जानिए सरकार ने कैसे पाया महंगाई पर काबू

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बीते दो दशकों में सरकारों की सबसे बड़ी परेशानी महंगाई दर यानी इन्फ्लेशन को माना गया है. देश की प्रोग्रेस के लिहाज से कोर इन्फ्लेशन काफी अहमियत रखता है। इन्फ्लेशन के बढ़ जाने का मतलब है रूपए की किमत का गिरना.
एक उदाहरण के तौर पर मान लीजिये आज एक चीज़ आप 100 रुपए में खरीदते हैं, और सालाना इन्फ्लेशन अगर 10% की दर से बढ़ रहा है, तो अगले साल यही चीज़ आपको 110 में मिलेगी. लेकिन आपकी आमदनी अक्सर इसी दर से नहीं बढती, इसकी वजह से आप किसी अन्य वस्तु को खरीदने की स्थिति में नहीं होंगे, है न?
आज से 5 साल पहले भारत का इन्फ्लेशन रेट 9 से 11% की दर से बढ़ रहा था. उस वक्त के जाने-माने अर्थशास्त्रियों और अंतरास्ट्रीय संस्थानों ने ये कल्पना भी नहीं की थी कि कोई सरकार इतने कम दिनों के अंदर, इन्फ्लेशन में इतना बड़ा बदलाव ले आ सकती है.
2014 में आई भाजपा सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी इसे काबू में ले आना. नयी सरकार ने आते ही Monitary policy Commitee का गठन किया, जिसका target था inflation को नियंत्रित करना. इसे काम में लाने के लिए RBI act में संशोधन किया गया.
इस commitee को इन्फ्लेशन दर 5% तक घटाने और इन्फ्लेशन की range को 2 से 6 % के बीच में ही रखने का कड़ा निर्देश दिया गया था.

इस plan को एक्शन में लाया गया और 2014 में इन्फ्लेशन दर घटकर 5% पहुच गई. इतना ही नही, हर वित्तीय वर्ष .75 से ले कर .5% की दर से और कम होती गई है. नतीज़ा ये कि अब आपकी जेब को महंगाई की मार नहीं झेलनी पड़ रही है. जो इन्फ्लेशन रेट 2011 में 9.5% था उसको घटाकर 3.75 पर पहुँचाना कोई आम बात नहीं है.
कहते हैं कि महंगाई जनता का सीधे गला घोटती है, इसलिए सरकार ने ‘इन्फ्लेशन’ को ही प्राथमिकता देते हुए उसे जल्द से जल्द कम करने के लिए, बिजनेस के लिए मिलने वाले लोन पर इंटरेस्ट रेट में इज़ाफा किया, इंटरेस्ट रेट बढ़ने से मार्किट में ज्यादा पैसा आ जाता है जिससे इन्फ्लेशन और बढ़ सकता है. इस फैसले से शुरुआत में बिजनेस क्लास सरकार से खासा नाराज़ भी था.
आप ये बात भी जान लें कि दुनिया भर में कई देश है जो इन्फ्लेशन को कम करने की कोशिश में recession झेल रहे हैं. लेकिन india जैसे बड़े देश ने कम समय में ही इसको कर दिखाया है.
फायदों के साथ ही इसके कुछ नुकसान भी हैं. जैसे एक छोटे बिजनेस लोन पर भी एक बिजनेसमैन को 12% का ब्याज़ चुकाना पड़ता है. लेकिन नियंत्रित इन्फ्लेशन से cost of capital घटेगा और आने वाले समय के लिए ये बहुत जरुरी है.
इसके अलावा cost of capital निवेश में रिस्क फैक्टर को दर्शाता है, इसके बढ़ने पर निवेश करने वाले को आने वाले समय में उस निवेश से कुछ खास फायदा नहीं होगा, इसलिए इन्फ्लेशन में कमी एक अच्छा संकेत है.
Bloomberg Intelligence economist Abhishek Gupta का मानना है कि 2015 में GST के आने के बाद foreign direct investment भी बढ़ गया है.

लेकिन इन्फ्लेशन के नियंत्रण में आने के बाद कुछ लोग नए विवाद खड़े करने की ताक में लग गये, इन लोगों में से कुछ का मनना है कि इन्फ्लेशन दर जरूरत से ज्यादा ही कम हो गई है, तो कुछ लोगों का मानना है कि bloomberg जैसे संस्थानों के पेश किये गये आंकडे ही झूठे हैं.