पाकिस्तान समर्थक तुर्की को भारत ने दिया 2.3 बिलियन डॉलर का झटका

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कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के बाद तुर्की, मलेशिया और चीन ऐसे देश रहे जिन्होंने खुल कर पाकिस्तान का साथ दिया है. संयुक्त राष्ट्र जनरल असेम्बली में तुर्की ने कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के पक्ष में बयान दिया था. तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पिछले 72 सालों से कश्मीर समस्या का समाधान खोजने में नाकाम रहा है. संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के बावजूद कश्मीर में 80 लाख लोग फँसे हुए हैं. उन्होंने ये भी कहा था कि तुर्की आने वाले समय में भी अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर के मुद्दे को उठाता रहेगा.

लेकिन अपने इस बयान की कीमत अब तुर्की को चुकानी पड़ेगी. तुर्की के पाकिस्तान परस्त बयानों के बाद अब भारत ने उसे 2.3 बिलियन डॉलर का झटका देने का मन बना लिया है. भारत की प्रमुख नौसेना पोत बनाने वाली कंपनी ने तुर्की के साथ होने वाले 2.3 बिलियन डॉलर के समझौते को अब अनिश्चितकाल के लिए ठन्डे बसते में डाल दिया है.

प्रमुख यूरोपीय अखबार द यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़ तुर्की की कंपनी अनादोलू शिपयार्ड को भारतीय नौसेना पोत बनाने वाली कंपनी हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने 2.3 बिलियन डॉलर के FSS (fleet support ship) प्रोजेक्ट के लिए चुना था. लेकिन अब ये समझौते खटाई में पड़ गया है.

पहले आपको बता दें कि ये फ्लीट सपोर्ट शिप होता क्या है? फ्लीट सपोर्ट शिप एक रॉयल फ्लीट सहायक जहाज होता है है जो समुद्र में रॉयल नेवी जहाजों को गोला बारूद, विस्फोटक और भोजन जैसे शुष्क स्टोरों की आपूर्ति करता है. भारतीय कंपनी हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने टर्किश कंपनी अनादोलू शिपयार्ड को 45,000 टन के बेड़े के लिए ऐसे 5 फ्लीट सपोर्ट शिप बनाने के लिए चुना था. कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत होना बाकी था तभी संयुक्त राष्ट्र जनरल असेम्बली में तुर्की के राष्ट्रपति का कश्मीर पर बयान आ गया और भारत की तरफ से कॉन्ट्रैक्ट को होल्ड पर डाल दिया गया.

अनादोलू शिपयार्ड तीन अन्य विश्वस्तरीय कंपनियों के साथ इस प्रोजेक्ट को हासिल करने के लिए दावेदार थी. अन्य तीन कम्पनियाँ जर्मनी, इटली और रूस की थी. अनादोलू शिपयार्ड का चयन भी कर लिया गया था बस कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत होने बाकी थे लेकिन तभी UNGA में तुर्की का कश्मीर पर बयान आ गया और फिर इस कॉन्ट्रैक्ट को होल्ड पर डाल दिया गया.

वैसे तुर्की को सबक सिखाने के लिए भारत की तरफ से कड़े कदम पहली बार नहीं उठाये गए हैं. इससे पहले पीएम मोदी ने तुर्की के तीन पड़ोसी देशों साइप्रस, अर्मेनिय और ग्रीस के राष्ट्राध्यक्षों के साथ मुलाक़ात कर के भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने की पहल कर चुके हैं. ये तीन देशों के साथ रिश्ते बेहतर बनाने की पहल भारत की तरह से इसलिए की गई है क्योंकि तुर्की के साथ इन तीनों ही देशों के समबन्ध तनावपूर्ण हैं और भारत इन तीन देशों के साथ अपने समबन्धों को बढ़ावा दे कर तुर्की को घेरने की रणनीति पर कम कर रहा है. पीएम मोदी ने ये मुलाकातें न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र जनरल असेम्बली को संबोधित करने के बाद की थी.