श्याम सरण नेगी हैं आज़ाद भारत के पहले वोटर

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1947 में देश आज़ाद हुआ. जवाहरलाल नेहरू आज़ाद भारत के पहले प्रधानमंत्री बने. देश गणतंत्र तो बन गया था लेकिन लोकतंत्र नहीं. क्योंकि जवाहरलाल नेहरु को अभी तक जनता ने प्रधानमंत्री नहीं चुना था. और अभी देश में जनता की सरकार नहीं थी.

भारत की अर्थव्यवस्था डगमग थी. सैकड़ों सालों तक लुटते रहने के बाद हालात बहुत खराब थे. एशिया के बाकी देशों में भी कुछ ठीक नहीं चल रहा था. 1950 आते- आते चीन को साम्यवाद ने जकड़ लिया. जॉर्डन और ईरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों का क़त्ल कर दिया गया. और कश्मीर मुद्दे को लेकर भारत भी उबल उठा.

इधर भारत को लोकतंत्र बनाने की कवायद शुरू हो गयी और देश चुनाव की तैयारी में जुट गया. चुनावों के लिए साल 1952 को चुना गया. और महीना चुना गया फरवरी. लेकिन बर्फबारी के चलते हिमाचल प्रदेश में सर्दियाँ शुरू होने से पहले, साल 1951 के अक्टूबर में ही चुनाव होना तय हुआ.

25 अक्टूबर 1951, हिमाचल प्रदेश में भारतीय लोकतंत्र का पहला वोट पड़ा. और ये वोट था श्याम सरण नेगी का. उनकी उम्र उस वक़्त करीब 34 साल रही होगी. तब से आजतक वो लगातार वोट कर रहे हैं. और लोकतंत्र का पहला वोटर होने के फ़र्ज़ को निभा रहे हैं.

आज उनकी उम्र 102 साल है, और वो इस उम्र में भी एक बार फिर वोट करने को तैयार हैं. इस उम्र में भी श्याम सरण नेगी वोट करने को लेकर उतने ही उत्साहित हैं जितने तब हुआ करते थे. वो अपने वोट की कीमत समझते हैं, और हर बार वोट करते हैं.

एक मीडिया संस्थान से बात करते हुए वो कहते हैं,

“मैं देश का सबसे पहला वोटर हूँ. पहला वोटर होने की ख़ुशी में फिर से दोबारा इलेक्शन में 102 वर्ष के आयु के साथ वोट देने, मतदान देने का अधिकार है, मैं बड़ी ख़ुशी महसूस करूंगा, और युवाओं के साथ मिलकर अच्छी सरकार बनाने की कोशिश होगी.”

हर बार चुनावों के वक़्त नेताओं के साथ ही हिमाचल प्रदेश में जो एक नाम चर्चा में रहता है, वो नाम श्याम सरण नेगी का ही है. उनका जन्म 1 जुलाई 1917 को हिमाचल प्रदेश के कल्पा में हुआ. वो एक रिटायर्ड स्कूल टीचर हैं, और एक बॉलीवुड फिल्म ‘सनम रे’ में भी दिखाई दिए हैं.

वो खुद तो हर बार वोट करते ही हैं, साथ ही युवाओं को वोट का महत्व भी समझाते हैं. साल 2014 में गूगल इंडिया ने एक वीडियो बनाया, इस वीडियो में श्याम सरण नेगी ने देश के पहले चुनाव में अपनी भागीदारी के बारे में बात भी की और लोगों को उनके वोट का महत्व समझाते हुए जागरूक भी किया.

साल 2007 के चुनावों से पहले हिमाचल और सोलन में जब फोटो वाले वोटर आईडी कार्ड बनाए जा रहे थे, तब तत्कालीन मुख्य चुनाव अधिकारी मनीषा नंदा अपने काम में लगी हुई थीं. एक वोटर आईडी पर नज़र पड़ी तो पता लगा कि वोटर की उम्र 90 साल से भी ज्यादा है. ये वोटर थे श्याम सरण नेगी.

अगले दिन किन्नौर की तत्कालीन जिलाधीश एम सुधा देवी ने खुद श्याम सरण नेगी से मुलाक़ात की. इस मुलाक़ात के दौरान श्याम सरण नेगी ने बताया कि वो आज़ाद भारत के सबसे पहले वोटर हैं. उनका ये दावा सुनकर एम सुधा देवी हैरान रह गईं. बात बड़ी थी इसलिए उन्होंने तुरंत इसकी जानकारी मनीषा नंदा को दी.

मनीषा नंदा को जब ये बात पता चली तो उन्हें भी हैरानी हुई. और एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ वो पूरे मामले की सच्चाई जांचने में लग गईं. जांच हुई, और इस जांच में ना जाने कितने दस्तावेज खंगाले गए, ना जाने कितनी रिकॉर्डिंग्स को जांचा गया, और अंत में लगातार 4 महीने की पड़ताल के बाद पाया गया कि श्याम सरण नेगी का दावा सही है.

बस तभी से सब ये बात जानते हैं कि श्याम सरण नेगी इस देश के पहले वोटर हैं. मनीषा नंदा ने हँसते हुए इस मामले की जांच करने के बाद बताया कि पूरे मामले की जाँच करना आसान नहीं था, ये किसी विषय पर पीएचडी करने जैसा ही था.

श्याम सरण नेगी हमें लोकतंत्र की कीमत समझाते हैं. इस उम्र में भी वोटिंग के लिए उनका इतना उत्साहित होना हमें समझाता है कि हमारे एक वोट की कीमत क्या है. वो लोग जो अपने वोट की कीमत नहीं समझते, और मतदान नहीं करते, उन्हें श्याम सरण नेगी से सीख लेनी चाहिए. हमारी चौपाल टीम की तरफ से उन्हें सलाम है, उनकी जिंदादिली को सलाम है.