चीन के दुश्मन देशों को ख़ास तौर पर हथियार बेच रहा है भारत

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हमारा एक पड़ोसी देश है चीन. ये देश लड़ने में बड़ा माहिर है और भारत को आँख दिखाने का लंबा इतिहास रखता है. अगर कुछ रिपोर्ट्स को ध्यान से देखा जाए तो पता चलता कि सिर्फ भारत ही ऐसा देश नहीं है जिससे चीन का विवाद चलता रहता है.

एशिया के और भी बहुत से देश हैं जिनके साथ इसकी तनातनी चलती है. इन देशों में ब्रूनेई, मलेशिया, फिलिपींस, ताइवान और वियतनाम जैसे देश शामिल हैं. इन सभी देशों से चीन अपनी सीमा को लेकर झगड़ता रहता है.

इसके ठीक दूसरी तरफ भारत पिछले कुछ वक़्त से लगातार तरक्की की सीढ़ियाँ चढ़ता जा रहा है. ऐसी ही तरक्की भारत ने डिफेन्स एक्सपोर्ट में भी की है. दूसरे देशों को एक्सपोर्ट किये जाने वाले हथियारों में भारत ने बहुत से नए हथियार शामिल किये हैं.

यही वज़ह है कि एक तरफ एशिया के बहुत से देश भारत से हथियार खरीदने के लिए आगे आ रहे हैं. और दूसरी तरफ भारत भी एशिया के उन देशों को हथियार बेचने में काफी दिलचस्पी दिखाता नज़र आ रहा है जिनके संबंध चीन के साथ अच्छे नहीं हैं.

ब्रूनेई, मलेशिया, फिलिपींस, ताइवान और वियतनाम दक्षिण चीन सागर के ऐसे ही देश हैं जो भारत के दोस्त हैं और चीन से दुश्मनी लिए हुए हैं. ये देश छोटे हैं, इनका रक्षाबजट कम है लेकिन इनमें चीन को लेकर असुरक्षा भी बहुत है.

यही वज़ह है कि बहुत ज्यादा रक्षा बजट ना होने के बावजूद ये देश हथियार तो खरीदते ही हैं. इनकी सूची में अधिकतर वो सुरक्षा से जुड़ा सामान और गोला बारूद होता है जो इनके बजट के अन्दर हो.

इसी क्रम में चीन के साथ 36 का आंकड़ा रखने वाला वियतनाम भारत से हथियारों की बड़ी खरीददारी कर रहा है. गोला-बारूद और छोटे-बड़े हथियारों की इस खरीद में भारत में बनी ब्रह्मोस मिसाइल भी शामिल है.

वियतनाम ने अपनी इस रक्षा खरीद के लिए भारत के साथ 500 मिलियन डॉलर का समझौता किया. वियतनाम के अलावा बांग्लादेश भी भारत से ऐसा ही एक रक्षा खरीद समझौता कर चुका है. उसकी तरफ से भी भारत को हथियारों का वियातनाम जितना बड़ा ही आर्डर मिला है.

इन दोनों देशों के अलावा एशिया के और भी बहुत से देश है जो भारत में बने तेजस फाइटर प्लेंस, ध्रुव हेलिकॉप्टर और आकाश मिसाइलों की खरीद पर विचार कर रहे हैं. भारत में बने लाइट वेट फाइटर प्लेन तेजस पर खासकर देशों के नज़र बनी हुई है.

पिछले कुछ सालों से भारत लगातार एशिया के इन देशों को अपने संबंधों के चलते अन्य देशों के मुकाबले सस्ते हथियार दे रहा है, और अपने एक्सपोर्ट को बढ़ा रहा है. समय के साथ भारत एक भरोसेमंद हथियारों का बाज़ार बनकर उभर रहा है.

लेकिन हथियारों के एक्सपोर्ट का भारत का ये सफ़र अभी का नहीं है. भारत अब से पहले भी दूसरे देशों को बहुत से हथियार बेच चुका है. इन हथियारों में आकाश और ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों के अलावा, तेजस, खोजी नौकाएं, इंसास राइफल आदि शामिल हैं.

इंडियन आर्डिनेंस फैक्ट्री, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड और भारत डायनामिक्स को साल 2017 में सिपरी की तरफ से दुनिया की 100 मुख्य कंपनियों में शामिल किया गया था जो डिफेन्स से जुड़ा सामान बनाती हैं 

आने वाले अगले पांच सालों में भारत अपने डिफेन्स एक्सपोर्ट में और भी बहुत से नए हथियार शामिल करने वाला है. ऐसी उम्मीद है कि आने वाले वक़्त में भारत पूरे विश्व के सामने हथियारों का एक बड़ा निर्यातक बन खड़ा होगा.

पूरी दुनिया के सामने भारत के कद को बढ़ता देखकर आजकल चीन के तेवर वैसे तो काफी फीके नज़र आते हैं, लेकिन इस खबर को जानने के बाद हमें वो दिन भी दूर नज़र नहीं आता जब भारत हर तरफ से दुश्मन चीन को अपने बनाए हथियारों से घेर चुका होगा.

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