अब भारत होने जा रहा है और भी शक्तिशाली, मिलेगा नाटो देशों जैसा दर्जा

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जी 20 समिट में हिस्सा लेने के लिए पीएम मोदी जापान गये था जहाँ उनकी मुलाक़ात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से भी हुई थी. दोनों नेताओं की मुलाक़ात पर हमने आपके लिए एक वीडियो बनायीं थी लेकिन अब जो खबर सामने आ रही हैं वो भारत के लिए एक अच्छी खबर है. अमेरिकी संसद ने भारत को नाटो देशों के समान दर्जा देने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब रक्षा संबंधों के मामले में अमेरिका भारत के साथ नाटो के अपने सहयोगी देशों, इजरायल और साउथ कोरिया की तर्ज पर ही डील करेगा.. पिछले हफ्ते ही ओसाका में जी-20 समिट के दौरान पीएम मोदी और ट्रम्प की बैठक हुई थी। दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा समेत कई मुद्दों पर चर्चा की थी। माना जा रहा है इस दौरान पीएम मोदी ने ट्रम्प पर दबाव बनाया था। इसके बाद ही यह फैसला किया गया।

अमेरिका आ‌र्म्स कंट्रोल एक्ट में संशोधन का यह प्रस्ताव डेमोक्रेट मार्क वार्नर और रिपब्लिकन जॉन कॉर्निन ने रखा है। प्रस्ताव में भारत को अमेरिका के बड़े रक्षा सहयोगी से ऊपर का दर्जा देने का प्रावधान है। प्रस्ताव के अनुसार भारत को नाटो सहयोगी वाला दर्जा मिलेगा। अमेरिका की तरफ लाया गया यह प्रस्ताव उसके खुद के फायदे के लिए है। इससे वह भारत को वे सभी हथियार और अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर कर सकेगा, जिन्हें सिर्फ नाटो देशों को ही सप्लाई किया जा सकता है। लिहाजा यह एकतरफा प्रस्ताव है जो भारत के साथ होने वाली हथियारों की खरीद-फरोख्त को आसान बनाएगा। हालाँकि अभी तक यह साफ़ नही हो पाया है कि इस फैसले के बाद भारत के सामने कौन कौन सी शर्तें रखी जाएँगी लेकिन उम्मीद जताई जा रही हैं भारत के सामने कोई रोड़ा नही आने वाला है.


अब दिमाग में सवाल जरूर उठता है कि नाटो भारत के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है? और नाटो आखिर है क्या? दरअसल इस फैसले के बाद भी भारत अपने रक्षा संबंधी साजो सामान खरीदने के लिए आजाद है। हद से हद भारत यह वादा करने के लिए बाध्य है कि जो हथियार या टेक्नोलॉजी वह अमेरिका से लेगा उसका इस्तेमाल वह खुद ही करेगा। कुल मिलाकर बात यह है कि अमेरिका भारत के साथ रक्षा कारोबार का रास्ता आसान बना रहा है। उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) कई देशों का रक्षा सहयोग संगठन है। इसकी स्थापना 4 अप्रैल 1949 को हुई थी जिसका मुख्यालय बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में है। शुरुवात में नाटो के सदस्य देशों की संख्या 12 थी जो अब बढ़कर 29 हो चुकी है. संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, कनाडा, इटली, नीदरलैंड, आइसलैण्ड, बेल्जियम, जर्मनी समेत कुल 29 देश शामिल है. अब इस लिस्ट में शामिल होने के लिए भारत सिर्फ एक कदम दूर है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस संशोधन बिल से भारत को अत्याधुनिक रक्षा उपकरण के निर्यात में मौजूदा कानूनी बाधाएं खत्म होंगी। इस तरह के उपकरण आम तौर पर कुछ ही देशों को दिए जाते हैं।


वैसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बनने के बाद से लगातार भारत की धमक पूरी दुनिया में देखने को मिल रही हैं. ऐसे में अमेरिका द्वारा उठाया गया ये कदम भारत के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए लिया गया है ऐसा हम मान सकते है.
वैसे भारत और अमेरिका के बीच व्यापार बड़ी मात्रा में चलता है. हाल ही में मोदी और ट्रम्प की मुलाकार जापान में हुई थी. दोनों की काफी गर्मजोशी से मुलाकात हुई और दोनों ने एक दुसरे का सहयोग और व्यापार के मुद्दे पर आगे बढ़ने को लेकर चर्चा हुई थी. वैसे भारत आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई छेड़ रखा है और भारत को अमेरिका की मदद भी मिल रही है. ऐसे में भारत को नाटो देशों जैसा दर्जा मिलने वाला है इससे भारत और मज़बूत होगा.