इन कांग्रेसी नेताओं ने पीएम मोदी की तारीफ़ में जो कहा वो सोनिया जी को पसंद नहीं आएगा

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साल 2002 के बाद से लगातार 17 साल तक नरेंद्र मोदी को खलनायक साबित करने की कोशिश करते रहने और लगातार दो लोकसभा चुनाव शर्मनाक तरीके से हारने के बाद अब कांग्रेस नेताओं को ये अहसास होना शुरू हो गया है कि नरेंद्र मोदी को खलनायक साबित करके वो देश की जनता के दिलों में जगह नहीं बना पायेंगे. इसलिए कांग्रेस के भीतर से अब आवाज उठने लगी है कि नरेंद्र मोदी को खलनायक साबित करने की कोशिश करना गलत है. अगर ये बात कांग्रेस के किसी छुटभैया नेता ने कही होती तो इसपर चर्चा करने की कोई जरूरत नहीं होती . लेकिन इस बात पर चर्चा करने की जरूरत इसलिए है क्योंकि ये बात किसी छोटे नेता ने नहीं बल्कि पार्टी के दो बड़े नेताओं ने कहीं है . ये दो बड़े नेता है जयराम रमेश और अभिषेक मनु सिंघवी . जयराम रमेश तो यूपीए की सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं . हालाँकि ये अलग बात है कि कांग्रेस पार्टी में गाँधी परिवार के अलावा किसी की राय को कोई तवज्जो नहीं दी जाती और आज कांग्रेस की दुर्दशा इसी कारण है .

पीएम मोदी के प्रति विपक्ष के रवैये और व्यवहार पर जयराम रमेश ने कहा “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली में हमेशा नकारात्मक चीज देखना, या फिर उनके द्वारा किए गए काम को कोई तवज्जो नहीं देना और सिर्फ उनकी इमेज पर निशाना साधने से कोई फायदा नहीं होगा. विपक्ष को इस बात को समझना चाहिए.’’ वो राजधानी दिल्ली में राजनीतिक विश्लेषक कपिल सतीश कोमीरेड्डी की किताब ‘मालेवॉलेंट रिपब्लिक : ए शॉर्ट हिस्ट्री ऑफ द न्यू इंडिया’ के विमोचन के दौरान बोल रहे थे. इस दौरान जयराम रमेश ने ये भी बताया कि आखिर क्या वजह थी कि देश की जनता ने मोदी पर और उनकी बातों पर पहले से भी ज्यादा भरोसा किया . उन्होंने कहा कि हमें ये मानना होगा कि जो काम लम्बे समय तक नहीं हुए वो काम नरेंद्र मोदी ने बतौर प्रधानमंत्री किया और इसी कारण लोगों ने उनपर दोबारा भरोसा किया. उनकी योजनाओं ने लोगों को फायदा पहुँचाया .

सौभाग्य योजना और उज्जवला योजना का जिक्र करते हुए जयराम रमेश ने कहा कि 2014 से 2019 तक मोदी सरकार ने बिजली के क्षेत्र में, उज्ज्वला योजना के जरिए लाखों लोगों को फायदा पहुंचाया है और विपक्ष को ये बात माननी होगी. विपक्ष ने उनकी योजनाओं का मजाक उड़ाया, खारिज किया लेकिन उन योजनाओं ने लोगों को फायदा पहुँचाया और वो नरेंद्र मोदी के करीब आये. विपक्ष को आइना दिखाते हुए जयराम रमेश ने कहा कि “उनके काम को स्वीकार किए बिना आप उनका मुकाबला नहीं कर सकते हैं. सिर्फ उनकी बुराई करने से कोई फायदा नहीं होने वाला है.”

किसानों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सब ये मान रहे थे कि किसानों को काफी समस्याएं हैं लेकिन ये समस्या नरेंद्र मोदी के कारण है ये कोई भी मानने को तैयार नहीं हो रहा था. इसका परिणाम हमें चुनावों में दिखा. किसानों ने दिक्कतों के बावजूद उन्हें वोट किया क्योंकि अपनी समस्याओं के लिए वो उन्हें जिम्मेदार नहीं मानते. वह (मोदी) ऐसी भाषा में बात करते हैं जो उन्हें लोगों से जोड़ती है। जब तक हम यह न मान लें कि वह ऐसे काम कर रहे हैं जिन्हें जनता सराह रही है और जो पहले नहीं किए गए, तब तक हम इस व्यक्ति का मुकाबला नहीं कर पाएंगे.

जयराम रमेश के नक़्शे कदम पर चलते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने भी कहा कि नरेंद्र मोदी को खलनायक साबित करने की कोशिश करना गलत है. उनके कामों को खारिज नहीं किया जा सकता. कामों का मूल्यांकन व्यक्ति नहीं बल्कि मुद्दों के आधार पर होना चाहिए. जयराम रमेश की कही बातों से इत्तेफाक कटाते हुए उन्होंने ट्वीट किया “मैंने हमेशा कहा है कि मोदी को खलनायक की तरह पेश करना गलत है. सिर्फ इसलिए नहीं कि वह देश के प्रधानमंत्री हैं, बल्कि ऐसा करके एक तरह से विपक्ष उनकी मदद करता है. काम हमेशा अच्छा, बुरा या मामूली होता है. काम का मूल्यांकन व्यक्ति नहीं बल्कि मुद्दों के आधार पर होना चाहिए. जैसे उज्ज्वला योजना कुछ अच्छे कामों में एक है.“

लोकसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस ने पीएम मोदी की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं को खारिज कर दिया था. घरों में बिजली पहुंचाने वाली सौभाग्य योजना, महिलाओं के रसोई तक गैस सिलेंडर पहुँचाने वाली उज्जवला योजना, बेघरों को घर देने वाली पीएम ग्रामीण आवास योजना या फिर आयुष्मान भारत योजना. इन सभी जनकल्याणकारी योजनाओं को विपक्ष ने सीधे सीधे खारिज कर दिया था लेकिन इन योजनाओं ने लोगों का फायदा पहुँचाया और जिसका नतीजा चुनाव परिणामों के रूप में दिखा. लेकिन विपक्ष ने अपनी सारी उर्जा उन्हें खलनायक, चाहे वो मुसलमान विरोधी हो या दलित विरोधी साबित करने में लगा दी और आज पार्टी के नेताओं को अहसास हो रहा है कि कहाँ उनसे चूक हो गई. लेकिन अब भी ये कहना मुश्किल है कि अपने नेताओं की बातों पर अमल करके कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व या यूँ कहें कि गांधी नेहरू परिवार इस बात को समझेगा और सबक लेगा या हमेशा की तरह आत्ममुग्धता में अपनी गलतियों को दोहराता रहेगा .