बढ़ती जनसंख्या से पैदा होने जा रही है बड़ी मुसीबत!

510

हर साल पूरा विश्व 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाता है. इस वक्त दुनिया की आबादी 7.7 बिलियन है जो हर दिन, हर घंटे, हर सेकंड बढ़ती जा रही है। ऐसे में बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने और आबादी से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने के मकसद से ही हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। जनसंख्या किसी देश के लिए वरदान होती है, परन्तु जब यह सीमा रेखा को पार कर जाती है, तब यह अभिशाप बन जाती है. लोगों को रहने के लिए अब जगह की कमी हो गई है. जिससे खेती के लिए भूमि घट रही है. जनसंख्या वृद्धि की समस्या अपने साथ-साथ अशिक्षा, गरीबी, बीमारी, भूखमरी, बेरोजगारी, आवास में कमी जैसी कई अन्य समस्या को भी न्योता देती है. इस दिन जनसँख्या नियंत्रण को लेकर लोगों को जागरूक किया जाता है. कैसे जनसंख्या को कंट्रोल करना है ये लोगों को समझाया जाता है. भारत की जनसंख्या किस कदर बढ़ रही हैं इसका अंदाजा इस बात लगा लीजिये कि स्वतन्त्रता यानि की सन् 1947 के समय भारत की जनसंख्या मात्र 36 करोड़ थी, लेकिन अब यूनाइटेड नेशन्स पॉपुलेशन फंड 2019 की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत की जनसंख्या 1,367,645,974 एक अरब छत्तीस करोड़ छिहत्तर लाख पैतालीस हजार नौ सौ चौहत्तर करोड़ है.जिसमें से पुरुषों की कुल जनसंख्या 51.3% तथा महिलाओं की कुल जनसंख्या 48.4 % है.

Source-News Nation

भारत में परिवार नियोजन पर कानून बनाने की मांग काफी समय से होती आ रही है. सबको पता है और सबको महसूस हो रहा है कि जनसख्या की वजह से संसाधन, खाद्य पदार्थ, योजनायें और पर्यावरण समेत कई चुनौतिया मुंह बाएं खड़ी हैं. कई देशों के लोगों ने बढती जनसख्या के खतरे को भाफते हुए परिवार नियोजन करना शुरू कर दिया है लेकिन भारत में मानो कॉम्पटीशन चल रहा है और यहाँ के लोग हैदराबादी पान खाने की सलाह देते हैं.
जनसंख्या के मामले में भारत का सबसे बड़ा शहर मुंबई है इसकी कुल जनसंख्या 12 करोड़ से भी अधिक है, दूसरे स्थान पर भारत की राजधानी दिल्ली की जनसंख्या 11 करोड़ से भी ज्यादा है.
जनसंख्या के मामले में भारत का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश है वही सबसे कम जनसंख्या वाला राज्य सिक्किम है.
दुनिया में केवल 4 देश चीन ,युनाईटेड स्टेस्स, भारत, इंडोनेशिया ऐसे है, जिनकी जनसंख्या भारत के राज्य उत्तर प्रदेश से ज्यादा है.
जनसंख्या के आधार पर दुनिया का सबसे बड़ा देश चीन जिसकी जनसंख्या 142 करोड़ के आसपास है. भारत और चीन की जनसंख्या के बीच का अंतर 7 करोड़ है.
जनसंख्या का आंकड़ा
विश्‍व जनसंख्या के आधार पर 0-14 आयु वर्ग की संख्या 26 फीसदी, 15-64 आयु वर्ग की संख्या 65 फीसदी और 65 से अधिक आयु वर्ग की संख्या 9 फीसदी है.
भारत की कुल जनसंख्या में 0-14 आयु वर्ग की संख्या 27 फीसदी, 15-64 आयु वर्ग की संख्या 67 फीसदी और 65 से अधिक आयु वर्ग की संख्या 6 फीसदी है.
चीन की कुल जनसंख्या में 0-14 आयु वर्ग की संख्या 18 फीसदी, 15-64 आयु वर्ग की संख्या 71 फीसदी और 65 से अधिक आयु वर्ग की संख्या 12 फीसदी है.

Source- Indian Express


अब यहाँ आपको यह भी बता दें कि मिली जानकारी के मुताबिक़ अगर अभी भारत में जनसंख्या नियंत्रण पर कानून नही बना तो अगले आठ सालों में भारत दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन जाएगा. लेकिन अगर किसी ने भारत में जनसंख्या नियंत्रण वाले कानून की पैरवी करे तो उसे विवादित बयान दिखाया जाता है.
जब भारत गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, पर्यावरण क्षरण, प्रदूषण और कई अन्य चुनौतियों के बोझ तले दबा हुआ है तब जनसंख्या के मामले में दुनिया में अव्वल होना भारत के विकास के सामने कई सवाल खड़े करता है। भारत में लोग अब शहरों की तरफ बढ़ रहे हैं. एक आकड़ें की माने तो 1960 में मात्र 18 फीसदी लोग शहरो में रहते थे लेकिन इस वक्त ये संख्या बढ़कर 34 फीसदी पहुँच गयी है. नौकरी और अच्छे रोजगार या काम के चलते लोग शहर की तरफ भाग रहे हैं. एल छोटे से कमरे में रहकर पता नही कितने सपने देख जाते हैं.. ना पीने का शुद्ध पानी है, ना ताज़ी हवा है.. ना शुद्ध खाना है और ना ही मनमानी जिन्दगी है. भारत की जनगणना 2011 के अनुसार देश में 65 मिलियन से अधिक लोग झुग्गियों में रहते हैं, जो कि ऑस्ट्रेलिया की कुल जनसंख्या के दोगुने से अधिक है। लगातार दो साल के कमजोर मानसून के बाद 330 मिलियन लोग यानी देश की एक चौथाई आबादी सूखे से प्रभावित है। लगभग 50 प्रतिशत भारत सूखे जैसी स्थिति से जूझ रहा है.. एक तरह जहाँ जब भारत गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, प्रदूषण और कई अन्य चुनौतियों के बोझ तले दबा हुआ है वहीँ दूसरी तरफ जनसंख्या के मामले में दुनिया में अव्वल होता जा रहा है तब भारत के विकास के सामने कई सवाल खड़े होते है.


भारत में अब कुछ लोग इस बात को समझने लगे है कि अगर उन्होंने परिवार नियोजन पर सीख नही लिया तो ये उनके लिए ही मुसीबत बनने वाली है. वो इस पर नियंत्रण कर रहे हैं. एक नारा दिया गया था हम दो हमारे दो.. लेकिन सही मायने में अब ये नारा भी गलत है.. हम दो हमारे एक ही देश और हमारे लिए सही होगा.. लेकिन देश में कुछ समुदाय विशेष के लोगों में परिवार नियोजन हराम माना जाता है.. कंडोम का उपयोग हराम माना जाता है.. नसबंदी हराम माना जाता है.. और तो और कुछ इस समुदाय से कुछ नेता तो ऐसे हैं जो इन्हें और बढ़ावा देते रहे हैं.. बच्चों की लाइन लगाने की बात करते रहे हैं.. वे तो यहाँ तक कहते हैं कि अगर तुम्हारे अंदर हिम्मत है तो तुम भी करो.. भैया करना कोई बड़ी बात नही है.. लेकिन ज्यादा बच्चे पैदा करना आज के समय में आप सबसे बड़े मुर्ख और अनपढ़ है इस बात की पहली और ठोस निशानी है.