरकार के दुसरे कार्यकाल के बाद अब आजादी गैंग, असहिष्णुता गैंग, अवार्ड वापसी गैंग दोबारा सक्रीय होता दिखाई दे रहा हैं और इस गैंग को फिर से हवा दे रही है प्रसिद्ध एक्ट्रेस शबाना आजमी.. दरअसल पिछले दिनों शाना आजमी ने बयान दिया कि आज कल देश में ऐसा माहौल हो गया है कि सरकार की आलोचना करने पर देश विरोधी करार दे दिया जाता है। जिस कार्यक्रम के दौरान शबाना ने ये सारी बातें कहीं उसमें मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह भी मौजूद थे.. आलोचना होनी चाहिए.. अगर सरकार कुछ गलत कर रही है तो आलोचना की जाने चाहिए… होती भी है …बहुत लोग करते है लेकिन सरकार की आलोचना करने पर किसे देश विरोधी साबित किया गया.. या पकिस्तान भेजा गया.. ये बात भी शबाना आजमी जो को बताना चाहिए.. शबाना आजमी को देश से और देश के लोगों से तमाम शिकायते होंगी… कुछ लोगों को नापसंद करती होंगी… उनके अपने कुछ कारण होंगे.. अपना एजेंडा होगा या फिर हो सकता है राजनीति से प्रेरित बयानबाजी करती हो लेकिन जावेद अख्तर की भाषा से वाकई आप भी हैरान होंगे.. जवाब देना, कडा जवाब देना, और घटियागिरी कर जवाब देना अलग अलग बात होती है. जैसे आपकी आजादी है कुछ लोगों के खिलाफ बोलने की… वैसे लोगों को भी आजादी है आपको पाकिस्तान भेजने की बात कहने की… जैसे आपको ये कहने की आजादी है कि यहाँ डर लगता है तो लोगों को भी आजादी है कि लोग आपको ये भी कह दें कि अगर आपको ये देश पसंद नही है तो आप कहीं और चले जाएँ.. लेकिन सवाल तो यही है कि कितने लोगों ने आपको टिकट निकाल कर आपको भेजने की व्यवस्था की.. कि आप देश छोड़ कर चले जाएँ या फिर आप पाकिस्तान चले जाए.. बात तो यह भी सही है कि अगर आप आतंकियों के समर्थन की बात करेंगे.. देश विरोधी बात करेंगे.. लोगों को भड़काने की बात करेंगे तो आपको लोग आपको कहीं भेजने की बात.. ध्यान से सुनिए भेजने की बात कर सकते हैं क्योंकि बोलने की आजादी तो उनके पास भी है,


दरअसल मामला इंदौर में दिए गये शबाना आजमी के बयान से शुरू होता है. सोशल मीडिया पर शबाना को खूब ट्रोल किया गया. इसके बाद शबाना आजमी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ’मेरी एक टिप्पणी को लेकर इतना हंगामा? मुझे नहीं पता था कि मैं दक्षिणपंथियों की नजरों में इतना महत्व रखती हूं. दीपा मेहता की फिल्म ‘वॉटर’ के लिए मेरा सिर मुंडवाने पर मेरे खिलाफ मुस्लिम चरमपंथियों ने फतवा जारी कर दिया था, जिस पर जावेद अख्तर का जवाब था चुप रहो. सभी एक जैसे हैं.” इसी पर एक युवक ने रिप्लाई करते हुए लिखा कि कश्मीर में मारकाट हो इनके दर्द नहीं होता, बंगाल में हत्याएं होती है इनके दर्द नहीं होता, दिल्ली में मंदिर तोड़ दिया गया इनके दर्द नहीं होता, लेकिन इनके रिश्तेदार #आतंकवादी मरते हैं तो इनके दर्द होता है, तो कमबख्त क्यों नहीं छोड़ देते भारत को.
इसके बाद तो मानो जावेद अख्तर साहब जो अपनी लेखनी के लिए मशहूर हैं. लेखक के तौर मशहूर हैं. जिसके शब्दों के जाल को सुनकर लोग वाह वाह करते हैं वही जावेद अख्तर मानों शब्दों की साड़ी मर्यादाएं ही लांघ गये. इसी युवक को जवाब देते हुए जावडे अख्तर साहब ने लिखा कि जब हमारे बाप दादा देश की आज़ादी के लिए ख़ून बहा रहे थे तो तेरे जैसों के बाप दादा अंग्रेज़ों के जूते चाट रहे थे। ग़द्दारों की औलाद तेरी क्या औक़ात है कि तू हम से हमारा देश छोड़ने को कहे.


आतंकवाद के खिलाफ जावेद अख्तर नही बोलते कोई तकलीफ नही है… वे टूकड़े टुकड़े गैंग के सदस्य के लिए प्रचार करने जाते हैं तो कहने उन्हें आजादी है… तो भाई आजादी तो सबको है ना.. दूसरो की आजादी से आपको इतना बुरा लग जाता है कि आप उसके बाद दादा.. परदादा पर चढ़ाई कर देते हैं. वैसे जावेद अख्तर साहब का ये बयान काफी लोगों को पसंद आया.. खूब पसंद आया.. इसे कारार जवाब माना जा रहा है.. हम भी मानते इसे करार जवाब लेकिन शब्दों की मर्यादा में रहकर कहते तो हम हम मानते करार जवाब.. तू तड़ाक और बाप दादा पर चढ़ाई करके जवाब देने को जवाब नही कहते इसे चिढ कहते हैं.. इसे उबाल कहते हैं…… खैर जावे साहब ने तो शबाना पर किये गये ट्वीट पर जवाब देने सामने आ गये लेकिन जो सवाल लोग इन दोनों से पूछ रहे हैं इस पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रहे हैं या कहें कुछ बोल ही नही पा रहे हैं. शबाना और जावेद से पूछा जा रहा है कि इमरजेंसी के दौरान मिले हुए अवॉर्ड पर वे चुप क्यों हैं? शबाना ने अंकुर फिल्म के लिए राष्ट्रीय अवार्ड तब लिया था जब देश में इमरजेंसी लगी थी। उस समय इन लोगों को बोलने की आजादी की याद क्यों नहीं आई? ये सब मोदी सरकार से नफरत के चलते एक प्रोपेगंडा के तहत किया जा रहा है।

अब इन दोनों को यही भारी पड़ता नजर आ रहा है जिसके तहत इन दोनों ने अपनी बातें लोगों तक पहुंचाने की जुगत की थी.. आजादी बोलने की आजादी.. प्रचार करने की आजादी… यही से बात ही शुरू हुई थी. बोलने की आजादी की बात कहकर इन लोगों ने बोलना शुरू किया था.. डर लगता है.. असहिष्णुता.. अवार्ड वापसी.. टुकड़े टुकड़े.. सब आजादी के नाम पर था तो भाई आप जिसे गाली दे रहे हो अब उसकी भी तो बोलने की आजादी है.