लोकसभा में आखिर ओवैसी पर क्यों भड़क गये गृह मंत्री अमित शाह!

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लोकसभा में NIA संशोधन विधेयक बिल पास गया है. जिसमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को भारत से बाहर किसी गंभीर अपराध के संबंध में मामले का पंजीकरण करने और जांच का निर्देश देने का प्रावधान किया गया है.. इस बिल के लिए लोकसभा 278 के मुकाबले विरोध में मात्र 6 वोट पड़े.. लेकिन जब इस बिल पर सदन में चर्चा हो रही थी तब सदन में असुद्दीन ओवैशी और गृह मंत्री अमित शाह में जोरदार और तीखी बहस भी हुई,.. ये आपको हम आगे बताएँगे लेकिन अभी हम आपको ये बताने जा रहे है आखिर इस NIA संशोधक विधेयक में आखिर अब क्या बदलाव किया जा रहा है.


इस संसोधन से NIA को नई ताकत मिलने जा रही है. जो इस प्रकार है.

  • विदेश में भारतीयों या भारत के हितों के खिलाफ अपराध की जांच कर सकेगी NIA
  • साइबर अपराध और मानव तस्करी के मामलों का भी एनआईए अन्वेषण कर सकेगी।
  • नकली नोटों के कारोबार की भी NIA जाँच करेंगी.
  • अवैध हथियारों की खरीद बिक्री की भी जांच पड़ताल अब NIA कर सकेगी.
  • अब NIA कहीं भी जांच कर सकेगी, गिरफ्तारी कर सकेगी. और इसके लिए अब राज्य पुलिस की पूर्व अनुमति की जरूरत नही है.

    हालाँकि सरकार का कहना है कि एजंसी और राज्य सरकार में तालमेल बना रहेगा और अगर जरूरत पड़ेगी तो पुलिस ने अनुमति भी ली जाएगी.
    एनआईए की स्थापना से पहले चरमपंथ या आतंकी मामलों की जांच के लिए सीबीआई को राज्य सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है। राजनीतिक या गैर-राजनीतिक कारणों से अनुमति मिलने में देर हो तो स्थानीय पुलिस जांच को आगे बढ़ाती है। एनआईए कानून के अनुसार एजेंसी को किसी मामले को हाथ में लेने के लिए राज्य सरकार की अनुमति की ज़रूरत नहीं होगी। उसे ज़रूरत होगी तो सिर्फ़ केंद्र सरकार की अधिसूचना की।


    अब तक एनआईए की क्या सफलता रही है.
  • NIA ने 272 मामलों की प्राथमिकी दर्ज की जांच शुरू की।
  • 52 मामलों में फैसला आया, 46 में दोषसिद्धी हुई
  • कई आंतकियों के कनेक्शन को ध्वस्त कर चूका है NIA



    विधेयक क्यों जरूरी
    गृहमंत्री अमित शाह ने सदन में कहा, यह समझना होगा कि श्रीलंका में हमला हुआ, हमारे लोग मारे गए, बांग्लादेश में हमारे लोग मारे गए लेकिन देश से बाहर जांच करने का अधिकार एजेंसी को नहीं है। ऐसे में यह संशोधन एनआईए को ऐसी जांच का अधिकार प्रदान करेगा. गृह मंत्री अमित शाह ने यह भी कहा, “कार्रवाई करते वक्त किसी का धर्म नहीं देखते। हमें आतंक के खिलाफ एक होकर लड़ना चाहिए और यह कानून एजेंसी को ताकत देने का काम करेगा।” वहीँ कांग्रेस के नेता मनीष तिवारी ने कहा कि “सरकार एनआईए और आधार जैसे कानूनों में संशोधन करके भारत को ‘पुलिस स्टेट’ में बदलना चाहती है। एनआईए पुलिस एजेंसी जैसा न बनाएं।”..
  • वहीँ जब इस बिल पर सदन में चर्चा हो रही थी उसी समय में ओवैशी और अमित शाह के बीच जोरदार बहस भी हुई और खुद गृह मंत्री अमित शाह ने ओवैशी को जवाब भी दिया. दरअसल, हुआ कुछ ऐसा कि बीजेपी नेता सत्यपाल सिंह ने कहा कि हैदराबाद के एक पुलिस प्रमुख को एक नेता ने एक आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने से रोका था और कहा था कि वह कार्रवाई आगे बढ़ाते हैं तो उनके लिए मुश्किल हो जाएगी। इसी बीच ओवैसी अपने स्थान पर खड़े हो गए और कहा कि बीजेपी सदस्य जिस निजी वार्तालाप का उल्लेख कर रहे हैं और जिनकी बात कर रहे हैं वह यहां मौजूद नहीं हैं।
    इस पर सदन में मौजूद गृह मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि जब DMK सदस्य ए. राजा बोल रहे थे तो ओवैसी ने क्यों नहीं टोका? वह BJP के सदस्य को क्यों टोक रहे हैं? अलग-अलग मापदंड नहीं होना चाहिए। इस पर ओवैसी ने कहा कि आप गृह मंत्री हैं तो मुझे डराइए मत, मैं डरने वाला नहीं हूं। शाह ने ओवैसी का जवाब देते हुए कहा कि किसी को डराया नहीं जा रहा है, लेकिन अगर डर जेहन में है तो क्या किया जा सकता है। इसके बाद संसद से निकलकर संसद भी ओवैसी ने गृह मंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो कोई भी उनके (बीजेपी) फैसलों का समर्थन नहीं करता वे उसे देशद्रोही कहते हैं। क्या उन्होंने राष्ट्रभक्त और देशद्रोहियों की दुकान खोल रखी है?’ ‘अमित शाह ने मेरी तरफ उंगली कर धमकाया लेकिन वह सिर्फ एक गृह मंत्री, भगवान नहीं। उन्हें पहले नियमों को पढ़ना चाहिए।’ धमकाने और डराने की बात पर जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा था कि अगर आपके जेहन में डर भरी हुई है तो क्या किया जा सकता है.

  • इससे पहले ही गृहमंत्री अमित शाह ने विधेयक के पारित होने के लिए सभी दलों से समर्थन मांगा था , उन्होंने कहा कि एजेंसी को मजबूत करने के मुद्दे पर सदन में एक विभाजन एक गलत संदेश भेजेगा और आतंकवादियों के मनोबल को बढ़ाएगा.
    हालाँकि अब यह विधेयक लोकसभा में पास हो चूका है अब राज्यसभा में पहुँच चूका है.हालाँकि विपक्ष का कहना है की NIA को ताकत देकर एक विशेष समुदाय के लोगों को और परेशान करने की नई कवायद है एक और कोशिश है लेकिन ये सब कहते दिखते है कि आतंकवाद का कोई धर्म नही होता लेकिन आतंक के खिलाफ कार्रवाई होने पर कुह लोगों को दर्द जरूर होता है.